हिन्दी साहित्य की पद्धतियां :- 1. वर्णानुक्रमी पद्धति:- यह वर्णो पर आधारित है।गार्सा द तासी एवं शिवसिंह सेंगर इसी पद्धति पर आधारित है। इसमें कवियों का वर्णन नाम के वर्णानुसार किया जाता है।अतः इसमें कवियों के जीवन परिचय के बारे में जानकारी तो मिलती है किन्तु साहित्य प्रवृत्तियों की उपेक्षा हो जाती है। (क) गार्सा द तासी:- ◆ ग्रन्थ – ...
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आलवार भक्त(aalavar bhakt)
?आलवार भक्त(aalavar bhakt)? ?आलवार भक्तों की संख्याः- 12 ?आलवार भक्तों की शॉर्टट्रिक :– सभूमधुरकविकुलमुनिविष्णु से मिलकर भक्ति करने का शगोदा को भ्रान्त होता है परन्तु भक्ताघ्रिरेण को पता नही रहता है। (1) सरोयोगी (स) (2) भूतयोगी (भू) (3)मधुर कवि (मधुर) (4) कुल शेखर (कविकुल) :- रामोपासक (5) मुनिवाहन(मुनि) (6) विष्णुचित (विष्णु):- रामोपासक (7) भक्तिसार(भक्ति) (8) शठकोप या नक्मालवार(श) :-रामोपासक (9) ...
Read More »UGC NET हिन्दी कहानियाँ की जानकारी (unit – 7)
क्र.स. कहानी कहानीकार प्रकाशन वर्ष प्रकाशन पत्रिका एवं कहानी संग्रह 1. चन्द्रदेव से मेरी बाते बंग महिला (राजेन्द्र बाला घोष) 1904 सरस्वती पत्रिका में प्रकाशन 2. दुलाई वाली बंग महिला (राजेन्द्र बाला घोष 1907 सरस्वती पत्रिका में प्रका. 3. एक टोकरी भर मिट्टी माधव राव सप्रे 1901 छतीसगढ़ मित्र पत्रिका में प्रका. 4. राही सुभद्रा कुमारी चौहान 1947 सीधे-साधे चित्र ...
Read More »विद्यापति(vidyapati) का जीवन परिचय
• जन्म :- 1380 ई. • जन्म स्थान :- बिसपी गांव ,मधुबनी जिला,बिहार • मृत्यु :- 1460ई. जनकपुर (नेपाल) • विद्यापति का पूरा नाम:- विद्यापति ठाकुर • पिता का नाम :- गणपति ठाकुर (गंगा भक्ति तरंगिणी के रचनाकार ) • माता का नाम :- हंसिनी देवी • विद्यापति के दो विवाह हुए थे :- पहली पत्नी से :- दो पुत्र ...
Read More »संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हिंदी के कवि(sangeet natak akadami puraskar se sammanit hindi ke kavi)
संगीत नाटक अकादमी परिचय :- संगीत, नृत्य और नाटक के लिए भारत की राष्ट्रीय अकादमी भारत द्वारा स्थापित कला की पहली राष्ट्रीय अकादमी है। अकादमी का उद्घाटन :- 28 जनवरी 1953 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के द्वारा। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की स्थापना :- 1959 में संगीत नाटक अकादमी एक स्वायत्त निकाय है(भारत सरकार का) उद्देश्य और उद्देश्य ...
Read More »प्रियप्रवास(priyapravas)
•”प्रियप्रवास” शब्द संस्कृत भाषा का है और इसका अर्थ होता है “प्रिय” (अर्थात् प्रिय या प्यारा) और “प्रवास” (अर्थात् यात्रा)। इस शब्द का अर्थ होता है “प्यारे या प्रिय के साथ यात्रा”। •रचयिता :- अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध • महाकाव्य • हिंदी खड़ी बोली में लिखा गया हिंदी का प्रथम महाकाव्य • शैली :- भिन्न तुकांत शैली में • भाषा ...
Read More »अरस्तु का विरेचन सिद्धांत(arastu ka virechan siddhant)
प्लेटो के अनूठी सिद्धांत का विरोध करने वाला सिद्धांत- अरस्तु का विरेचन सिद्धांत। • विरेचन का उद्देश्य – आनंदप्रद राहत । • विरेचन की प्रथम बार चर्चा- पोयटिक्स के 6वे अध्याय में । • विरेचन की दूसरी बार चर्चा -राजनीति शास्त्र के भाग 8 के अध्याय 7 में संगीत के अध्ययन के उद्देश्य के अंतर्गत। • यूनानी शब्द कथार्सिस जिसका ...
Read More »अरस्तु का त्रासदी सिद्धांत(arastu ka trasadi siddhant)
• त्रासदी का सर्वप्रथम विवेचन : – यूनान में। • त्रासदी का गंभीर एवं विशद् विवेचन सर्वप्रथम :-अरस्तु ने। • त्रासदी का विषय(अरस्तु के अनुसार) :- केवल गंभीर कार्य की अनुकृति • त्रासदी के तत्व :- (i) कथावस्तु या कथानक (त्रासदी का प्रमुख तत्व) (ii) चरित्र (iii) विचार तत्व (iv) पदावली(अनुकरण के माध्यम) (v) दृश्य विधान(अनुकरण की पद्धति) (vi) संगीत ...
