गोरखनाथ का जीवन परिचय(gorakhanath ka jeevan parichay)

                                                                       🌺गोरखनाथ का जीवन परिचय 🌺

🌺समय 845ई. (राहुल सांकृत्यायन के अनुसार)

🌺नौवीं शती( आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार)

🌺 13वीं शती (आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार )

🌺11वीं शती (पीतांबर दत्त बड़थ्वाल के अनुसार)

🌺 जन्मपंजाब में( ब्रिग्स के अनुसार)

🌺 कांगड़ा में (डॉ. बच्चन सिंह के अनुसार)

🌺पश्चिमी हिमालय के रहने वाले (ग्रियर्सन के अनुसार)

🌺 नाथ संप्रदाय के प्रवर्तक (डॉ. बच्चन सिंह के अनुसार)

🌺भक्ति आंदोलन के पूर्व सबसे शक्तिशाली और धार्मिक आंदोलन गोरखनाथ का भक्ति मार्गी था। गोरखनाथ अपने युग के सबसे बड़े नेता थे।(आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार)

🌺 गोरखनाथ ने पंजाब, गुजरात,काठियावाड़ उत्तर प्रदेश,नेपाल,असम,उड़ीसा आदि यात्रा की थी ।

🌺 गोरखनाथ संप्रदाय नाथ सम्प्रदाय का कहा जाता है।

🌺 गोरखनाथ ने संस्कृत में भी लिखा है और देसी भाषा में भी।

🌺 गोरख के संस्कृत ग्रंथों की संख्या9 (मित्र बंधुओं के अनुसार)

🌺 गोरखपुर लिखित द्वारा18 पुस्तकें(आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार )

🌺 गोरख द्वारा रचित महत्वपूर्ण पुस्तकेंसिद्ध सिद्धांत पद्धति, गोरख संहिता, अमरौघशासनम्, महार्थमंजरी।

🌺 सिद्ध सिद्धांत पद्धति को आचार्य रामचंद्र शुक्ल नाथपंथी ग्रंथ मानते हैं ।

🌺 गोरखनाथ को हिंदी का प्रथम गद्य लेखक माना है (मिश्रबन्धुओं के अनुसार )

🌺 आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने गोरखनाथ की दस हिंदी पुस्तकों का उल्लेख किया है।

🌺 आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी में लिखी पुस्तकों को संस्कृत में लिखी नाथ पंथी पुस्तकों का सार माना

🌺 पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल ने सर्वप्रथम गोरख की बानियों का संग्रह – गोरखबानी (1930ई.) नाम से संपादित किया ।

🌺 पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल ने गोरख की 40 पुस्तकों का उल्लेख किया है । जिनमें ‘सबदी’ को सबसे अधिक प्रमाणिक मानते हैं ।

🌺 गोरखनाथ के ग्रंथों की संख्या 40 (नगेन्द्र के अनुसार)

🌺गोरखबानी की भाषा खड़ी बोली मिश्रित राजस्थानी है और कबीर की खड़ी बोली मिश्रित राजस्थानी,ब्रज और भोजपुरी।(आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार)

🌺 आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने सिद्धों और नाथों की रचनाओं को साहित्य की कोटि में नही गिना है।

🌺 ” सिद्धों और योगियों की रचनाएं साहित्य कोटि में नहीं आती और योगधारा काव्य या साहित्य की कोई धारा नहीं मानी जा सकती है ।”(आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार)

🌺 गोरखनाथ ने सिद्धों के मार्ग का विरोध किया था।

🌺 गोरखनाथ की रचनाओं में गुरु – महिमा, इंद्रिय – निग्रह, प्राण साधना, वैराग्य, मनः साधना,कुंडलिनी जागरण,शून्यसमाधि आदि का वर्णन

🌺 गोरखनाथ ने हठयोग का उपदेश दिया था।हठयोगियों के सिद्ध – सिद्धांत पद्धति ग्रंथ के अनुसार ह का अर्थ – सूर्य, ठ का अर्थ – चंद्रमा

🌺 गोरखनाथ ने लिखा है कि धीर वह जिसका चित्त विकार – साधन होने पर भी विकृत नहीं होता है।

” नौ लख पातरि आगे नाचै,पीछे सहज अखाड़ा।ऐसे मन लै जोगी खेलै ,तब अंतरि बसै भंडारा।।”

🌺 गोरखनाथ की हठ योग साधना में ईश्वरवाद व्याप्त था।

🌺 गोरखनाथ के अन्य नाम:-
अनंगवज्र (सुप्रसिद्ध तिब्बती ऐतिहासिकता तारानाथ के अनुसार)

रमण वज्र(म.म .हर प्रसाद शास्त्री के अनुसार)

🌺गोरखनाथ के शिष्य धर्मनाथ को ग्रियर्सन ने गोरखनाथ का सतीर्थ कहा है ।

🌺 गोरखनाथ पहले वज्रयानी साधक थे,बाद में शैव हुए थे। (ब्रिग्स के अनुसार)

🌺 गोरखनाथ ने षट्चक्रों वाला का योगमार्ग हिंदी साहित्य में चलाया था।

🌺 षट्चक्र के नाम:
1 मूलाधार -रीढ़ के अधो – भाग में वायु और मुष्क मूल के मध्य।
2. स्वाधिष्ठान– मेरुदंड के मेढ़ के ऊपर
3. मणिपुर – मेरुदंड में नाभि के पास।
4. अनाहत – हृदय के पास ।
5. विशुद्धाख्य– कंठ के पास ।
6. आज्ञ चक्र -ध्रुव के बीच में

क्रमश संख्या

विद्वानों का नाम

गोरखनाथ के ग्रंथों की संख्या

1.

मिश्रबन्धुओं

9 पुस्तकें

2.

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

              10  हिंदी पुस्तकें

3.

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

18 पुस्तकें

4.

पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल

40 पुस्तकें

5.

नगेन्द्र

40 पुस्तकें

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