एसयूपीडब्ल्यू (SUPW) कैंप हेतु भाषण
एसयूपीडब्ल्यू (SUPW) कैंप हेतु भाषण
आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षक गण और मेरे प्यारे सहपाठियों,
आप सभी को मेरा सादर प्रणाम।
आज हम सब यहाँ एसयूपीडब्ल्यू (SUPW) कैंप के लिए एकत्रित हुए हैं। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है— ‘समाज के लिए उपयोगी उत्पादक कार्य’। अक्सर हम सोचते हैं कि शिक्षा का अर्थ केवल गणित के सवाल हल करना या इतिहास की तारीखें याद करना है। लेकिन महान शिक्षाविद महात्मा गांधी ने कहा था कि असली शिक्षा वही है जो शरीर, मन और आत्मा के साथ-साथ हमारे हाथों को भी हुनरमंद बनाए।
इस कैंप का उद्देश्य हमें ‘श्रम की महत्ता’ (Dignity of Labour) समझाना है। यहाँ हम केवल कागज़ के फूल बनाना या मिट्टी के बर्तन बनाना नहीं सीखेंगे, बल्कि हम सीखेंगे कि:
• स्वावलंबन क्या है: अपने काम स्वयं करना और छोटी-छोटी चीज़ों के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना।
• टीम वर्क: कैसे एक साथ मिलकर हम किसी बड़े लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
• सृजनात्मकता: बेकार पड़ी वस्तुओं (Waste Materials) से कुछ उपयोगी बनाना।
मेरे साथियों, आज के डिजिटल युग में जहाँ हम अपना अधिकांश समय मोबाइल स्क्रीन पर बिताते हैं, यह कैंप हमें अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर देता है। चाहे वह बागवानी हो, सिलाई-कढ़ाई हो, सामुदायिक सफाई हो या प्राथमिक चिकित्सा— ये सभी कौशल हमें जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं।
अंत में, मैं बस इतना ही कहना चाहूँगा—
“हाथों में हुनर हो, तो मंज़िल दूर नहीं होती,
मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती।”
धन्यवाद! जय हिन्द।
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विषय: सवाल पूछने की हिम्मत (The Courage to Ask ‘Why?’)
शुरुआत (Opening):
“आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, शिक्षक गण और मेरे प्यारे दोस्तों, आप सभी को मेरा नमस्कार!
क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे बुद्धिमान इंसान कौन है? वह नहीं जिसके पास सारे जवाब हैं, बल्कि वह जो सबसे ज़्यादा सवाल पूछता है! आज मैं आप सभी से इसी बारे में बात करने आया/आई हूँ कि हमें सवाल पूछने की हिम्मत क्यों करनी चाहिए।”
मुख्य भाग (Body):
“दोस्तों, जब हम छोटे थे, तो हम हर चीज़ पर सवाल पूछते थे— ‘आसमान नीला क्यों है?’, ‘तारे क्यों चमकते हैं?’ लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हम डरने लगते हैं। हम सोचते हैं कि अगर मैंने सवाल पूछा, तो बाकी बच्चे हँसेंगे या टीचर क्या सोचेंगे?
लेकिन याद रखिए, इतिहास गवाह है कि महान खोजें सवालों से ही शुरू हुई हैं:
• अगर आइजैक न्यूटन ने यह नहीं पूछा होता कि ‘सेब नीचे ही क्यों गिरा, ऊपर क्यों नहीं गया?’, तो हमें गुरुत्वाकर्षण (Gravity) का पता कभी नहीं चलता।
• अगर थॉमस एडिसन ने यह नहीं पूछा होता कि ‘क्या हम रात को भी रोशनी कर सकते हैं?’, तो आज हमारे घरों में बल्ब नहीं जल रहे होते।
सवाल पूछना इस बात की निशानी नहीं है कि आपको कुछ नहीं आता, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि आप सीखना चाहते हैं। जो सवाल पूछता है, वह सिर्फ 5 मिनट के लिए मूर्ख लग सकता है, लेकिन जो कभी सवाल नहीं पूछता, वह पूरी जिंदगी के लिए अज्ञानी रह जाता है।”
ज्ञान और प्रेरणा (Insight):
“मेरे प्यारे दोस्तों, क्लास में हाथ उठाने से मत डरिए। आपका एक छोटा सा सवाल सिर्फ आपको ही नहीं, बल्कि आपके उन साथियों को भी ज्ञान दे सकता है जो पूछने से डर रहे थे। सवाल पूछना एक सुपरपावर है जो आपके दिमाग की खिड़कियां खोल देता है।”
समाप्ति (Conclusion):
“अंत में, मैं बस इतना ही कहूँगा/कहूँगी कि दुनिया को बदलने के लिए जवाबों से ज़्यादा ‘सवालों’ की ज़रूरत है। इसलिए जिज्ञासु बनिए, निडर बनिए और पूछना शुरू कीजिए— ‘क्यों?’, ‘कैसे?’ और ‘क्या होगा अगर?’
याद रखिए: सवाल पूछोगे, तभी तो जानोगे!
धन्यवाद! जय हिन्द।
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विषय: एक मुस्कान की कीमत (The Power of a Smile)
शुरुआत (Opening):
“माननीय प्रधानाचार्य जी, आदरणीय शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों, आप सभी को मेरा सादर प्रणाम!
