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पतंग (कविता) का उद्देश्य व मूल संवेदना(patang (kavita) ka uddeshya va mool samvedna)

पतंग (कविता) कवि: आलोक धन्वा मूल काव्य-संग्रह: ‘दुनिया रोज़ बनती है’ (1998, कवि का पहला और एकमात्र संग्रह) काव्य-रूप: यह एक लंबी कविता का तीसरा भाग है। मूल विषय: बालसुलभ इच्छाएँ, उमंगें, प्रकृति परिवर्तन तथा बच्चों का अदम्य साहस व निडरता। 1. पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना बाल-सुलभ उमंगों का चित्रण: आसमान में उड़ती पतंग के माध्यम से बच्चों ...

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