Tag Archives: नाथ साहित्य

नाथ साहित्य या नाथ संप्रदाय(nath sahity ya nath sampraday)

• नाथ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अर्थवेद तथा तैतिरीय ब्राह्मण में मिलता है। • अर्थवेद तथा तैतिरीय ब्राह्मण में नाथ का अर्थ शरणदाता है। • नाथ शब्द का अर्थ(आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के द्वारा ) ‘ना’का अर्थ -अनादि रूप ‘थ’का अर्थ– स्थापित होना • नाथ पंथ के चरमोत्कर्ष का समय – 12वीं शताब्दी से 14वीं शताब्दी के अंत तक ( ...

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नाथ साहित्य की प्रवृत्तियां(Nath Sahitya ki pravartiya)

नाथ साहित्य की प्रवृतियां

नाथ साहित्य की प्रवृत्तियां(Nath Sahitya ki pravartiya) 1. हठयोग की साधना (काया साधना )पर बल । 2. साधनात्मक स्तर पर शून्यवाद की प्रतिष्ठा। 3. दर्शन के क्षेत्र में शैवमत का प्रतिपादन ।(साधनात्मक रहस्यवाद ) 4. प्रवृत्तिमूलक मार्ग के स्थान पर निवृत्ति मूलक मार्ग अपनाने पर बल। 5. वर्णाश्रम व्यवस्था पर तीखा प्रहार । 6. नारी को साधना के क्षेत्र से ...

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