आज भाषण शुरू करने से पहले, मैं चाहता/चाहती हूँ कि आप सब अपने बगल में बैठे दोस्त को देखकर एक प्यारी सी मुस्कान दें। (2 सेकंड रुकें) देखा आपने? जैसे ही आपने मुस्कुराया, यह माहौल कितना खुशनुमा हो गया! आज मेरा विषय यही है— ‘एक मुस्कान की कीमत’।”
मुख्य भाग (Body):
“दोस्तों, मुस्कान दुनिया की इकलौती ऐसी चीज़ है जो मुफ़्त है, लेकिन इसकी कीमत अनमोल है। इसे पहनने के लिए हमें किसी दुकान पर नहीं जाना पड़ता, यह हमारे अंदर ही छुपी होती है।
एक छोटी सी मुस्कान क्या कर सकती है, क्या आपने कभी सोचा है?
• दोस्ती की शुरुआत: जब हम किसी अजनबी को देखकर मुस्कुराते हैं, तो बिना बोले ही दोस्ती का हाथ बढ़ा देते हैं।
• डर को भगाना: जब हमें स्टेज पर आने में डर लगता है और सामने से कोई शिक्षक हमें देखकर मुस्कुरा दे, तो हमारा सारा डर गायब हो जाता है।
• जादू की झप्पी जैसा असर: अगर आपका कोई दोस्त उदास है या उसे चोट लगी है, तो आपकी एक सहानुभूति भरी मुस्कान उसे यकीन दिलाती है कि ‘सब ठीक हो जाएगा’।”
ज्ञान और उत्साह (Insight & Enthusiasm):
“विज्ञान भी कहता है कि मुस्कुराने से हमारा दिमाग तेज़ चलता है और हम कम बीमार पड़ते हैं। मुस्कान एक ऐसी भाषा है जिसे एक छोटा बच्चा भी समझता है और एक बुजुर्ग भी।
सोचिए, अगर पूरी दुनिया में लोग एक-दूसरे को देखकर गुस्सा करने के बजाय सिर्फ मुस्कुराना शुरू कर दें, तो कितनी लड़ाइयाँ खत्म हो जाएंगी! मुस्कान बांटने से कम नहीं होती, बल्कि बढ़ती है। अगर आप एक व्यक्ति को मुस्कान देंगे, तो बदले में आपको भी एक मुस्कान ही मिलेगी।”
समाप्ति (Conclusion):
“मेरे प्यारे साथियों, आज हम सब एक वादा करते हैं। हम रोज़ कम से कम एक ऐसे व्यक्ति को मुस्कुराकर देखेंगे जो उदास हो। क्योंकि आपकी एक छोटी सी मुस्कान किसी के डूबते हुए दिन को बचा सकती है।
जाते-जाते बस इतना ही कहूँगा/कहूँगी:
‘मुस्कुराइए, क्योंकि आपकी मुस्कान इस दुनिया को और भी सुंदर बनाती है!’
धन्यवाद!”
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विषय: मिसाइल मैन: एपीजे अब्दुल कलाम की कहानी
शुरुआत (Opening):
“आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, शिक्षक गण और मेरे प्यारे मित्रों, आप सभी को ‘कलाम दल’ की ओर से सादर नमस्कार!
जैसा कि आप जानते हैं, हमारे दल का नाम भारत के महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया है। यह सिर्फ एक नाम नहीं है, यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी और प्रेरणा है।”
आज मैं आपको इन्हीं इंसान की कहानी सुनाने आया हूँ, जिन्होंने हमें सिखाया कि इंसान गरीब पैदा भले हो सकता है, लेकिन उसे गरीब मरना नहीं चाहिए।
मुख्य भाग (Body):
“दोस्तों, कलाम साहब का जन्म तमिलनाडु के एक छोटे से गाँव रामेश्वरम में हुआ था। उनके पिता एक नाविक थे। परिवार की मदद करने के लिए नन्हा कलाम स्कूल जाने से पहले सुबह-सुबह अखबार बेचा करता था।
क्या आप जानते हैं उनका सपना क्या था? वह आसमान में उड़ना चाहते थे, पायलट बनना चाहते थे। वे पायलट तो नहीं बन पाए, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से भारत के लिए ऐसी मिसाइलें बनाईं कि पूरी दुनिया हैरान रह गई। इसीलिए उन्हें ‘मिसाइल मैन’ कहा जाता है।”
ज्ञान और उत्साह (Insight & Enthusiasm):
“कलाम साहब को बच्चों से बहुत प्यार था। वे कहते थे कि बच्चे ही इस देश का भविष्य हैं। उन्होंने हमें सफलता के चार मंत्र दिए:
• महान लक्ष्य: हमेशा बड़ा सपना देखो।
• ज्ञान प्राप्त करना: लगातार नई चीजें सीखते रहो।
• कड़ी मेहनत: पसीना बहाने से मत डरो।
• दृढ़ता: हार मत मानो, चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं।
उनका एक विचार मुझे सबसे ज्यादा पसंद है: ‘सपने वो नहीं जो आप सोते समय देखते हैं, सपने वो हैं जो आपको सोने नहीं देते।'”
समाप्ति (Conclusion):
“साथियों, कलाम साहब आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सादगी और उनके विचार हमेशा हमारे साथ रहेंगे। वे एक राष्ट्रपति होकर भी जमीन से जुड़े इंसान थे।
आज हम उनसे यह सीख सकते हैं कि चाहे हम कहीं से भी आएं, अगर हमारे इरादे मजबूत हैं, तो हम आसमान छू सकते हैं। आइए आज हम सब शपथ लें कि हम खूब पढ़ेंगे और कलाम साहब की तरह अपने देश का नाम रोशन करेंगे।
धन्यवाद! जय हिन्द!”

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