🌺प्रमुख दलित रचनाकार 🌺 1. ओम प्रकाश वाल्मीकि:- ● जन्म:- 30 जून, 1950 ई. ,बरला मुजफ्फर नगर ● मृत्यु :- 7 नवंबर 2013 ई. ,देहरादून ● रचनाएँ:- ★ काव्य संग्रह:- √ सदियों का संताप (1989 ई.) √ बस बहुत हो चूका वाल्मीकि (1997 ई.) √ अब और नहीं (2009 ई.) ★ कहानी संग्रह: √ सलाम (2000 ई.) ...
Read More »रचनाये एवं प्रकाशन वर्ष
विद्यापति की पदावली का परिचय(Vidyapati ki padavali ka parichay)
🌺विद्यापति की पदावली का परिचय🌺 • मैथिली भाषा:- विद्यापति की पदावली • नायक :- कृष्ण • नायिका :-राधा • काव्य रूप :- गेह मुक्तक • वयःसन्धि की नायिका :- राधा • प्रमुख रस :- श्रृंगार रस • इस कृति की रचना के लिए विद्यापति ने जयदेव के गीत – गोविंद का अपना आदर्श स्वीकार किया है। • पदावली ...
Read More »कीर्ति पताका का परिचय(Kirti Pataka ka parichay)
🌺कीर्ति पताका का परिचय🌺 * महाराजा शिव सिंह के समय आ हुई । * विषय :- राजा शिव सिंह की कीर्ति और यश का वर्णन। * ग्रंन्थ का आरंभ:- गणेश जी की स्तुति से। * हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार – “इस कृति में कई प्रकार के की भाषाएं हैं।गद्य में संस्कृत पदावली की अधिकता है। बीच-बीच में मैथिली की ...
Read More »कीर्ति लता का परिचय (Kirti Lata ka parichay)
🌺कीर्ति लता का परिचय🌺 * कीर्तिलता को कहाणी भी कहते है। * विद्यापति की प्रथम रचना * रचनाकाल गणेश्वर की मृत्यु के बाद का है ,1380 (बाबूराम सक्सेना के अनुसार) * कीर्ति लता की रचना के समय विद्यापति की आयु 20 वर्ष की थी * इसमें विद्यापति ने स्वयं को ‘खेलन कवि’ कहा है। खेलन का अभिप्रायः ...
Read More »राउरवेलि(राउलवेल) का परिचय(Raurveli ka parichay)
🌺राउरवेलि(राउलवेल) का परिचय 🌺 * रचनाकाल – 10वीं शताब्दी( डॉ. नगेन्द्र के अनुसार) * राउलवेल का अर्थ – राजकुल विलास(इसलिए शिलालेख के व्यक्ति राजकुल के प्रतीत होते है।) *विषय:- सामन्त की नायिकाओं का नखशिख वर्णन।(सात नायिकाओं का) * रचनाकार – रोड़ा * हिन्दी का प्रथम चम्पू काव्य(गद्य-पद्य मिश्रण) * शिलांकित(शिला या चट्टानो पर लिखा ...
Read More »प्रमुख आचार्यों और अलंकारों की संख्या(pramukh aachaaryon aur Acharyas and Alankars)
🌺प्रमुख आचार्यों और अलंकारों की संख्या 🌺 क्र.सं. आचार्यों के नाम आचार्यों के ग्रन्थ अलंकारों की संख्या 1. भरतमुनि नाट्यशास्त्र 4 2. अग्नि पुराण अग्नि पुराण 14 3. वामन काव्यालंकार सूत्रवृत्ति 31 4. दंडी काव्यादर्श 35 5. भामह काव्यालंकार 38 6. उद्भट काव्यालंकार सार- संग्रह 41 7. रुद्रट काव्यालंकार ...
Read More »बंसतविलास का परिचय(Basantvilas ka parichay )
🌺बंसतविलास का परिचय 🌺 * रचनाकार – अज्ञात(इसके रचयिता का पता नही चल सका है।) * प्रथम सम्पादक – केशवलाल हर्षादराय ध्रुव * प्रमुख रस – श्रृंगार रस * छन्द – 84 छन्द * इसमे प्रकृति और नारी पर बसन्त के मादक प्रभाव का चित्रण * जैनेतर फागु काव्य * गुजराती विद्वान केशव हर्षद ध्रुव ने सबसे पहलेवसंतविलास की एक सचित्र पांडुलिपि ...
Read More »रिट्ठणेमि चरिउ (हरिवंश पुराण) का परिचय[Rittanemi Chariyu (Harivansh Purana) ka parichay]
🌺रिट्ठणेमि चरिउ (हरिवंश पुराण) का परिचय 🌺 • स्वयंभू द्वारा रचित • विषय – तीर्थंकर नेमिनाथ के चरित्र का वर्णन। • कुल श्लोक – 18हजार श्लोक। • चार काण्डों और 112 सिंधियों में विभाजित है। • चार काण्डों में विभक्त :- 1. यादव कांड(20 संधियां) 2. कुरु कांड (20 संधियां) 3. युद्धकांड (20संधियां) फाल्गुन नक्षत्र तृतीया तिथी बुधवार और शिव ...
