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त्यागपत्र उपन्यास का सारांश और उद्देश्य(tyagapatr upanyas ka saransh aur uddeshy)

◆ जैनेंद्र का तीसरा उपन्यास ◆ प्रकाशन वर्ष:- 1937 ई. ◆ मुंबई से निकलने वाली हिंदी ग्रंथ रत्नाकर के लिए उसके संपादक प्रेमीजी के अनुरोध पर लिखा गया था । ◆ 1965 में अभिनंदन समारोह में त्यागपत्र का नाट्य रूपांतर का मंचन भी हुआ था। ◆ आत्मकथात्मक शैली में लिखा हुआ बहुत ही मार्मिक और संवेदनशील उपन्यास। ◆ त्यागपत्र उपन्यास ...

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