राही कहानी(rahi kahani)

           💐 राही कहानी 💐
        【सुभद्राकुमारी चौहान】

◆ प्रकाशन :- 1947ई.

◆  ‘सीधे सादे चित्र’कहानी संग्रह से

◆  पात्र :- चोरी का दोषी राही
               स्वतंत्रता सेनानी अनीता

◆ राही को किस अपराध में सज़ा हुई ?
– चोरी की थी, सरकार ।

◆ राही सरकार कहकर किसे संबोधित कर रहा था ? :- अनिता को

◆ राही ने क्या चुराया था ? :- अनाज की गठरी(पाँच-छः सेर)

◆ राही को अनाज की गठरी चुराने के कारण कितने साल की सज़ा हुई ? :- एक साल की

◆ राही ने चोरी क्यों की? :-  भीख न मिलने के कारण घर में खाने को नहीं था

◆ राही कौनसी जाति का थी ? :-   माँगरोरी  (इस जाति लोग केवल माँगकर-खाते हैं।)

◆ राही चोरी इस वजह से की :- बच्चे भूख से तड़प रहे थे। बाजार में बहुत देर तक माँगा बोझ ढोने के लिए टोरा लेकर भी बैठी रही। पर कुछ न मिला। सामने किसी का बच्चा रो रहा था, उसे देखकर मुझे अपने भूखे बच्चों की याद आ गई। वहीं पर किसी की अनाज की गठरी रखी हुई थी। उसे लेकर भागी ही थी कि पुलिसवाले ने पकड़ लिया ।

◆ अनिता ने कहां – फिर तूने कहा नहीं कि बच्चे भूखे थे, इसलिए चोरी की । संभव है इस बात से मजिस्ट्रेट कम सज़ा देता ।

◆ हम गरीबों की कोई नहीं सुनता, सरकार ! (राही का कथन)

◆ राही के बच्चे किसके पास थे? :-  अकेले थे (क्योंकि बच्चे का पिता मर गया था।)

◆ राही के पति को जेल में पीटा गया और अस्पताल में मर गया।

अब बच्चों का कोई नहीं है। ” तो तेरे बच्चों का बाप भी जेल में ही मरा। वह क्यों जेल आया था ?” अनिता ने प्रश्न किया ।

◆ राही के पति किस कारण जेल में गया था?:- ताड़ी (एक मादक पेय है जो ताड़ की विभिन्न प्रजाति के वृक्षों के रस से बनती है) पीने को गया था । दो-चार दोस्त भाई उसके साथ थे । उसका पुलिसवाले से झगड़ा हो गया था,उसी का बदला उसने लिया । 109 में उसका चालान करके साल भर की सजा दिला दी। वहीं वह मर गया।

◆अनीता किस कारण जेल आई थी। :- सत्याग्रह के कारण

◆ अनीता को जेल में ‘बी’ क्लास दिया था फिर उसके घरवालों ने लिखा-पढ़ी करके उसे ‘ए’ क्लास दिलवा दिया।

अनीता के सामने आज एक प्रश्न था :-   देश की दरिद्रता और इन निरीह गरीबों के कष्टों को दूर करने का कोई उपाय नहीं है ?

◆  हम सभी परमात्मा की संतान हैं। एक ही देश के निवासी ।हम सबको खाने पहनने का समान अधिकार है।

◆  फिर यह क्या बात है कि कुछ लोग तो बहुत आराम से रहते हैं और कुछ लोग पेट के अन्न के लिए चोरी करते हैं? उसके बाद विचारक की अदूरदर्शिता के कारण या सरकारी वकील के चातुर्यपूर्ण जिरह के कारण छोटे – छोटे बच्चों की मातायें जेल भेज दी जाती हैं। उनके बच्चें भूखों मरने के लिए छोड़ दिये जाते हैं। एक ओर तो यह कैदी है, जो जेल आकर सचमुच जेल जीवन के कष्ट उठाती है, और दूसरी ओर हैं हम लोग जो अपनी देशभक्ति और त्याग का ढिंढोरा पीटते हुए जेल आते हैं। हमें आमतौर से दूसरे कैदियों के मुकाबिले में अच्छा बरताव मिलता है फिर भी हमें संतोष नहीं होता। हम जेल आकर ए’ और ‘बी’ क्लास के लिए झगड़ते हैं। जेल आकर ही हम कौन-सा बड़ा त्याग कर देते हैं ? जेल में हमें कौन-सा कष्ट रहता है ? सिवा इसके कि हमारे माथे पर नेतृत्व की सील लग जाती है।

