Author Archives: Puran Mal Kumhar

पंडित बालकृष्ण भट्ट:  सामान्य परिचय एवं साहित्यिक योगदान मण्डल: भारतेन्दु मण्डल के प्रमुख स्तम्भ। उपाधि/महत्त्व: भारतेन्दु मण्डल के लेखकों में पं. प्रतापनारायण मिश्र साहित्य व संस्कृति के पुरोधा थे, जबकि बालकृष्ण भट्ट सामयिक क्रान्ति के अग्रदूत थे। प्रमुख पत्र: ‘हिन्दी प्रदीप’ (मासिक पत्र)। इसके माध्यम से राष्ट्र को अस्मिता की पहचान कराई। जीवनी सम्बन्धी प्रमुख स्रोत: ‘सरस्वती’ (1914) में प्रकाशित ...

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कवि सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ रचित ‘मोचीराम’ और ‘घर में चार जोड़ी आँखें’ की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य

कवि सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ रचित ‘मोचीराम’ और ‘घर में चार जोड़ी आँखें’ की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य साठोत्तरी हिंदी कविता के विद्रोही और जनवादी कवि सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ की बहुचर्चित और लंबी कविता ‘मोचीराम’ का संदर्भ, प्रसंग, प्रमुख काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवि: सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ मूल काव्य संग्रह: संसद से सड़क तक (1972) पाठ्यपुस्तक: ...

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कवि श्रीकांत वर्मा रचित ‘मगध’ की कविता ‘हस्तक्षेप’ की सप्रसंग व्याख्या और विशेष बिंदु

कवि श्रीकांत वर्मा रचित ‘मगध’ की कविता ‘हस्तक्षेप’ की सप्रसंग व्याख्या और विशेष बिंदु समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर श्रीकांत वर्मा के चर्चित काव्य-संग्रह ‘मगध’ से संकलित राजनीतिक एवं यथार्थवादी कविता ‘हस्तक्षेप’ का संदर्भ, प्रसंग, प्रत्येक पंक्ति की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवि: श्रीकांत वर्मा मूल काव्य संग्रह: मगध (1984) पाठ्यपुस्तक: अंतरा (भाग-1) – कक्षा 11 ...

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जनकवि नागार्जुन रचित ‘बादलों को घिरते देखा है’ कविता का सार, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य

जनकवि नागार्जुन रचित ‘बादलों को घिरते देखा है’ कविता का सार, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य जनकवि और प्रगतिशील काव्यधारा के प्रमुख हस्ताक्षर नागार्जुन (वैद्यनाथ मिश्र ‘यात्री’) की पाठ्यपुस्तक अंतरा (भाग-1) में संकलित विख्यात कविता ‘बादलों को घिरते देखा है’ का संदर्भ, प्रसंग, प्रमुख काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवि: नागार्जुन मूल काव्य संग्रह: युगधारा (1953) पाठ्यपुस्तक: ...

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कवि पंडित नरेंद्र शर्मा रचित ‘नींद उचट जाती है’ कविता का सार, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य

कवि पंडित नरेंद्र शर्मा रचित ‘नींद उचट जाती है’ कविता का सार, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य उत्तर-छायावादी और गीत-काव्य परंपरा के प्रसिद्ध कवि पंडित नरेंद्र शर्मा की अंतरा (भाग-1) में संकलित विख्यात कविता ‘नींद उचट जाती है’ का संदर्भ, प्रसंग, प्रत्येक काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवि: नरेंद्र शर्मा मूल काव्य संग्रह: काममिनी पाठ्यपुस्तक: अंतरा (भाग-1) ...

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महादेवी वर्मा कविता व्याख्या: जाग तुझको दूर जाना और सब आँखों के आँसू उजले

महादेवी वर्मा कविता व्याख्या: जाग तुझको दूर जाना और सब आँखों के आँसू उजले छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक, ‘आधुनिक युग की मीरा’ महादेवी वर्मा द्वारा रचित प्रसिद्ध जागरण-गीत ‘जाग तुझको दूर जाना’ का संदर्भ, प्रसंग, प्रत्येक काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवयित्री: महादेवी वर्मा मूल काव्य संग्रह: सांध्यगीत (1936) पाठ्यपुस्तक: अंतरा (भाग-1) ...

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सुमित्रानंदन पंत कविता ‘संध्या के बाद’ सप्रसंग व्याख्या: भावार्थ एवं काव्य-सौंदर्य

सुमित्रानंदन पंत कविता ‘संध्या के बाद’ सप्रसंग व्याख्या: भावार्थ एवं काव्य-सौंदर्य छायावाद के प्रमुख स्तंभ और प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत के प्रगतिशील दौर की प्रतिनिधि कविता ‘संध्या के बाद’ का संदर्भ, प्रसंग, प्रमुख काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवि: सुमित्रानंदन पंत मूल काव्य संग्रह: ग्राम्या (1940) पाठ्यपुस्तक: अंतरा (भाग-1) – कक्षा 11 (ऐच्छिक) संदर्भ: ...

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पद्माकर ऋतु वर्णन व्याख्या: तीनों छंद (कवित्त) सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य

पद्माकर ऋतु वर्णन व्याख्या: तीनों छंद (कवित्त) सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य रीतिकाल के अंतिम प्रतिनिधि एवं मूर्धन्य कवि पद्माकर (पद्माकर भट्ट) के ‘ऋतु वर्णन’ के तीनों छंदों (कवित्त) का संदर्भ, प्रसंग, प्रत्येक पंक्ति की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवि: पद्माकर काल: रीतिकाल भाषा: परिष्कृत, सरस एवं नाद-सौंदर्ययुक्त ब्रजभाषा पाठ्यपुस्तक: अंतरा (भाग-1) – कक्षा 11 (ऐच्छिक) संदर्भ: प्रस्तुत ...

