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विश्वम्भरनाथ उपाध्याय के उपन्यास(Vishwambharnath Upadhyay ka upanyas)

🌺विश्वम्भरनाथ उपाध्याय के उपन्यास 🌺   ● रीछ (1967 ई .) 【प्रथम उपन्यास】   ● पक्षधर ( 1971 ई.)【इसकी कथावस्तु गुरिल्ला युद्ध पर आधारित है।】   ● जाग मच्छन्दर गोरख आया (फैंतेसी शैली में)   ● दूसरा भूतनाथ(1985 ई.)   ● जोगी मत जा(1987 ई.)【 राजा भर्तृहरि का चित्रण)】- मीरा पुरस्कार और प्रेमचंद पुरस्कार से सम्मानित उपन्यास   ● विक्षुब्ध ...

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विश्वम्भरनाथ उपाध्याय की कृतियाँ(Vishwambharnath Upadhyay ki krtiyan)

🌺विश्वम्भरनाथ उपाध्याय की कृतियाँ 🌺   ◆ उपन्यास:-   ● रीछ (1967 ई .) 【प्रथम उपन्यास】   ● पक्षधर ( 1971 ई.) 【इसकी कथावस्तु गुरिल्ला युद्ध पर आधारित है।】   ● जाग मच्छन्दर गोरख आया (फैंतेसी शैली में)   ● दूसरा भूतनाथ(1985 ई.)   ● जोगी मत जा(1987 ई.)【 राजा भर्तृहरि का चित्रण)】- मीरा पुरस्कार और प्रेमचंद पुरस्कार से सम्मानित ...

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कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जीवन परिचय (Kanhaiyalal Mishra ‘Prabhakar’ ka jeevan parichay )

🌺कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जीवन परिचय 🌺   ◆ जन्म :-29 मई, 1906ई. देवबन्द,सहारनपुर(UP)   ◆ मृत्यु:– 9 मई 1995ई.   ◆ पिता का नाम :- पं. रमादत्त मिश्र   ◆ माता का नाम :- मिश्रीदेवी   ◆ पत्नी का नाम:- रामकली देवी ( विवाह -1924ई.)   ◆ प्रमुख निबंध संग्रह :- ● बाजे पायलिया के घुँघरू ● जिंदगी मुसकुराय ...

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मलूकदास का व्यक्त्तित्व और कृतित्व कबीरदास जैसा (Malukdas ka vyakttitv aur krtitv Kabirdas jaisa)

🌺मलूकदास का व्यक्त्तित्व और कृतित्व कबीरदास जैसा 🌺   🌺 मलूकदास 🌺   ● मलूकदास ज्ञानमार्गी सन्त थे   ● निर्गुण शाखा के पोषक थे।   ● उनका व्यक्त्तित्व और कृतित्व(ज्ञानबोध ग्रन्थ )कबीरदास जैसा था।   ● कबीरदास और मलूकदास के इन दोहे से पता चल सकता है :-   ◆ कबीर दास का दोहा :- पाहन पूजे हरि मिलें, ...

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रामचरितमानस और कवितावली में कलियुग की मूल समस्या(Ramcharitmanas and Kavitavali ein kaliyug ki mool samasya)

🌺रामचरितमानस और कवितावली में कलियुग की मूल समस्या🌺   🌺कलियुग तुलसी दास के समय का यथार्थ है। 🌺रामचरितमानस में कलियुग की मूल समस्या :- ● लोग वर्णाश्रम धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं। ● परिवार की मर्यादाएँ बिखरती जा रही हैं। ● राजा प्रजा से निरपेक्ष होकर भोग में लीन है। 💐 कवितावली में कलियुग की मूल समस्या :-आर्थिक ...

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भारतेन्दु हरिश्चंद्र की पत्रिका(Bhartendu Harishchandra ki patrika)

🌺भारतेन्दु हरिश्चंद्र की पत्रिका🌺 (1) कविवचन सुधा- 1868 ई. (मासिक, पाक्षिक तथा बाद में साप्ताहिक)   (2) हरिश्चन्द्र चन्द्रिका – 1873 ई. (मासिक, पूर्व के आठ अंकों का प्रकाशन हरिश्चन्द्र मैगजीन नाम से)   (3) बाला बोधिनी- 1874 ई. (स्त्री शिक्षा से संबंधित मासिक पत्रिका) 👉 पढ़ना जारी रखने के लिए यहाँ क्लिक करे। 👉 Pdf नोट्स लेने के लिए ...

