फ़िराक गोरखपुरी जीवन परिचय, कृतित्व एवं काव्यगत विशेषताएँ “हिंदी साहित्य और उर्दू शायरी के एक मजबूत सेतु” (पुस्तकें: गुले-नग़्मा, बज़्मे-जिंदगी, रंगे-शायरी, मशाल, ग़ज़लिस्तान) 1. जीवन वृत्तांत – जन्म और जन्म स्थान जन्म : 28 अगस्त, 1896 (वास्तविक नाम – रघुपति सहाय) जन्म स्थान : गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) पिता : गोरख प्रसाद (पेशे से वकील, स्वयं कवि) पारिवारिक पृष्ठभूमि : सुख-सुविधाओं ...
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रुबाइयाँ काव्य का मूल उद्देश्य और मूल संवेदना(rubaiyan kavya ka mool uddeshya aur mool samvedna)
रुबाइयाँ (काव्य) शायर: फ़िराक़ गोरखपुरी (मूल नाम: रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’) काव्य-रूप / छंद: रुबाई (उर्दू-फ़ारसी का चार पंक्तियों वाला लोकप्रिय छंद) मूल विषय: वात्सल्य रस, माँ-बच्चे का आत्मीय संबंध, भारतीय लोक-जीवन तथा दीवाली व रक्षाबंधन जैसे पावन पर्वों की सांस्कृतिक छटा। शायरी की विशेषताएँ: उर्दू शायरी को पारंपरिक रूमानी व दरबारी घेरे से निकालकर आम आदमी के लोक-जीवन, संस्कृति और ...
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