द्विवेदी काल की प्रमुख प्रवृत्तियां (dvivedi kal ki pramukh pravrttiyan)

द्विवेदी काल (1900-1918) हिंदी साहित्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अवधि है। इस काल का नाम आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने हिंदी साहित्य को एक नया दृष्टिकोण और दिशा दी। इस काल की प्रमुख प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं:

 

  🌺 द्विवेदी युगीन काल की प्रवृत्तियां🌺

1. आदर्श एवं नैतिकता का प्राधान्य।

2. राष्ट्रीयता अथवा देशभक्ति।

3. मानवता वादी विचारधारा का प्रादुर्भाव।

4. इतिवृत्तात्मकता।

5. काव्य भाषा के रूप में खड़ी बोली की प्रतिष्ठा।

6. मुक्तिको की अपेक्षा प्रबंध काव्यों की रचना अधिक।

7. जागरण सुधार -राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सुधार, सामाजिक चेतना, मानवतावादी आदि।

8. सौद्देश्यता आदर्शपरकता एवं नीतिमत्ता

9. आधुनिकता ।

10. समस्यापूर्ति ।

11. कहानी उपन्यास निबंध तथा आलोचना अधिक गद्य की समुचित विकास।

 

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