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आचार्य देव की कविताएँ व्याख्या: हँसी की चोट, सपना और दरबार | अंतरा भाग-1

आचार्य देव की कविताएँ व्याख्या: हँसी की चोट, सपना और दरबार | अंतरा भाग-1 रीतिकाल के रीतिबद्ध काव्यधारा के प्रमुख आचार्य कवि देव (देवदत्त) की पाठ्यपुस्तक अंतरा (भाग-1) में संकलित तीनों रचनाओं—‘हँसी की चोट’ (सवैया), ‘सपना’ (कवित्त) और ‘दरबार’ (सवैया)—का संदर्भ, प्रसंग, प्रत्येक पंक्ति की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवि: महाकवि देव (देवदत्त) काल: रीतिकाल (रीतिबद्ध धारा) ...

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