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 रुबाइयाँ काव्य का मूल उद्देश्य और मूल संवेदना(rubaiyan kavya ka mool uddeshya aur mool samvedna)

 रुबाइयाँ (काव्य) शायर: फ़िराक़ गोरखपुरी (मूल नाम: रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’) काव्य-रूप / छंद: रुबाई (उर्दू-फ़ारसी का चार पंक्तियों वाला लोकप्रिय छंद) मूल विषय: वात्सल्य रस, माँ-बच्चे का आत्मीय संबंध, भारतीय लोक-जीवन तथा दीवाली व रक्षाबंधन जैसे पावन पर्वों की सांस्कृतिक छटा। शायरी की विशेषताएँ: उर्दू शायरी को पारंपरिक रूमानी व दरबारी घेरे से निकालकर आम आदमी के लोक-जीवन, संस्कृति और ...

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