Tag Archives: आचार्य रामचंद्र शुक्ल के कथन

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के प्रमुख कथन (आधुनिक काल)(acharya ramchandra shukl ke pramukh kathan (aadhunik kal))

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के प्रमुख कथन (आधुनिक काल) 1. रामप्रसाद निरंजनी भाषा योगवासिष्ठ: “अब तक पाई गई पुस्तकों में यह ‘भाषा योगवासिष्ठ’ ही सबसे पुराना है, जिसमें गद्य अपने परिष्कृत रूप में दिखाई पड़ता है।” प्रथम प्रौढ़ गद्य लेखक: “भाषा योगवासिष्ठ को परिमार्जित गद्य की प्रथम पुस्तक और रामप्रसाद निरंजनी को प्रथम प्रौढ़ गद्य लेखक मान सकते हैं।” 2. इंशा ...

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आ रामचंद्र शुक्ल के कथन (रीतिकाल के संबंध में)(aa ramchandra shukl ke kathan (reetikal ke sambandh men))

बिहारी के बारे में कथन :- “इसका एक-एक दोहा हिन्दी साहित्य में एक-एक रत्न माना जाता है।” “बिहारी की भाषा चलती होने पर भी साहित्यिक है।” “इसमें तो रस के ऐसे छींटे पड़ते हैं जिनसे हृदय-कलिका थोड़ी देर के लिए खिल उठती है।” “जिस कवि में कल्पना की समाहार शक्ति के साथ भाषा की समाहार शक्ति जितनी अधिक होगी उतनी ...

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