? स्वयंभू का परिचय ? * अपभ्रंश का वाल्मीकि * समय :- 8वीं शताब्दी * उत्तर के रहने वाले थे बाद में संरक्षण के साथ राष्ट्रकूट राज्यों में चले गए । * पिता का नाम :- मारुति देव * स्वयंभू के दो पत्नियां थी। * स्वयंभू के आश्रयदाता :- धनंजय और धवलाइया * प्रमुख ग्रंथ :- पउमचरिउ * जैन कवियों ...
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अपभ्रंश साहित्य का प्रथम महाकाव्य पउमचरिउ का परिचय(Apabhramsha sahity ka pratham mahakavy Poomachariyu ka paricha)
?अपभ्रंश साहित्य का प्रथम महाकाव्य पउमचरिउ का परिचय ? • रचयिता – महाकवि स्वयंभू • अपभ्रंश साहित्य का अत्यंत प्रसिद्ध एवं प्रथम महाकाव्य। • चरित काव्य। • पांच काण्डों और 90 संधियों में विभाजित है। • पांच काण्डों में विभक्त :- 1. विद्याधर कांड(20 संधियां) 2. अयोध्या कांड (22 संधियां) 3. सुंदरकांड (14 संधियां) 4. युद्ध कांड(21 संधियां) 5. उत्तरकांड ...
Read More »पुरस्कार पाने वाली प्रथम महिलाएं(puraskar pane vali pratham mahilaen)
? पुरस्कार पाने वाली प्रथम महिलाएं ? 1. *बुकर पुरस्कार जीतने वाली प्रथम महिला :- अरुंधति रॉय 2. *अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज जीतने वाली प्रथम महिला :- गीतांजलि श्री 3. पद्म विभूषण पुरस्कार (हिन्दी) पाने वाली प्रथम महिला :- अमृता प्रीतम (दिल्ली, 2004 में) 4. पद्म भूषण पुरस्कार (हिन्दी) पाने वाली प्रथम महिला :- महादेवी वर्मा (उत्तर प्रदेश, 1956ई.) 5. पद्मश्री ...
Read More »नंददुलारे वाजपेयी के आलोचनात्मक ग्रंथ(nandadulare vajapeyi ke aalochanatmak granth)
⭐ नंददुलारे वाजपेयी के आलोचनात्मक ग्रंथ⭐ ◆ जयशंकर प्रसाद (1940 ई.) ◆ साहित्य : बीसवीं शताब्दी (1942 ई.) ◆ प्रेमचंद, आधुनिक साहित्य (1950 ई.) ◆ महाकवि सूरदास (1952 ई.) ◆ नया साहित्य : नये प्रश्न (1955 ई.) ◆ महाकवि निराला (1965 ई.) ◆ नयी कविता (1973 ई.) ◆ कवि सुमित्रानंदन पंत (1976 ई.) ...
Read More »पंच बिड़ाल क्या है?[panch bidal kya hai ]
?पंच बिड़ाल क्या है?[What is Panch Bidal?] ? बौद्ध शास्त्रों में निरूपित पंच प्रतिबंध(panch pratibandh) :- 1. आलस्य :- आलस्य का तात्पर्य – कार्यों, गतिविधियों या जिम्मेदारियों के प्रति प्रयास या ऊर्जा लगाने से बचने या विरोध करने की प्रवृत्ति से है। इसमें प्रेरणा की कमी, विलंब और उत्पादक कार्यों की तुलना में आलस्य या विश्राम को प्राथमिकता देना शामिल ...
Read More »प्रपद्यवाद /नकेनवाद का परिचय[prapadyavad/nakenavad ka parichay]
⭐प्रपद्यवाद /नकेनवाद का परिचय⭐ ◆ स्थापना :- 1956 ई. में, नलिन विलोचन शर्मा ने ◆ नकेनवाद को प्रपद्यवाद के नाम से भी जाना जाता है। ◆ इसे हिन्दी साहित्य में प्रयोगवाद की एक शाखा माना जाता है। ◆ इसके अन्तर्गत बिहार के तीन कवियों को शामिल किया जाता है:- 1. नलिन विलोचन शर्मा 2. केशरी कुमार 3. नरेश कुमार ★ ...
Read More »विद्यानिवास मिश्र के निबन्ध संग्रह[ vidyanivas mishr ke nibandh sangrah]
⭐ विद्यानिवास मिश्र के निबन्ध संग्रह⭐ ◆ छितवन की छाँह (1953 ई.) ◆ हल्दी दूब (1955 ई.) ◆ कदम की फूली डाल (1956 ई.) ◆ तुम चन्दन हम पानी (1957 ई.) ◆ आँगन का पंछी और बनजारा मन (1963 ई.) ◆ मैंने सिल पहुॅचाई (1966 ई.) ◆ बसंत आ गया पर कोई उत्कंठा नहीं (1972 ई.) ◆ मेरे राम का मुकुट ...
Read More »कहानियों में गांधी विचारधारा[kahaniyon mein Gandhi vichardhara]
⭐⭐ कहानियों में गांधी विचारधारा ⭐⭐ ⭐ प्रेमचंद की कहानियां :- ◆ शंखनाद ◆ बेटी का धन ◆ माता का हृदय ◆ ईश्वरी न्याय ◆ बिक्री के रुपये ◆ शुद्धा ⭐ सुदर्शन की कहानियां:- ◆ अमरीकन रमणी ◆ पंथ की प्रतिष्ठा ◆ सत्य मार्ग ◆ अंधेरे में ◆ कैदी ◆ सुभद्रा का उपहास ⭐ विश्वाम्भरशर्मा कौशिक जी की कहानियां:- ◆ ...
Read More »मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषाएं( madhyakalin bharatiy aary bhashaen)
?मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषाएं ? 【500 ई.पू. से 1000 ई.तक】 1. पालि ( प्रथम प्राकृत)【500 ई.पू. से 1 ई.तक】 2.प्राकृत (द्वितीय प्राकृत)【1ई.से 500 ई.तक】 3.अपभ्रंश(तृतीय प्राकृत) 【500 ई.से 1000 ई.तक】 ?1. पालि ( प्रथम प्राकृत)? 【500 ई.पू. से 1 ई.तक】 • पालि का अर्थ बुद्ध वचन होने से यह शब्द केवल मूल त्रिपिटक ग्रंथों के लिए प्रयुक्त हुआ। • पालि ...
Read More »छायावादी काव्य की प्रवृत्तियां( chhayavadi kavy ki pravatiya)
? छायावादी काव्य की प्रवृत्तियां ? 1. आत्माभिव्यंजना /आत्माभिव्यक्ति की प्रधानता। 2. मै शैली /उत्तम पुरुष शैली । 3. मानवीय सौंदर्य का बोध । 4. प्रकृति के रम्य रूपों की रचना। 5. प्रकृति संबंधित बिम्बों की बहुलता । 6. स्वच्छंद कल्पना का नवोन्मेष। 7. रहस्य भावना। 8. अज्ञात व असीम ...
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