Read More »प्लेटो का काव्य सिद्धांत(pleto ka kavy siddhant)
• कवि की प्रतिभा को ईश्वर की देन।( यह पूर्व युग में माना) • काव्य रचना को देवी प्रेरणा का परिणाम।( यह पूर्व युग में माना) • प्लेटो ने बौद्धिक आनंद स्वीकारा । • प्लेटो ने ऐन्द्रिय आनंद को स्वीकार नहीं किया। • सामान्य (विश्व जनिन) सत्य को सत्य मानना कविता के सत्य को नहीं माना। • वस्तु जगत प्रत्यय ...
Read More »सिद्ध साहित्य का सम्पूर्ण परिचय(siddh sahity ka sampoorn parichay)
सिद्ध साहित्य का समय:– 8 वीं शताब्दी से 13 वीं शताब्दी तक। [ ] सिद्ध साहित्य का कार्यक्षेत्र :- • बंगाल, असम, उड़ीसा बिहार ।(डॉ. नगेन्द्र के अनुसार) • जालंधर, ओडियान,अर्बुद,पूर्वगिरी ,कामरूप। ( प्रकाश बगीची के अनुसार ) • ओडियान, पूर्णगिरि ,कामाख्या (साधनमाला में) [ ] सिद्ध साधना के केंद्र :- • नालंदा विश्वविद्यालय(बिहार के राजगीर जिले में, • स्थापना ...
Read More »प्रथम एवं प्रसिद्ध उपन्यास(pratham evan prasiddh upanyas)
प्रथम एवं प्रसिद्ध उपन्यास क्र.स उपन्यास प्रथम एवं प्रसिद्ध उपन्यास 1. श्रद्धाराम फिल्लौरी भाग्यवती(प्रका. 1877 प्रसिद्ध उपन्यास) 2. लाल श्रीनिवास दास परीक्षा गुरू(प्रका. 1882, प्रसिद्ध उपन्यास) 3. किशोर लाल गोस्वामी हृदयहारिणी (प्रका. 1904, हिन्दी का प्रथम ऐतिहासिक उपन्यास) 4. प्रेमचन्द कायाकल्प(हिन्दी मे लिखित प्रथम उपन्यास), सेवासदन(प्रथम प्रौढ उपन्यास मंगलसूत्र(अपूर्ण उपन्यास) 5. जगमोहन सिंह श्यामा ...
Read More »विश्व हिंदी सचिवालय(vishv hindi sachivalay)
• विश्व हिंदी केंद्र की स्थापना का विचार प्रस्तुत किया :- प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन (1975 , नागपुर) में (मॉरीशस के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिवसागर रामगुलाम ने) • विश्व हिंदी सचिवालय के निर्माण से संबंधित कार्यों के लिए शिक्षा व वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्रालय में सलाहकार के रूप में मॉरीशस सरकार ने :- डॉ. श्रीमती सरिता बुधु को नियुक्त किया। (5वां विश्व ...
Read More »विश्व हिंदी सम्मेलन(vishv hindi sammelan)
विश्व हिंदी सम्मेलन हिंदी भाषा का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है । • प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन की संकल्पना राष्ट्र भाषा प्रचार समिति वर्धा द्वारा वर्ष 1973 में की गई। [ ] पहला विश्व हिंदी सम्मेलनः- • 10 से 14 जनवरी 1 975 को • आयोजन :- नागपुर में • सम्मेलन का आयोजन :- राष्ट्र भाषा प्रचार समिति, वर्धा के ...
Read More »कवियों के उपनाम(कलम,सखी का अवतार,शेक्सपियर,भारत,डिक्टेटर)
कवियों को उपनाम या उपत्यंत्र के रूप में भी जाना जाता है, जो उनके विशेषताओं, कार्यक्षमता, या उनकी रचनाओं से संबंधित होता है। यहाँ कुछ उपनामों की एक सूची है: सूरदास: सूरदास को “सूर” भी कहा जाता है। कबीरदास: कबीरदास को “संत कबीर” या “सांत” भी कहा जाता है। रहीम: रहीम को “रहीम दास” या “अब्दुल रहीम” कहा जाता है। ...
Read More »हिंदी के बादशाह कहे जाने वाले कवि(hindi ke badashah kahe jane vale kavi)
हिंदी साहित्य में कई कवियों को “बादशाह” के रूप में सम्मानित किया गया है, कुछ मुख्य हैं: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ को हिंदी साहित्य का एक महान कवि माना जाता है और उन्हें “नीले परियावल” का बादशाह कहा गया है। महादेवी वर्मा: महादेवी वर्मा को “मोदेर्न मीरा” और “रानी की भाषा” के रूप में जाना जाता है। जयशंकर ...
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