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रीतिकाल: रस एवं नायिका-भेद निरूपण (reetikal: ras evam nayika-bhed nirupan)

रीतिकाल: रस एवं नायिका-भेद निरूपण  रीतिकाल (संवत् 1700–1900 वि.) में लक्षण-ग्रंथ परंपरा के अंतर्गत रस और नायिका-भेद का शास्त्रीय, सूक्ष्म और बहुआयामी निरूपण हुआ। सामंती दरबारी परिवेश और शृंगार-प्रियता के कारण इस युग के आचार्यों ने संस्कृत काव्यशास्त्र की परंपरा को ब्रजभाषा में पद्यबद्ध रूप में प्रस्तुत किया। 1. रीतिकाल में रस-निरूपण का विस्तृत स्वरूप (क) आधार-ग्रंथ एवं दार्शनिक पृष्ठभूमि: ...

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