महत्वपूर्ण तथ्य

विश्व और भारत सर्वप्रथम समाचार पत्र(world and india first newspaper)

🌺विश्व और भारत सर्वप्रथम समाचार पत्र🌺   ◆ मुद्रण यंत्र का आविष्कार सर्वप्रथम :- चीन में   ◆ पहला समाचार पत्र :- पैकिंग ( चीन मे, दैनिक पत्र, 1340 ई. में)   ◆ आधुनिक पत्रकारिता का जनक :- चीन   ◆ आधुनिक पत्रकारिता का आरंभ (क्रमशः) :- चीन – इटली- जर्मनी – हालैण्ड – फ्रांस – ब्रिटेन – भारत   ...

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हिन्दी भाषा का सर्वप्रथम समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ (hindi bhasha ka sarvapratham samachar patr udant martand)

🌺हिन्दी भाषा का सर्वप्रथम समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’🌺 * उदन्त मार्तण्ड’ का हिंदी में शाब्दिक अर्थ होता है- उगता सूरज। इस अखबार की शुरुआत कलकत्ता के बड़ा बाजार के पास 27,अमर तल्ला लेन, कोलूटोला में शुरू हुआ था। उस वक्त अंग्रेजी फारसी और बांग्ला भाषा में पहले से कई अखबार-मैगजीन निकलते थे लेकिन हिंदी में एक भी समाचार पत्र नहीं ...

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‘झीनी-झीनी बीनी चदरिया’ कबीरदास का पद और अब्दुल बिस्मिल्लाह का बहुचर्चित उपन्यास

🌺’झीनी-झीनी बीनी चदरिया’ कबीरदास का पद और अब्दुल बिस्मिल्लाह का बहुचर्चित उपन्यास🌺  झीनी-झीनी बीनी चदरिया, काहे कै ताना, काहै कै भरनी, कौन तार से बीनी चदरिया। इंगला पिंगला ताना भरनी, सुखमन तार से बीनी चदरिया॥ आठ कँवल दल चरखा डोलै, पाँच तत्त गुन तीनी चदरिया। साँई को सियत मास दस लागै, ठोक-ठोक कै बीनी चदरिया॥ सो चादर सुर नर मुनि ...

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हिंदी का सबसे उद्दण्ड:- कवि बेताल बंदीजन

🌺 मिश्र बंधुओं ने कवि बेताल बंदीजन को हिंदी का सबसे उद्दण्ड कवि क्यों कहा? 👉 बेताल बंदीजन बड़ी सबल कविता की है ऐसी उद्दंड कविता हिंदी में कोई भी नहीं कर सकता है। गोरेलाल (उपनाम लाल।कवि) के बराबर के उत्तम कविता में उद्दंडता लाने में कोई भी कवि समर्थ नहीं हुआ है। भूषण, हरिकेश, शेखर और लाल कवि यह ...

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मिश्रबन्धुओं ने केशवदास को हिंदी का मिल्टन कहा

🌺 मिश्रबन्धुओं ने केशवदास को हिंदी का मिल्टन क्यो कहा? 👉 क्योंकि मिल्टन और केशवदास दोनों में काफी समानता थी। केशवदास संस्कृत छोड़ कर हिन्दी काव्य करने में कुछ लज्जा – सी बोध करते थे , वैसे ही मिल्टन लैटिन त्याग कर अंग्रेजी में ग्रंथ रचना करने में न्यूनता आवश्यक समझते थे। इन दोनों की अवस्था भी प्रायः बराबर थी। ...

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अष्टछाप के कवियों की ट्रिक( ashtachhaap ke kaviyon ki trick)

🌺अष्टछाप के कवियों की ट्रिक🌺   ⭐ अष्टछाप की स्थापना 1565 में गोस्वामी विट्ठलनाथ द्वारा हुई थी।   🌺 Trick :-  वल्लभ की कुभसूर का परमानन्द प्राप्त करने के लिए कृष्ण की भक्ति मे लीन है। ◆ वल्लभाचार्य के शिष्यः- (1)कुंभनदास(उम्र मे सबसे बडे़) (2)सूरदास(प्रसिद्धि मे सबसे बडे़) (3)परमानन्द((सूरदास के बाद वात्सल्य के सबसे बडे़ कवि) (4) कृष्णदास (सर्वाधिक बुद्धिमान) ...

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रामानन्द के बारह शिष्यों नाम का ट्रिक(Ramanand ke baarah shishyon ke naam ka trick)

* रामानन्द के बारह शिष्यों के नाम का ट्रिक :- कब से दास पीपा लेकर धन्ना को बुलाने का अनंत प्रयत्न कर रहा है और उधर सुरसुरा एव सुरसरीपदमावती का नर का भाव देखकर सुख मिला है। 1. कबीर (कब) 2. सेन (से) 3. रैदास (दास) 4. पीपा (पीपा) 5. धन्ना (धन्ना) 6. अनंतानंद(अनंत)   7. सुरसुरानंद (सुरसुरा) 8. सुरसुरी ...

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पुरस्कार पाने वाली प्रथम महिलाएं(puraskar pane vali pratham mahilaen)

🌺 पुरस्कार पाने वाली प्रथम महिलाएं 🌺 1. *बुकर पुरस्कार जीतने वाली प्रथम महिला :- अरुंधति रॉय 2. *अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज जीतने वाली प्रथम महिला :- गीतांजलि श्री 3. पद्म विभूषण पुरस्कार (हिन्दी) पाने वाली प्रथम महिला :- अमृता प्रीतम (दिल्ली, 2004 में) 4. पद्म भूषण पुरस्कार (हिन्दी) पाने वाली प्रथम महिला :- महादेवी वर्मा (उत्तर प्रदेश, 1956ई.) 5. पद्मश्री ...

