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प्रगतिवादी काव्य की प्रवृत्तियां( pragativadi kavy ki pravatiya)

जो काव्य मार्क्सवाद दर्शन को सामाजिक चेतना और भाव बोध को अपना लक्ष्य बनाकर चला उसे प्रगतिवाद कहा गया है। प्रगतिवादी के अंतर्गत -: यथार्थवाद ,पदार्थवाद एवं समाजवाद शामिल है । 1. सामाजिक व्यवस्था के प्रति असंतोष । 2. सामाजिक यथार्थ का चित्रण। 3. साम्यवादी व्यवस्था का यशोगान। 4. विश्व – बंधुत्व का भाव। 5. साम्राज्यवाद, सामंतवाद एवं पूंजीवादी व्यवस्था ...

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