Tag Archives: aatmaparichay ki samvedna

आत्मपरिचय / दिन जल्दी-जल्दी ढलता है पाठ का मूल उद्देश्य व संवेदना

आत्मपरिचय / दिन जल्दी-जल्दी ढलता है (गीत) कवि: हरिवंश राय बच्चन काव्य-धारा: हालावाद / छायावादोत्तर गीतिकाव्य मूल स्रोत: ‘आत्मपरिचय’  तथा ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ (निशा निमंत्रण से) 1. पाठ का मूल उद्देश्य व संवेदना कविता 1: ‘आत्मपरिचय’(निशा निमंत्रण से) स्वयं की पहचान: यह प्रतिपादित करना कि स्वयं को जानना दुनिया को जानने से कहीं अधिक कठिन है। प्रीति-कलह का संबंध: ...

Read More »
error: Content is protected !!