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आचार्य देव की कविताएँ व्याख्या: हँसी की चोट, सपना और दरबार | अंतरा भाग-1

आचार्य देव की कविताएँ व्याख्या: हँसी की चोट, सपना और दरबार | अंतरा भाग-1 रीतिकाल के रीतिबद्ध काव्यधारा के प्रमुख आचार्य कवि देव (देवदत्त) की पाठ्यपुस्तक अंतरा (भाग-1) में संकलित तीनों रचनाओं—‘हँसी की चोट’ (सवैया), ‘सपना’ (कवित्त) और ‘दरबार’ (सवैया)—का संदर्भ, प्रसंग, प्रत्येक पंक्ति की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवि: महाकवि देव (देवदत्त) काल: रीतिकाल (रीतिबद्ध धारा) ...

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कक्षा 11 हिंदी ऐच्छिक सूरदास के पद सप्रसंग व्याख्या | RPSC & Elective Hindi Notes

कक्षा 11 हिंदी ऐच्छिक सूरदास के पद सप्रसंग व्याख्या | RPSC & Elective Hindi Notes कक्षा 11 की पाठ्यपुस्तक अंतरा (भाग-1) में संकलित भक्तिकाल के महाकवि सूरदास के दोनों प्रसिद्ध पदों—‘खेलन में को काको गुसैयाँ’ और ‘मुरली तऊ गुपालहिं भावति’—का संदर्भ, प्रसंग, प्रत्येक पंक्ति की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पद 1: खेलन में को काको गुसैयाँ “खेलन में को काको ...

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कक्षा 11 हिंदी ऐच्छिक कबीर के पद सप्रसंग व्याख्या | RPSC & Elective Hindi Notes

कक्षा 11 हिंदी ऐच्छिक कबीर के पद सप्रसंग व्याख्या | RPSC & Elective Hindi Notes कक्षा 11 की पाठ्यपुस्तक अंतरा (भाग-1) में संकलित निर्गुण संत कवि कबीरदास के दोनों पदों—‘अरे इन दोहुन राह न पाई’ और ‘बालम, आवो हमारे गेह रे’—का संदर्भ, प्रसंग, प्रत्येक पंक्ति की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पद 1: अरे इन दोहुन राह न पाई “अरे इन ...

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कक्षा 11 हिंदी ऐच्छिक ‘अंतरा भाग-1’ पद्य खंड: सभी कविताओं का मूलभाव एवं उद्देश्य

कक्षा 11 हिंदी ऐच्छिक ‘अंतरा भाग-1’ पद्य खंड: सभी कविताओं का मूलभाव एवं उद्देश्य कक्षा 11 की ऐच्छिक हिंदी पाठ्यपुस्तक अंतरा (भाग-1) के पद्य खंड में संकलित सभी कवियों और उनकी कविताओं के मूलभाव एवं उद्देश्य: 1. कबीरदास कवि परिचय एवं पृष्ठभूमि: भक्तिकाल की निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि। भाषा: सधुक्कड़ी। (क) अरे इन दोहुन राह न पाई मूलभाव ...

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कक्षा 11 हिंदी ‘आरोह भाग-1’ पद्य खंड: सभी कविताओं का मूलभाव, सार एवं गहन उद्देश्य

कक्षा 11 हिंदी ‘आरोह भाग-1’ पद्य खंड: सभी कविताओं का मूलभाव, सार एवं गहन उद्देश्य कक्षा 11 की पाठ्यपुस्तक ‘आरोह (भाग-1)’ में संकलित सभी कविताओं के मूलभाव और उद्देश्य की विस्तृत एवं गहन विवेचना नीचे प्रस्तुत है: 1. मीराबाई के पद मूलभाव: इन पदों में कवयित्री मीराबाई की कृष्ण के प्रति अनन्य, अगाध और एकनिष्ठ भक्ति का प्रकटन हुआ है। ...

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कवयित्री निर्मला पुतुल रचित ‘आओ, मिलकर बचाएँ’ का सार, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य

कवयित्री निर्मला पुतुल रचित ‘आओ, मिलकर बचाएँ’ का सार, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य आदिवासी जीवन और संथाली लोक-संस्कृति की सशक्त कवयित्री निर्मला पुतुल की कविता ‘आओ, मिलकर बचाएँ’ (संथाली से हिंदी अनुवाद: अशोक सिंह) का संदर्भ, प्रसंग, प्रमुख काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवयित्री: निर्मला पुतुल (संथाली भाषा की प्रमुख कवयित्री) हिंदी अनुवादक: अशोक सिंह मूल ...

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कवि पाश रचित कविता ‘सबसे खतरनाक’ का सार, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य

कवि पाश रचित कविता ‘सबसे खतरनाक’ का सार, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य समकालीन पंजाबी एवं हिंदी साहित्य के क्रांतिकारी और प्रतिबद्ध कवि अवतार सिंह संधू ‘पाश’ की अत्यंत लोकप्रिय कविता ‘सबसे खतरनाक’ (हिंदी अनुवाद: चमन लाल) का संदर्भ, प्रसंग, प्रमुख काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवि: अवतार सिंह संधू ‘पाश’ (मूल पंजाबी कवि) हिंदी अनुवादक: डॉ. ...

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