देवनागरी लिपि के गुण एवं सीमाएँ देवनागरी लिपि विश्व की सबसे वैज्ञानिक, व्यवस्थित और परिमार्जित लिपियों में मानी जाती है। हालाँकि, प्रत्येक लिपि की तरह इसमें जहाँ अनेक अद्भुत गुण हैं, वहीं आधुनिक युग (विशेषकर टाइपिंग, डिजिटल प्रिंटिंग और त्वरित लेखन) की दृष्टि से इसकी कुछ व्यावहारिक सीमाएँ भी हैं। देवनागरी लिपि के प्रमुख गुण (Advantages) 1. पूर्णतः वैज्ञानिक और ...
Read More »हिन्दी भाषा एवं बोलिया
मानक देवनागरी लिपि और हिंदी वर्तनी के प्रमुख नियम(manak devnagri lipi aur hindi vartani ke pramukh niyam)
मानक देवनागरी लिपि और हिंदी वर्तनी के प्रमुख नियम केंद्रीय हिंदी निदेशालय (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) ने देवनागरी लिपि और वर्तनी में एकरूपता, स्पष्टता और वैज्ञानिकता लाने के लिए मानक हिंदी वर्तनी के विस्तृत नियम निश्चित किए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य मुद्रण (Printing), कंप्यूटर टाइपिंग, प्रकाशन और पठन-पाठन में होने वाले भ्रम को दूर करना है। 1. संयुक्त ...
Read More »देवनागरी लिपि अर्थ विकास उपनाम प्रयोग एवं विशेषताएँ
देवनागरी लिपि: अर्थ, विकास, उपनाम, प्रयोग एवं विशेषताएँ देवनागरी लिपि भारत की सबसे प्रमुख और वैज्ञानिक लिपि है। यह न केवल हिंदी, बल्कि संस्कृत, मराठी, नेपाली, मैथिली, कोंकणी जैसी कई प्रमुख भाषाओं को लिखने का माध्यम है। 1. देवनागरी लिपि का अर्थ ‘देव + नागरी’ : दो शब्दों के मेल से बना है – ‘देव’ + ‘नागरी’। नगर / नागर ...
Read More »पश्चिमी हिंदी की बोलियाँ (pashchimi hindi ki boliyan)
पश्चिमी हिंदी की बोलियाँ (शौरसेनी अपभ्रंश से विकसित) पश्चिमी हिंदी (शौरसेनी अपभ्रंश से विकसित) के अंतर्गत मुख्य रूप से 5 बोलियाँ (या उपभाषाएँ) आती हैं। इन्हें याद रखने और समझने की सुविधा के लिए दो वर्गों में बाँटा जाता है: 1. आकार-बहुल बोलियाँ (जिनमें ‘आ’ की ध्वनि अधिक होती है) खड़ी बोली (कौरवी) : यह आधुनिक मानक हिंदी, उर्दू और ...
Read More »पूर्वी हिंदी की बोलियाँ(purvi hindi ki boliyan)
पूर्वी हिंदी की बोलियाँ पूर्वी हिंदी का विकास अर्धमागधी अपभ्रंश से हुआ है। यह मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के पूर्वी भागों में बोली जाती है। पूर्वी हिंदी के अंतर्गत तीन मुख्य बोलियाँ आती हैं, जिन्हें याद रखने के लिए एक सरल सूत्र ABC (A – अवधी, B – बघेली, C – छत्तीसगढ़ी) का प्रयोग किया ...
Read More »भारोपीय और द्रविड़ भाषा-परिवार की तुलना(bharopiy aur dravid bhasha-parivar ki tulna)
भारोपीय और द्रविड़ भाषा-परिवार की तुलना 1. भारोपीय (Indo-European) भाषा-परिवार विस्तार व महत्त्व : यह संसार का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण भाषा-परिवार है। विश्व की लगभग 45% से अधिक जनसंख्या इस परिवार की भाषाएँ बोलती है। प्रमुख शाखाएँ : इसे दो मुख्य वर्ग (सतम और केन्तुम) तथा कई शाखाओं में बाँटा गया है: भारतीय-आर्य (Indo-Aryan) : संस्कृत, पालि, प्राकृत, हिंदी, ...
Read More »भारतीय-आर्य भाषाओं का इतिहास(bhartiy-arya bhashaon ka itihaas)
भारतीय-आर्य भाषाओं का इतिहास भारतीय-आर्य भाषाओं का इतिहास लगभग 3500 से अधिक वर्षों में फैला हुआ है। भाषाविदों (विशेषकर डॉ. धीरेन्द्र वर्मा, डॉ. भोलनाथ तिवारी और डॉ. सुनीति कुमार चटर्जी) ने इसके विकासक्रम को मुख्य रूप से तीन ऐतिहासिक चरणों में विभाजित किया है: 1. प्राचीन भारतीय-आर्य भाषा काल (1500 ई.पू. से 500 ई.पू.) इस काल की मुख्य भाषा संस्कृत ...
Read More »मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषाएं( madhyakalin bharatiy aary bhashaen)
💐मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषाएं 💐 【500 ई.पू. से 1000 ई.तक】 1. पालि ( प्रथम प्राकृत)【500 ई.पू. से 1 ई.तक】 2.प्राकृत (द्वितीय प्राकृत)【1ई.से 500 ई.तक】 3.अपभ्रंश(तृतीय प्राकृत) 【500 ई.से 1000 ई.तक】 💐1. पालि ( प्रथम प्राकृत)💐 【500 ई.पू. से 1 ई.तक】 • पालि का अर्थ बुद्ध वचन होने से यह शब्द केवल मूल त्रिपिटक ग्रंथों के लिए प्रयुक्त हुआ। • पालि ...
Read More »प्राचीन भारतीय आर्य भाषाएं(purachin aary bharatiy bhashaen)
💐 प्राचीन भारतीय आर्य भाषाएं 💐 【1500 ई.पू. से 500 ई.पू. तक】 1. वैदिक संस्कृत 【1500 ई.पू. से 1000ई.पू. तक】 2. लौकिक संस्कृत 【1000 ई.पू. से 500 ई.पू. तक】 1. वैदिक संस्कृत 【1500 ई.पू. से 1000ई.पू. तक】 • वैदिक साहित्य का सर्जन वैदिक संस्कृत में हुआ है। • वैदिक संस्कृत को वैदिक, वैदिकी, छन्दस्, छान्दस् आदि भी कहा जाता है। ...
Read More »हिन्दी भाषा के संबंध में विद्वानों के कथन(hindi bhasha ke sambandh me vidvano ke kathan)
• अंग्रेजी सीखकर जिन्होंने विशिष्टता प्राप्त की है, सर्वसाधारण के साथ उनके मत का मेल नहीं होता। हमारे देश में सबसे बढ़कर जातिभेद वही है, श्रेणियों में परस्पर अस्पृश्यता इसी का नाम है।” रवीन्द्रनाथ ठाकुर • “भारतवर्ष में सभी विद्याएं सम्मिलित परिवार के समान पारस्परिक सद्भाव लेकर रहती आई हैं।” ...
Read More »