Tag Archives: हिन्दी के कवियों की पंक्तियां

UGC NET EXAM में आयी हुई हिन्दी के कवियों की पंक्तियां – 3

201. पुस्तक जल्हण हाथ दे चेलि गज्जन नृपकाज – चन्दबरदाई (पृथ्वीराज रासो) 202. हो जाने दे गर्क नशे से,मत पड़ने दो फर्क नशे में। बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ 203. यौवन की इस मधुशाला में प्यासों का ही स्थान प्रिये। – भगवती चरण वर्मा(तुम अपनी हो, जग अपना है रचना से) 204. सावधान, मनुष्य! यदि विज्ञान है तलवार, तो इसे फेंक, तज ...

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UGC NET EXAM में आयी हुई हिन्दी के कवियों की पंक्तियां – 2

101. ढलमल – ढलमल चंचल अंतल झलमल झलमल तार जाल मलमल तारा – मैथलीशरण गुप्त (नदिया की धारा का वर्णन, साकेत से) 102. बहु बीती थोरी रही खोऊ बीती जाय । – ध्रुवदास   103. जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नहिं – कबीर दास 104. राम को रूप निहारत जानकी, कंकन के नग की परछाही ...

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UGC NET EXAM में आयी हुई हिन्दी के कवियों की पंक्तियां – 1

  1. डूबत भारत नाथ बेगि जागो अब जागो। – भारतेंदु( प्रबोधिनी कविता से) 2. कहाँ करुणानिधि केशव सोये – भारतेंदु 3. हम भारत भारतवासिन पै अब दीनदयाल दया करिए। – प्रताप नारायण मिश्र 4. अपने या प्यारे भारत के पुनीत दुख दारिदे हरिए। – राधाकृष्ण दास (विनीत कविता से) 5. आजु लौ न मिले तो कहां हम तो तुमहे ...

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