Read More »भविस्सयत कथा का परिचय(Bhavishyat Katha ka parichay)
🌺भविस्सयत कथा का परिचय 🌺 • भविस्सयत कथा अपभ्रंश के कथाओं में प्रसिद्ध ग्रंथ है । * रचयिता – धनपाल * कुल सिंधिया – 22 सिंधिया • भविस्सयत कथा में श्रुतपंचमी व्रत के फलवर्णन स्वरूप भविस्सयत कथा का वर्णन है इसलिए इसे श्रुति पंचमी कथा भी कहते हैं। • अपभ्रंश भाषा के प्रकाशित होने वाले काव्यों में भविस्सयत कथा ग्रंथ ...
Read More »पाहुड दोहा का परिचय(Pahud Doha ka parichay)
🌺पाहुड दोहा का परिचय🌺 * रचयिता- राम सिंह। * रचना समय :- संवत् 1794 अर्थात् 1737 ई. * भाषा- अपभ्रंश भाषा * कुल पद्यों की संख्या – 222 पद्यों में *अत्यंत मधुर और सरल शैली से चैतन्यदेव का गुणगान गाते हुए बर्हिमुखता छुड़ाकर अंर्तमुखता उत्पन्न करती है। * जैनियों ने ‘पाहुड’ शब्द का प्रयोग किसी विशेष विषय के ...
Read More »पाहुड दोहा के रचयिता रामसिंह का परिचय(Pahud Doha ke rachayita Ram Singh ka parichay)
🌺पाहुड दोहा के रचयिता रामसिंह का परिचय 🌺 ◆ जैन मुनि ◆ जैनियों के आध्यात्मिक रहस्यवादी धारा के प्रमुख कवियों में से एक थे । ◆ रामसिंह ने चंचल मन की उपमा करहा (ऊंट)से ही है करहे की गति रेगिस्तानी प्रदेश में बड़ी तेज मानी जाती है। ◆ पश्चिमी प्रदेश के प्रदेश के निवासी । ◆ राजपूताना का रहने वाला ...
Read More »मैथिली गद्य की सर्वप्रथम रचना वर्ण रत्नाकर का परिचय(maithili gady ki pratham rachana Varna Ratnakar ka parichay)
🌺वर्ण रत्नाकर का परिचय🌺 * रचनाकार – ज्योतिरीश्वर ठाकुर(13वी शताब्दी) * रचनाकाल – 14 वीं शताब्दी का पूर्वाद्धर् ( सुनीति कुमार के अनुसार) * आठ कल्लोलो (अध्यायों में) * मैथिली का विश्वकोश * मैथिली गद्य की सर्वप्रथम रचना * इसमे लेखक ने हिन्दू दरबार और भारतीय जीवन का यथार्थ चित्रण किया गया है। * इसमें कुल 8 कल्लोल है:- ...
Read More »प्राकृत पैगलम् का परिचय(Prakrit Pagalam ka parichay)
🌺प्राकृत पैगलम् का परिचय🌺 * प्राकृत पैगलम् में प्राकृत और अपभ्रंश की स्फुट रचनाएं संग्रहित है । * छंद शास्त्र संबंधित पुस्तक * हिंदी में प्रारंभिक भाषा रूप और छंद को समझने के लिए यह प्रमाणित ग्रंथ है। * समय – 14वीं शताब्दी का पूर्वाद्धर् (डॉ .बच्चन सिंह के अनुसार) 15 वीं शताब्दी का आरंभ (सुनीति कुमार कू अनुसार) * ...
Read More »प्रबंध चिंतामणि का परिचय( Management Chintamani ka parichay)
🌺 प्रबंध चिंतामणि का परिचय 🌺 * 1304ई. में संस्कृत भाषा में जैन आचार्य मेरुतुंग द्वारा रचित है।(डॉ . बच्चन सिंह के अनुसार) * इसमें अनेक ऐतिहासिक कथा प्रबंध है । * इसमें बहुत पुराने राजाओं के आख्यान संग्रहीत किये गए है। * प्रबंध चिंतामणि नामक संस्कृत ग्रंथ भोज प्रबंध के ढंग से बनाया। * इसमें सिद्धराज जयसिंह कुमार पाल ...
Read More »संदेश रासक का परिचय (Sandesh Rasak ka parichay)
🌺 संदेश रासक का परिचय 🌺 * रचयिता :- अब्दुल रहमान/अद्दहमाण * 12वीं – 13वीं .शताब्दी की रचना मानते है।(आ. हजारी प्रसाद द्विवेदी ) * प्रेमकाव्य(विरह काव्य) * प्रमुख रस – श्रृंगार रस * भाषा :- अपभ्रंश * कुल छन्द :- 223 छन्द * इसमें प्रयुक्त हुए छंदों की संख्या :- 12 * सर्वाधिक रासा छन्द का प्रयोग(कुल रासा ...
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