काव्य शास्त्र

अलंकार सम्प्रदाय (अलंकारवाद) नोट्स(alankar sampraday (alnkarvad) notes)

अलंकार सम्प्रदाय (अलंकारवाद) ☆ अलंकार सम्प्रदाय के प्रवर्तक आचार्य भामह माने जाते हैं। ☆ उन्होंने छठी शताब्दी में अपने प्रसिद्ध ग्रंथ “काव्यालंकार” की रचना की थी। ☆ आचार्य भामह ने ही सबसे पहले अलंकार को काव्य की आत्मा के रूप में प्रतिष्ठित किया था। 1. अलंकार शब्द का अर्थ ‘अलंकार’ शब्द दो शब्दों के मेल से बना है: अलं + ...

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 शब्द शक्ति काव्यशास्त्र(shabd shakti kavyashastra)

 शब्द शक्ति (काव्यशास्त्र) परिभाषा: शब्द में अंतर्निहित अर्थ को प्रकट करने वाले व्यापार (कार्य) अथवा शब्द का निश्चयार्थक बोध कराने वाली शक्ति को शब्द शक्ति कहते हैं। ऐतिहासिक संदर्भ: शब्द शक्ति के लिए ‘शक्ति’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम आचार्य विश्वनाथ ने किया। शब्द शक्ति के लिए ‘वृत्ति’ या ‘व्यापार’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम आचार्य मम्मट ने किया। 1. सार्थक शब्दों ...

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अलंकारों के मुख्य भेद(alankaron ke mukhya bhed)

अलंकारों के मुख्य भेद हिंदी साहित्य में अलंकारों के मुख्य रूप से तीन भेद होते हैं: शब्दालंकार अर्थालंकार उभयालंकार 1. शब्दालंकार के अंतर्गत आने वाले अलंकार: अनुप्रास अलंकार यमक अलंकार श्लेष अलंकार वक्रोक्ति अलंकार 2. अर्थालंकार के अंतर्गत आने वाले अलंकार: अतिशयोक्ति अलंकार भ्रांतिमान अलंकार संदेह अलंकार विभावना अलंकार विरोधाभास अलंकार याद रखने की ट्रिक (अर्थालंकार के लिए):“बढ़ा-चढ़ाकर (अतिशयोक्ति), भ्रम ...

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शब्द शक्ति को समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न(shabd shakti ko samajhane ke lie kuchh mahatvapoorn prashn)

शब्द शक्ति को समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न “निरखि सेज रंग भरी लगी उसासै लेन। कछु न चौन चित में रह्यों चढत चाँदनी रैन।” इस पद में आर्थी व्यंजना कैसे हुई समझाये। सामान्य अर्थ:– कवि कहता है कि नायिका अपनी रंग-बिरंगी सेज (शय्या) को देखकर गहरी साँसें (उसास) लेने लगती है। उसके चित्त में कोई शांति (चौन) नहीं रहती, ...

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छंदों का परिचय(chhandon ka parichay)

                      🌺 छंदों का परिचय(chhandon ka parichay) 🌺 ◆ छंद के परिभाषा :- अक्षरों की संख्या एवं क्रम ,मात्रा गणना तथा यति -गति के सम्बद्ध विशिष्ट नियमों से नियोजित पदरचना ‘छंद’ कहलाती है ! ◆ छंद के अंग :- 1 . चरण :- छंद में प्राय: चार चरण होते हैं ...

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भारत भूषण का जीवन परिचय(Bharat Bhushan ka jeevan parichay)

🌺भारत भूषण का जीवन परिचय🌺   ◆ जन्म :- 8 जुलाई 1929 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में   ◆ मृत्यु :- 17 दिसंबर 2011   ◆ इनका पहला गीत संग्रह :- ‘सागर के समीप'(1958)   ◆ दुसरा गीत संग्रह:- ‘ये असंगति'(1993 में )   ◆तीसरा गीत संग्रह:- मेरे ‘चुनिंदा गीत’ (2008 में ) हुए।   ◆ प्रमुख गीत :- ...

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भारतेन्दु हरिश्चंद्र की पत्रिका(Bhartendu Harishchandra ki patrika)

🌺भारतेन्दु हरिश्चंद्र की पत्रिका🌺 (1) कविवचन सुधा- 1868 ई. (मासिक, पाक्षिक तथा बाद में साप्ताहिक)   (2) हरिश्चन्द्र चन्द्रिका – 1873 ई. (मासिक, पूर्व के आठ अंकों का प्रकाशन हरिश्चन्द्र मैगजीन नाम से)   (3) बाला बोधिनी- 1874 ई. (स्त्री शिक्षा से संबंधित मासिक पत्रिका) 👉 पढ़ना जारी रखने के लिए यहाँ क्लिक करे। 👉 Pdf नोट्स लेने के लिए ...

