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अक्षर अनन्य का परिचय(akshar anany ka parichay)

🌺अक्षर अनन्य का परिचय 🌺 ★ संवत् 1710 में इनके वर्तमान रहने का पता लगता है। ★ ये दतिया रियासत के अंतर्गत सेनुहरा के कायस्थ थे और कुछ दिनों तक दतिया के राजा पृथ्वीचंद के दीवान थे। पीछे ये विरक्त होकर पन्ना में रहने लगे।   ★प्रसिद्ध छत्रसाल इनके शिष्य हुए। एक बार ये छत्रसाल से किसी बात पर अप्रसन्न ...

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