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भारतेंदु हरिश्चन्द्र के अनुदित नाटक (Bhartendu Harishchandra ke anudit natak )

🌺भारतेंदु हरिश्चन्द्र के अनुदित नाटक 🌺 (1) विद्या सुंदर (1868 ई.)- यतीन्द्रमोहन के बंगला नाटक का अनुवाद   (2) पाखंड विडंबन (1872 ई.)- कृष्ण मिश्र के ‘प्रबोधचन्द्रोदय’ के तृतीय अंक का अनुवाद   (3) धनजंय विजय ( 1873 ई.)- कांचन कवि के नाटक का अनुवाद   (4) कर्पूर मंजरी (1875 ई.)- राजशेखर कवि के प्राकृत भाषा की रचना का अनुवाद ...

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राउरवेलि(राउलवेल) का परिचय(Raurveli ka parichay)

🌺राउरवेलि(राउलवेल) का परिचय 🌺   * रचनाकाल – 10वीं शताब्दी( डॉ. नगेन्द्र के अनुसार)   * राउलवेल का अर्थ – राजकुल विलास(इसलिए शिलालेख के व्यक्ति राजकुल के प्रतीत होते है।)   *विषय:- सामन्त की नायिकाओं का नखशिख वर्णन।(सात नायिकाओं का)   * रचनाकार – रोड़ा   * हिन्दी का प्रथम चम्पू काव्य(गद्य-पद्य मिश्रण)   * शिलांकित(शिला या चट्टानो पर लिखा ...

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मत्स्येन्द्रनाथ का परिचय( Matsyendranath ka parichay)

🌺 मत्स्येन्द्रनाथ का परिचय 🌺 • गोरखनाथ के गुरु। • अवलोकितेश्वर के अवतार (नेपाली अनुश्रुति के अनुसार)। • नाथ परंपरा के आदिगुरु • कौलाचार के सिद्ध पुरुष • कौल मार्ग के प्रथम प्रर्वतक (कौलज्ञान निर्णय के अनुसार ) • सकल कुल शास्त्र के अवतार (तंत्रालोक की टीका के अनुसार) • योगी संप्रदाय में मछंदर नाथ नाम प्रसिद्ध। • परवर्ती संस्कृत ...

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शून्यवाद प्रवर्तक आचार्य नागार्जुन का परिचय(shoonyavad pravartak aachary Nagarjuna ka parichay)

🌺आचार्य नागार्जुन का परिचय 🌺 * शून्यवाद सबसे प्रबल प्रवर्तक आचार्य नागार्जुन(दूसरी शताब्दी तथा तीसरी शताब्दी के मध्य) * नागार्जुन का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ – माध्यामिक शास्त्र * नागार्जुन ने उत्पत्ति,गति, दुख,बंधन, मोक्ष आदि सभी धारणाओं की तर्क सहित परिक्षा कर यह सिद्ध किया है कि सभी में विरोध धर्मो की उपस्थिति है अतः सभी शून्य है। * माध्यमिक पथ ...

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साहित्य का देवता,साहित्य देवता,समय देवता[saahity ka devata,saahity devata,samay devata]

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🌺साहित्य का देवता :- दुलारे लाल भार्गव (निराला के अनुसार) ◆ निराला दुलारे लाल भार्गव के व्यक्तित्व से इतने अभिभूत थे कि उन्हें ‘साहित्य का देवता’ कहा करते थे। ★ दुलारे लाल भार्गव निराला के मुक्त छंदों के समर्थक या प्रशंसक नहीं थे। 🌺 साहित्य देवता :- माखनलाल चतुर्वेदी (डॉ.रामकुमार वर्मा के अनुसार) ◆ डॉ.रामकुमार वर्मा ने कहा:- “पंडित जी, ...

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