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प्रतीक/प्रतीकवाद(prateek/prateekavad)

           💐💐 प्रतीक/ प्रतीकवादी 💐💐 ◆ प्रतीक  शब्द का अर्थ :- ★  प्रतीक का शाब्दिक अर्थ है– अवयव, अंग, पताका, चिन्ह, निशान। ★  प्रतीक का अर्थ है प्रतिष्ठान अथवा एक वस्तु के लिए किसी अन्य वस्तु की स्थापना । ★ प्रतीक शब्द से अभिप्राय अंग्रेजी के सिम्बल (SYMBOL) शब्द से लिया जाता है। ★ Symbol (सीम्बोल) शब्द  ग्रीक भाषा के ...

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बिम्ब/ बिम्बवाद(bimb/bimbavad)

               💐💐 बिम्ब 💐💐 ◆ बिम्ब का अर्थ  :- ★ ‘बिम्ब’ शब्द अँग्रेजी के इमेज़ (Image) शब्द के पर्याय के रूप में ग्रहण किया जाता है। ★ संस्कृत में बिम्ब शब्द का अर्थ :- प्रतिच्छवि, प्रतिच्छाया, प्रतिबिम्बित ★ “जिस प्रकार अंग्रेजी के अनेक पारिभाषिक शब्दों के लिए उन्होंने हिन्दी में नए पारिभाषिक शब्द गढ़े थे, उसी प्रकार ”इमेज’ के लिए ...

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रस निष्पत्ति(Ras Nishpatti )

Trick :- ★ लल्लोट की उत्पत्ति मीमांसा दर्शन से हुई। भट्ट लल्लोट   उत्पत्तिवाद ★  शंकुक की अनुमति के बाद न्याय हुआ। अनुमितिवाद    नैयायिक दर्शन ★ नायक भुक्ति ने सांख्य दर्शन व्याख्या की। भट्टनायक भुक्तिवाद ★  अभिनवगुप्त ने अपनी अभिव्यक्ति में शैव दर्शन के बारे में बताया। अभिव्यक्तिवाद रस निष्पत्ति  :- काव्य लक्षण  काव्य हेतु रस का स्वरूप आचार्य ...

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वयण सगाई या वैण सगाई अलंकार 【vayan sagaee ya vainen sagaee alankaar】

• वयण सगाई या वैण सगाई इसे वरण सगाई या वरण संबंध भी कहते हैं। • वयण का अर्थ :- वर्ण या अक्षर • सगाई का अर्थ :- संबंध • वयण सगाई का अर्थ है :- वर्णों का संबंध • किसी छंद के प्रत्येक चरण में पहला अक्षर के संबंध के नियम को सही तरह से निभाना ही वयण सगाई ...

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रस का स्वरूप(ras ka svarup)

• रस अखंड है। • रस स्वप्रकाशानंद है। • रस चिन्मय है। • रस सचेतन अथवा प्राणवान् आनंद है। • रस अपने आकर से अभिन्न है। • रस वेद्यान्तर स्पर्शशून्य है • रस (काव्यास्वाद) को ब्रह्मास्वाद न कहकर उसका सहोदर कहा जाता है। • रस लोकोत्तर चमत्कार का प्राण है। • रस अपने आकार से अभिन्न रूप से आस्वादित किया ...

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काव्य हेतु(kavy hetu)

◆ हेतु का शाब्दिक अर्थ :- कारण ◆ काव्य हेतु का अर्थ :- जिनके के कारण काव्य का सृजन होता है। ◆ काव्य हेतु की परिभाषा :- काव्य रचना का सामर्थ्य उत्पन्न कर देने वाले कारण ही काव्य हेतु कहलाते है। ◆ काव्य हेतु के भेद :- 3 1. प्रतिभा 2. व्युत्पत्ति 3. अभ्यास ■ प्रतिभा,व्युत्पत्ति और अभ्यास मानने वाले ...

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भारतीय काव्यशास्त्र आर्चाय का क्रम(जन्म के अनुसार),bharatiy kavyashastree archee ka kram(janm ke anusaar)

◆आचार्य का शताब्दी वर्ष 【सम संख्या में 】   ◆ आचार्य का शताब्दी वर्ष 【 विषम संख्या में 】 ◆ शॉर्ट ट्रिक्सः- • भरतमुनि के भाग का दंड वामन को मिला। भरतमुनि (2वीं), भा – भामह (6वीं), दंड – दण्डी (7 वीं) वामन (8वीं)   • राज्य का आनंद शंका और रौद्र से नहीं अनुभव या उद्भव से होता है। 【9वीं】 ...

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काव्य के लक्षण( kavy ke lakshan)

★ काव्य लक्षण याद रखने के लिए सम्पूर्ण परिभाषा रटने की जरुरत नहीं है केवल परिभाषा में प्रमुख बिंदु को ही याद रखना है जो इस प्रकार :- ◆ भारतीय आचार्य के द्वारा:- 1. शब्दार्थ :- • शब्दार्थो सहितौ – भामह • शब्दार्थशरीरं – आनन्दवर्द्धन • शब्दार्थवनलंकृती – जयदेव • सब्द जीव तिहि – देव ★ विस्तार से :- 1. ...

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