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Tag Archives: दिवस का अवसान समीप था। गगन था कुछ लोहित हो चला। तरु – शिखा पर थी अब राजती । कमलिनी – कुल वल्लभ की प्रभा

प्रियप्रवास(priyapravas)

• रचयिता :- अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध • महाकाव्य • हिंदी खड़ी बोली में लिखा गया हिंदी का प्रथम महाकाव्य • शैली :- भिन्न तुकांत शैली में • भाषा :- संस्कृत निष्ठ हिंदी • पहले इस महाकाव्य का नाम :- बृजांगना विलाप • लिखना प्रारंभ :- 15 अक्टूबर 1999 को • लिखना समाप्त :- 24 फरवरी 1913 को • प्रकाशन ...

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