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वे रचनाऐं जिन पर फिल्में बनायी गई( ve rachanaye jin par film banayi gyi)

भारतेंदु युग में लिखी गई कई रचनाएं थीं, जिन पर फिल्में बनाई गई हैं और उनका बहुत अच्छा प्रदर्शन हुआ है। यहाँ कुछ ऐसी रचनाएँ हैं जिन पर फिल्में बनी हैं: “भारतेंदु हरिश्चंद्र”: यह फिल्म भारतेंदु हरिश्चंद्र के जीवन पर आधारित है, जो भारतीय साहित्य के इस काल के महान कवि थे। “सत्यवादी हरिश्चंद्र”: इस फिल्म में भारतेंदु हरिश्चंद्र की ...

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पंच बिड़ाल क्या है?[panch bidal kya hai ]

🌺पंच बिड़ाल क्या है?[What is Panch Bidal?] 🌺 बौद्ध शास्त्रों में निरूपित पंच प्रतिबंध(panch pratibandh) :- 1. आलस्य :- आलस्य का तात्पर्य – कार्यों, गतिविधियों या जिम्मेदारियों के प्रति प्रयास या ऊर्जा लगाने से बचने या विरोध करने की प्रवृत्ति से है। इसमें प्रेरणा की कमी, विलंब और उत्पादक कार्यों की तुलना में आलस्य या विश्राम को प्राथमिकता देना शामिल ...

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कविप्रिया रचना का परिचय[kavipriya rachana ka parichay]

कविप्रिया रचना का परिचय[kavipriya rachana ka parichay]

◆कविप्रिया रचना का परिचय◆ ◆ कविप्रिया नाम का मतलब एक नदी होता है। 💐 कविप्रिया (काव्य, 1601ई. ):- ★ रीतिकाल के प्रमुख आचार्य और कवि केशवदास की रचना ★ कविप्रिया के ग्रंथ पर लिखित पंक्ति:- सगुन पदारथ अर्थयुत, सुबरनमय सुभसाज । कंठमाल ज्यो कविप्रिया, कंठ करो कविराज ।। ★ इस ग्रंथ प्रारंभ में केशवदास ने पहले श्री गणेश-वन्दना और फिर सरस्वती की ...

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16वीं शताब्दी में केशव नाम के दो आचार्य हुये[16vi shatabdi me keshav nam ke do aachary huye]

16वीं शताब्दी में केशव नाम के दो आचार्य हुये

★ 16वीं शताब्दी में केशव नाम के दो आचार्य हुये ★ ★ आचार्य केशव मिश्र :- अलंकारशेखर नामक शास्त्रीय ग्रन्थ लिखा (संस्कृत में ग्रन्थ रचना की) ★ आचार्य केशवदास :- कविप्रिया एवं रसिक- प्रिया नामक काव्यशास्त्रीय ग्रन्थों की रचना की। (हिंदी में ग्रन्थ रचना की ) ● आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने केशव को भक्तिकाल के अंतर्गत रखा है, तथापि काव्य ...

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कठगुलाब[kathagulab] उपन्यास मृदुला गर्ग

कठगुलाब[kathagulab]

⭐⭐ कठगुलाब ⭐⭐ ◆ कठगुलाब का अर्थ :-एक प्रकार का जंगली गुलाब जिसके फूल छोटे-छोटे होते हैं ◆ कठगुलाब उपन्यास (1996ई.) :- मृदुला गर्ग ★ पात्र :– स्मिता, मारियान, नर्मदा, असीमा और विपिन  ★ यह उपन्यास समाज में व्याप्त नारी के शोषण, अन्याय तथा स्त्रियों के विभिन्न संघर्षो को प्रस्तुत करता है।   👉 पढ़ना जारी रखने के लिए यहाँ ...

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हिंदी साहित्य और सिनेमा के संबंध[hindi sahity aur sinema ke sambandh]

हिंदी साहित्य और सिनेमा के संबंध[hindi sahity aur sinema ke sambandh]

⭐हिंदी साहित्य और सिनेमा के संबंध ⭐   ◆ निर्देशक नानूभाई देसाई ने सेवासदन उपन्यास पर बाजारे हुस्न’ नाम से फिल्म का निर्माण किया। ◆ प्रेमचंद ने ‘अंजता सिनेटोन’ के लिए कहानी लिखी तथा उस पर ‘गरीब मजदूर’ ‘मिल मजदूर’, ‘सेठ की बेटी’ आदि नामों से फिल्म प्रदर्शित हुई। मिल मजदूर मोहन भावनानी के निर्देशन में बनी। ◆ 1941 में ...

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मंदाक्रांता शब्द के संबंध में [Mandakranta shabd ke sambandh mein]

मंदाक्रांता शब्द के संबंध में

💐 मंदाक्रांता 💐 ■ मंदाक्रांता शब्द का अर्थ :- धीरे – धीरे आगे बढ़ने वाला ◆ मंदाक्रांता :- नाटक ★ नाटक की नायिका :- श्यामली ★ इदन्नमम(1994) उपन्यास का नाट्य रूपांतरण नोट :- इदं न मम (काव्यसंग्रह) :- भवानी प्रसाद मिश्र ● उपन्यास की लेखिका :- मैत्रेयी पुष्पा ● उपन्यास का केन्द्रीय पात्र :- मंदाकिनी ◆ मंदाक्रांता छन्द ★ यह ...

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