सूफी काव्य की प्रवृत्तियां(sufi kavy ki pravatiya)

सूफी काव्य की प्रवृत्तियां(sufi kavy ki pravatiya)

1. हिंदू घरों में प्रचलित लोक कथाओं को आधार बनाया।

2. गुरु का महत्व।

3. इतिहास एवं कल्पना का योग।

4. नायक साधक एवं नायिका का परमात्मा के रूप में।

5. प्रेम की मानवता मूल्य के रूप में स्थापना।

6. लोक जीवन एवं लोक संस्कृति का गहन चित्रण।

7. हिंदू हृदय एवं मुस्लिम हृदय को आमने – सामने रखकर समन्वय करने का प्रयास किया।

8. विरहानुभूति का मार्मिक चित्रण।

9. मसनवी शैली में प्रबंध काव्यों की रचना।

10. अवधी भाषा का प्रयोग।

11. प्रकृति का रूढ़ियों का प्रयोग।

12. प्रकृति का उद्दीपन रूप में चित्रण।

13. प्रमुख रस- श्रृंगार रस।

14. ईश्वर की लीलाओं का गायन।

15. गौण प्रसंगों की भरमार व काव्योतर विषयों का समावेश।

16. द्वन्द्वात्मक काव्य – शिल्प (लोक कथा एवं शिष्ट कथा का मेल)

17. चौपाई दोहे में कडवक बद्ध।

18. सूफी जनमानस के कवि।

19. लोकरंगत के कारण वस्तु प्रायः इतिवृत्तात्मक, अभिद्यापरक शैली में किए गए हैं।

20. सूफी कवियों के साहित्य की आत्म में विशुद्ध भारतीय है।

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