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दुष्यंत कुमार ग़ज़ल ‘साए में धूप’ सप्रसंग व्याख्या

दुष्यंत कुमार ग़ज़ल ‘साए में धूप’ सप्रसंग व्याख्या हिंदी ग़ज़ल को नई पहचान और जन-आंदोलनों की आवाज़ बनाने वाले मूर्धन्य कवि एवं शायर दुष्यंत कुमार की आरोह (भाग-1) में संकलित प्रसिद्ध ग़ज़ल “कहाँ तो तय था चिरागाँ…” के प्रत्येक शेर की संदर्भ, प्रसंग, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ शायर: दुष्यंत कुमार मूल ग़ज़ल संग्रह: साए में धूप (1975) ...

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