रीतिकाल में रचित सर्वांग निरूपण ग्रंथ(ritikal mein rachit sarvang niroopan granth)

🌺रीतिकाल में रचित सर्वांग निरूपण ग्रंथ🌺

● सेनापति :- काव्य कल्पद्रुम

 

● चिन्तामणि :- कविकुलकल्पतरु

 

● चिन्तामणि :- काव्यविवेक

 

● कुलपति मिश्र :- रस-रहस्य

 

● देव :- शब्द रसायन

 

● सुरति मिश्र :- काव्यसिद्धान्त

 

● श्रीपति :- काव्यसरोज

 

● भिखारीदास :- काव्यनिर्णय

 

● सोमनाथ :- रसपीयूषनिधि

 

● कुमारमणि भट्ट :- रसिकरसाल

 

● रसिकगोविन्द :- रसिक गोविन्दानन्दघन

🌺रीतिकालीन सर्वांग निरूपण ग्रंथों की विशेषताएं:

  • इन ग्रंथों में काव्य के समस्त अंगों का विस्तृत और गहन विवेचन किया गया है।

  • इन ग्रंथों में काव्य के सिद्धांतों को सरल और सुबोध भाषा में समझाया गया है।

  • इन ग्रंथों ने रीतिकालीन काव्य में रस, अलंकार और छंदों के प्रयोग को अधिक परिष्कृत और कलात्मक बनाया।

 

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