Tag Archives: तुलसीदास भरत राम का प्रेम सप्रसंग व्याख्या

अंतरा (भाग-2)’ (ऐच्छिक) के अंतर्गत आने वाली सभी प्रमुख कविताओं के मूलभाव और उद्देश्य

अंतरा (भाग-2)’ (ऐच्छिक) के अंतर्गत आने वाली सभी प्रमुख कविताओं के मूलभाव और  उद्देश्य ‘अंतरा (भाग-2)’ (ऐच्छिक) के अंतर्गत आने वाली इन सभी प्रमुख कविताओं के मूलभाव और गहन उद्देश्य को परीक्षा की दृष्टि से और अधिक विस्तार और स्पष्टता के साथ नीचे प्रस्तुत किया गया है। 1. जयशंकर प्रसाद (क) ‘देवसेना का गीत’ (स्कंदगुप्त नाटक से) विस्तृत मूलभाव: यह ...

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भरत-राम का प्रेम और पद (तुलसीदास): संदर्भ, सप्रसंग व्याख्या, भावार्थ एवं काव्य-सौंदर्य

भरत-राम का प्रेम और पद (तुलसीदास): संदर्भ, सप्रसंग व्याख्या, भावार्थ एवं काव्य-सौंदर्य भक्तिकाल की सगुण रामभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि गोस्वामी तुलसीदास की अंतरा (भाग-2) में संकलित रचनाओं—‘भरत-राम का प्रेम’ (रामचरितमानस के अयोध्याकांड से) और ‘पद’ (गीतावली से)—का संदर्भ, प्रसंग, सप्रसंग व्याख्या, भावार्थ एवं काव्य-सौंदर्य: भाग 1: भरत-राम का प्रेम मूल ग्रंथ: रामचरितमानस (अयोध्याकांड) भाषा: अवधी छंद: दोहा और चौपाई ...

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