प्लेटो का काव्य सिद्धांत(pleto ka kavy siddhant)

• कवि की प्रतिभा को ईश्वर की देन।( यह पूर्व युग में माना)
• काव्य रचना को देवी प्रेरणा का परिणाम।( यह पूर्व युग में माना)
• प्लेटो ने बौद्धिक आनंद स्वीकारा ।
• प्लेटो ने ऐन्द्रिय आनंद को स्वीकार नहीं किया।
• सामान्य (विश्व जनिन) सत्य को सत्य मानना कविता के सत्य को नहीं माना।
• वस्तु जगत प्रत्यय जगत का अनुकरण ।
• कला जगत वस्तु जगत का अनुकरण।
• कला जगत अनुकरण का अनुकरण है यह मानकर उसमें मिथ्यातत्व का आरोप कर कला को हेय माना।
• ईश्वरीय उन्माद (देवी प्रेरणा) को काव्य हेतु माना।
• प्लेटो ने के कला अनुकरण मूलकता के संदर्भ प्रमुख दोष- सर्जनशीलता की अवहेलना ।
• संपूर्ण चिंतन का मुख्य उद्देश्य – आदर्श राज्य का निर्माण ।
• काव्य के तीन प्रमुख भेद-
1. अनुकरणात्म(प्रहसन और दु:खांतक [नाटक])
2. वर्णनात्मक (डिथी टैब [प्रगीत])
3. मिश्र (महाकाव्य)
• प्लेटो का काव्य प्रयोजन:- उपयोगितावादी एवं नैतिकतावादी
• प्लेटो का काव्य हेतु:- ईश्वरीय उन्माद(दैवीय प्रेरणा)
• काव्य को दर्शन से विरोध।
• दर्शन को काव्य से श्रेष्ठ।
• प्लेटो ने अनुकरण का अर्थ माना:-
1. सस्ती और त्रुटि पूर्ण अनुकृति।
2. सभी कलाओं की मौलिक विशेषता।
3. कल्पना तथा रचनात्मक शक्ति ।
4. ईश्वर की सत्य की अनुकृति।(स्वीकारा)
5. कवि अनुकृति की अनुकृति करता है।(मान्यता)

• प्लेटो के अनुकरण सिद्धांत की मान्यताएंं:-
1. प्रत्यय जगत ही सत्य है। (ईश्वर द्वारा रचित)
2. वस्तु जगत प्रत्यय जगत की अनुकृति। (मित्था या असत्य)
3. कला जगत वस्तु जगत का अनुकरण अर्थात् अनुकरण का अनुकरण होने के कारण।(मिथ्या)

• प्लेटो के अनुसार :-
प्रथम स्थान :- प्रत्यय जगत( परम सत्य)का
दूसरा स्थान :- वस्तु जगत का
तीसरा स्थान :-कला जगत का
• प्लेटो ने पलंग का उदाहरण देकर समझाया :-
√ ईश्वर द्वारा निर्मित पलंग प्रत्ययात्मक रूप ही सत्य है।
(प्रत्यय सत्य)
√ पलंग के आभास या प्रतिबिंब को असत्य माना।
(वस्तु जगत – असत्य)
√ वस्तु जगत के प्रतिबिंब का कला जगत का है ।
(कला जगत – असत्य )
वस्तु जगत एवं कला जगत दोनों को असत्य इसलिए माना है कि ईश्वर द्वारा निर्मित पलंग की नकल करके ही दूसरे पलंग का निर्माण होगा।इस आधार पर प्लेटो ने “कला नकल की कला है, छाया की छाया है “कहा है ।
यह स्थिति कवि की है और काव्य जगत भी मित्था या असत्य है क्योंकि वह छाया की छाया अथवा अनुकृति ही
की अनुकृति है ।
• प्लेटो ने माना :-
1. कवि अनुकृति की अनुकृति है।
2. कवि अज्ञानी है।
3. कवि अज्ञान का प्रसारक है ।
4. काव्य क्षुद्रमानवीय भावों और कल्पना पर आधारित।
5. काव्य वासनाजन्य क्षुद्र भावों को जगाता है।
6. कवि समाज में अनाचार एवं दुर्बलता पोषण करने का अपराधी है।
• कवि को काव्य सृजन की प्रेरणा दैवी शक्ति से प्राप्त होती है ।(प्लेटो का मत)
• कलागत सर्जनशीलता को नजर अंदाज करना।(प्लेटो की भ्रांति का मूल कारण)

 

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