◆ हम जितने बार जेल जा चुके होते हैं उतनी ही सीढ़ी हम देशभक्ति और त्याग से दूसरों से ऊपर उठ जाते हैं और इसके बल पर जेल से छूटने के बाद, कांग्रेस को राजकीय सत्ता मिलते ही, हम मिनिस्टर, स्थानिक संस्थाओं के मेम्बर हो जाते हैं।

◆ अनीता सोच रही थी – कल तक जो खद्दर भी न पहिनते थे, बात-बात पर कांग्रेस का मजाक उड़ाते थे, कांग्रेस के हाथों में थोड़ी शक्ति आते ही वे कांग्रेस भक्त बन गए । 

◆ खद्दर पहनना और जेल में जाना क्या देशभक्ति है या सत्ताभक्ति ।

अनीता के विचारों का ताँता लगा हुआ था। वह दार्शनिक हो रही थी। उसे अनुभव हुआ जैसे कोई भीतर-ही-भीतर उसे काट रहा हो। अनीता की विचारावलि अनीता को ही खाये जा रही थी। उसी बार-बार

◆ अनिता को लग रहा था कि उसकी देशभक्ति सच्ची देशभक्ति नहीं वरन् मज़ाक है।

◆ सच्ची देशभक्ति :- गरीबों के कष्ट निवारण में ।
◆ भारतमाता की संतानें :- गरीब लोग

◆  गरीब हज़ारों, लाखों भूखे नंगे भाई-बहिनों की यदि हम कुछ भी सेवा कर सकें, थोड़ा भी कष्ट-निवारण कर सकें तो सचमुच हमने अपने देश की कुछ सेवा की।

◆ किसानों की दुर्दशा से हम सभी थोड़े-बहुत परिचित हैं, पर इन गरीबों के पास न घर है, न द्वार । अशिक्षा और अज्ञान का इतना गहरा पर्दा इनकी आँखों पर है कि होश सँभालते ही माता पुत्री को और सास बहू को चोरी की शिक्षा देती है ।

◆ गरीबों का यह विश्वास है कि चोरी करना और भीख माँगना ही उनका काम है।

◆  इससे अच्छा जीवन बिताने की गरीब लोग कल्पना ही नहीं कर सकते।

◆ संसार की मृगमरीचिका में हम लक्ष्य को भूल जाते हैं। सतह के ऊपर तक पहुँच पानेवाली कुछ महान आत्माओं को छोड़कर सारा जन-समुदाय संसार में अपने को खोया हुआ है।

◆ कर्तव्य – अकर्त्तव्य का उसे ध्यान नहीं, सत्य-असत्य की समझ नहीं, अन्यथा मानवीयता से बढ़कर कौन-सा मानव धर्म है ?

◆ पतित मानवता को जीवन दान देने की अपेक्षा भी कोई महत्तर पुण्य है ?

◆  राही जैसी भोली-भाली किन्तु गुमराह आत्माओं के कल्याण की साधना जीवन की साधना होनी चाहिए।

◆ अनीता ने सपना में देखा :-
★ जेल से छुटकार वह इन्हीं माँगरोरी लोगों के गाँव में पहुँच गई है।
★ वहाँ उसने एक छोटा-सा आश्रम खोल दिया है।
★ उसी आश्रम में एक तरफ छोटे-छोटे बच्चे पढ़ते हैं और स्त्रियाँ सूत काटती हैं। दूसरी तरफ़ मर्द कपड़ा बुनते हैं और रुई धुनकते हैं।
★ शाम को रोज़ उन्हें धार्मिक पुस्तकें पढ़कर सुनाई जाती हैं
★ वही भीख माँगने और चोरी करनेवाले आदर्श ग्रामवासी हो चले हैं।
★  रहने के लिए उन्होंने छोटे-छोटे घर बना लिए हैं।
★ राही के अनाथ बच्चों को अनीता अपने साथ रखने लगी है।

◆  स्त्री जेलर ने अनीता को बोली – आप घर जाने के लिए तैयार हो जाइए। आपके पिता बीमार हैं। आप बिना शर्त छोड़ी जा रही हैं।

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