इतिहास

रीति काल की प्रवृत्तियां(riti kal ki pravartiya)

                      🌺रीति काल की प्रवृत्तियां 🌺 1. रीति निरूपण । 2. श्रृंगारिकता। 3. श्रृंगार रस की प्रधानता। 4. अलंकार का प्राधान्य- पांडि्त्य प्रदर्शन हेतु अलंकारों का चमत्कारों प्रयोग। 5. काव्य रूप- रसिकता प्रधान, दरबारी वातावरण में चमत्कार, मुक्तक काव्य शैली। 6. वीर रसात्मकता काव्यों का प्रणयन। 7. आश्रयदाताओं की प्रशंसा। ...

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कृष्ण काव्य की प्रवृत्तियां(Krishna kavy ki pravartiya)

कृष्ण काव्य की प्रवृतियां

कृष्ण काव्य की प्रवृत्तियां(Krishna kavy ki pravartiya) 1. निर्गुण ब्रह्म के स्थान पर सगुण ब्रह्म की आराधना पर बल । 2. भक्ति के बहुआयामी स्वरूप का अंकन – संख्य एवं कांता भाव की प्रधानता,वात्सल्य भक्ति के साथ नवधा भक्ति को महत्व। 3. लीला गान में अत्यधिक रूचि। 4. गुरु महिमा और नाम स्मरण की महत्ता का बखान। 5. समकालीन सामाजिक ...

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राम काव्य की प्रवृत्तियां(ram kavy ki pravatiya)

राम काव्य की प्रवृत्तियां

🌺राम काव्य 🌺 ◆ वाल्मीकि रामायण:– यह सर्वप्रसिद्ध राम काव्य है जिसका रचयिता महर्षि वाल्मीकि हैं। इसमें भगवान राम की जीवनी का विस्तृत वर्णन किया गया है। ◆ तुलसीदास रामायण:- संत तुलसीदास द्वारा रचित “रामचरितमानस” भी एक प्रमुख राम काव्य है। इसमें राम की कथा को भारतीय जनता के लिए समझाने का प्रयास किया गया है। ◆कंब रामायण :- इसे ...

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सूफी काव्य की प्रवृत्तियां(sufi kavy ki pravatiya)

सूफी काव्य की प्रवृत्तियां

                        🌺सूफी काव्य 🌺 ◆ सूफी काव्य एक अद्वितीय रूप का काव्य है जो सूफी संतों की धार्मिकता और आध्यात्मिक उद्दीपना को प्रकट करता है। इसमें आत्मा के साथ दिव्यता, प्रेम, सांत्वना, और आत्म-ज्ञान के विषयों पर ध्यान केंद्रित होता है। सूफी काव्य की विशेषता यह है कि यह ...

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निर्गुण काव्यधारा की प्रवृत्तियां[Nirgun kavyadhara kee pravrttiyan]

भक्ति काल की निर्गुण काव्यधारा की प्रवृत्तियां

निर्गुण काव्यधारा की प्रवृत्तियां[Nirgun kavyadhara kee pravrttiyan] 1. निराकार ब्रह्म की उपासना निर्गुण सगुण में परे अनादि अनंत अनाम, अज्ञान ब्रह्म का नाम- जप। 2. गुरु की गुरुता के प्रति दिव्य श्रध्दा। 3. माया की व्यर्थता का प्रतिपादन। 4. संसार की असारता का निरूपण। 5. भक्ति भावना के विविध आयाम। *दास्यभक्ति, संख्य भक्ति, वात्सल्य भक्ति, शांत भक्ति,माधुर्य भक्ति। 6. सामाजिक ...

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रासो साहित्य की प्रवृत्तियां(raso sahitya ki pravatiya)

रासो साहित्य की प्रवृत्तियां

रासो साहित्य की प्रवृत्तियां(raso sahitya ki pravatiya) 1. अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णनों की अधिकता। 2. सामंती समाज की संस्कृति और यथार्थ का चित्रण। 3. ऐतिहासिकता, राष्ट्रीयता का अभाव। 4. युद्धों का जीवन वर्णन। 5. संदिग्ध और अर्द्ध प्रामाणिक रचनाओं को बहुलता। 6. नारी रूप का सौन्दर्यांकन। 7. प्रकृति के बहुआयामी स्वरूप का चित्रण। 8. वीर और श्रृंगार रस निरूपण। 9. विरहानुभूति की ...

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जैन साहित्य की प्रवृत्तियां ( jain sahitya ki pravartiya)

जैन साहित्य की प्रवृत्तियां

जैन साहित्य की प्रवृत्तियां ( jain sahitya ki pravartiya) 1. आध्यात्मिक चिंतन की प्रधानता। 2. रहस्यवादी विचारधारा का समावेश। 3. बाह्य उपासना पूजा-पाठ, रूढ़ियों और शुद्ध आत्मानुभूति पर जोर। 4. दार्शनिकता और शास्त्रीय ज्ञान की अपेक्षा। 5. जैन धर्म की प्रतिष्ठा। 6. नारी रूप का चित्रण । 7. भाव व्यंजना की अभिव्यक्ति। 8. रस निरूपण। 9. विरह की मार्मिक व्यंजना ...

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नाथ साहित्य की प्रवृत्तियां(Nath Sahitya ki pravartiya)

नाथ साहित्य की प्रवृतियां

नाथ साहित्य की प्रवृत्तियां(Nath Sahitya ki pravartiya) 1. हठयोग की साधना (काया साधना )पर बल । 2. साधनात्मक स्तर पर शून्यवाद की प्रतिष्ठा। 3. दर्शन के क्षेत्र में शैवमत का प्रतिपादन ।(साधनात्मक रहस्यवाद ) 4. प्रवृत्तिमूलक मार्ग के स्थान पर निवृत्ति मूलक मार्ग अपनाने पर बल। 5. वर्णाश्रम व्यवस्था पर तीखा प्रहार । 6. नारी को साधना के क्षेत्र से ...

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सिद्ध साहित्य की प्रवृतियां (sidh sahitya ki pravartiya)

sidh sahitya ki pravartiya

सिद्ध साहित्य की प्रवृतियां (sidh sahitya ki pravartiya) 1. योग के क्षेत्र में काया साधना की विभिन्न भूमिकाओं का निरूपण 2. ज्ञान की उपेक्षा 3. शून्यवाद की प्रतिष्ठा 4. तांत्रिक साधना के रूप में मद्य -मैथुन का सेवन (वाममार्गी साधना पद्धति) 5. वर्णाश्रम व्यवस्था रूढियों एवं बाह्याडंबरो का खण्डन 6. शांत एवं श्रृंगार रस की प्रधानता 7. अंतर्मुखी साधना पर ...

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आदिकाल की प्रवृत्तियां (Aadikal ki Pravartiya)

आदिकाल की प्रमुख प्रवृत्तियां

आदिकाल की प्रवृत्तियां (Aadikal ki Pravartiya) 1. ऐतिहासिकता का अभाव 2. युद्ध वर्णन में सजीवता 3. प्रमाणिकता में संदेह 4. वीर और संघर्ष का समन्वय (हम्मीर रासो और खुमान रासो में वीर रस के साथ संघर्ष के व्यक्ति हुई है। ) 5. आश्रयदाताओं की प्रशंसा 6. संकुचित राष्ट्रीयता 7. कल्पना की प्रचुरता 8. डिंगल – पिंगल भाषा का प्रयोग 9. ...

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