🌺पत्रकारिता का स्वरूप🌺 पत्रकारिता का स्वरूप समय के साथ बदलता रहा है, लेकिन इसके मूल सिद्धांत और उद्देश्य लगभग एक जैसे ही बने रहे हैं। पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है सूचना का संकलन, विश्लेषण, और प्रसार, जिससे समाज को जागरूक और सूचित रखा जा सके। यहाँ पत्रकारिता के स्वरूप के विभिन्न पहलुओं का विवरण दिया गया है: 🌺प्रकार प्रिंट ...
Read More »Author Archives: Puran Mal Kumhar
विश्व और भारत सर्वप्रथम समाचार पत्र(world and india first newspaper)
🌺विश्व और भारत सर्वप्रथम समाचार पत्र🌺 ◆ मुद्रण यंत्र का आविष्कार सर्वप्रथम :- चीन में ◆ पहला समाचार पत्र :- पैकिंग ( चीन मे, दैनिक पत्र, 1340 ई. में) ◆ आधुनिक पत्रकारिता का जनक :- चीन ◆ आधुनिक पत्रकारिता का आरंभ (क्रमशः) :- चीन – इटली- जर्मनी – हालैण्ड – फ्रांस – ब्रिटेन – भारत ...
Read More »हिन्दी भाषा का सर्वप्रथम समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ (hindi bhasha ka sarvapratham samachar patr udant martand)
🌺हिन्दी भाषा का सर्वप्रथम समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’🌺 * उदन्त मार्तण्ड’ का हिंदी में शाब्दिक अर्थ होता है- उगता सूरज। इस अखबार की शुरुआत कलकत्ता के बड़ा बाजार के पास 27,अमर तल्ला लेन, कोलूटोला में शुरू हुआ था। उस वक्त अंग्रेजी फारसी और बांग्ला भाषा में पहले से कई अखबार-मैगजीन निकलते थे लेकिन हिंदी में एक भी समाचार पत्र नहीं ...
Read More »मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय(Munshi Premchand ka jeevan parichay)
🌺मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय 🌺 ◆ जन्म :- 31 जुलाई 1880 में वाराणसी जिले के लमही ग्राम में ◆ मृत्यु :- 8 अक्तूबर 1936, वाराणसी ◆ पिता का नाम :- अजायब लाल ◆ माता का नाम :- आनन्दी देवी ◆ प्रेमचंद के उपनाम :- ★ ‘धनपतराय’ (जन्म – पत्री का नाम) ★ ‘नवाबराय’ (चाचा ताऊ ...
Read More »‘झीनी-झीनी बीनी चदरिया’ कबीरदास का पद और अब्दुल बिस्मिल्लाह का बहुचर्चित उपन्यास
🌺’झीनी-झीनी बीनी चदरिया’ कबीरदास का पद और अब्दुल बिस्मिल्लाह का बहुचर्चित उपन्यास🌺 झीनी-झीनी बीनी चदरिया, काहे कै ताना, काहै कै भरनी, कौन तार से बीनी चदरिया। इंगला पिंगला ताना भरनी, सुखमन तार से बीनी चदरिया॥ आठ कँवल दल चरखा डोलै, पाँच तत्त गुन तीनी चदरिया। साँई को सियत मास दस लागै, ठोक-ठोक कै बीनी चदरिया॥ सो चादर सुर नर मुनि ...
Read More »हिंदी का सबसे उद्दण्ड:- कवि बेताल बंदीजन
🌺 मिश्र बंधुओं ने कवि बेताल बंदीजन को हिंदी का सबसे उद्दण्ड कवि क्यों कहा? 👉 बेताल बंदीजन बड़ी सबल कविता की है ऐसी उद्दंड कविता हिंदी में कोई भी नहीं कर सकता है। गोरेलाल (उपनाम लाल।कवि) के बराबर के उत्तम कविता में उद्दंडता लाने में कोई भी कवि समर्थ नहीं हुआ है। भूषण, हरिकेश, शेखर और लाल कवि यह ...
Read More »मिश्रबन्धुओं ने केशवदास को हिंदी का मिल्टन कहा
🌺 मिश्रबन्धुओं ने केशवदास को हिंदी का मिल्टन क्यो कहा? 👉 क्योंकि मिल्टन और केशवदास दोनों में काफी समानता थी। केशवदास संस्कृत छोड़ कर हिन्दी काव्य करने में कुछ लज्जा – सी बोध करते थे , वैसे ही मिल्टन लैटिन त्याग कर अंग्रेजी में ग्रंथ रचना करने में न्यूनता आवश्यक समझते थे। इन दोनों की अवस्था भी प्रायः बराबर थी। ...
Read More »पुरस्कारों की शुरूआत(puraskaaron ki shurooat)
🌺पुरस्कारों की शुरूआत 🌺 ◆ 1901 :- नोबेल पुरस्कार ◆ 1917 :- पुलित्जर पुरस्कार ◆ 1929 :- ऑस्कर अवार्ड ◆ 1952 :- कलिंग पुरस्कार ◆ 1954 :- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार ◆ 1954 :- भारत रत्न ◆ 1955 :- साहित्य अकादमी पुरस्कार ◆ 1957 :- रेमन मैग्सेसे पुरस्कार ◆ 1958 :- शांति स्वरूप ...
Read More »अष्टछाप के कवियों की ट्रिक( ashtachhaap ke kaviyon ki trick)
🌺अष्टछाप के कवियों की ट्रिक🌺 ⭐ अष्टछाप की स्थापना 1565 में गोस्वामी विट्ठलनाथ द्वारा हुई थी। 🌺 Trick :- वल्लभ की कुभसूर का परमानन्द प्राप्त करने के लिए कृष्ण की भक्ति मे लीन है। ◆ वल्लभाचार्य के शिष्यः- (1)कुंभनदास(उम्र मे सबसे बडे़) (2)सूरदास(प्रसिद्धि मे सबसे बडे़) (3)परमानन्द((सूरदास के बाद वात्सल्य के सबसे बडे़ कवि) (4) कृष्णदास (सर्वाधिक बुद्धिमान) ...
Read More »प्रतीकवाद(prateekavad/symbolism)
🌺 प्रतीकवाद 🌺 ★ प्रतीकवाद की स्थापना :- 1885 ई. में (फ्रांस में, अंग्रेजी साहित्य में बोदलेयर के काव्य-धारा का द्वारा ) ★ प्रतीकवाद के प्रर्वतक :- बोदलेयर ★ प्रतीकवाद का प्रारंभ हुआ:- यथार्थवाद एवं प्रकृतवाद के विरोध में ★ प्रतीकवादी कवि :- बोदलेयर, क्लोदन, वर्लेन,पीट्स, रिम्बोद,एडगर एलन पो, मलार्मे। ★ सर्वप्रथम जोन मोरेआस ने ...
Read More »प्रतीक के उदाहरण(prateek ke udaaharan)
🌺 प्रतीक के उदाहरण🌺 (1.) कमल तुम्हारा दिन है और कुमुद यामिनी तुम्हारी है । कोई निराश क्यों हो आती सबको समान बारी है । (साकेत , मैथिलीशरण गुप्त , प्राकृतिक प्रतीक) ★ यहाँ पर कमल इस समय सुखी का और कुमुद दुःखी का प्रतीक है। (2.) दुलहनी गावहु मंगलचार, हम घरि आए हो राजा ...
Read More »प्रतीक का वर्गीकरण (prateek ka vargeekaran)
🌺 प्रतीक का वर्गीकरण🌺 ★ कुछ विद्वानों के द्वारा प्रतीकों को तीन वर्गों में विभक्त किये है :- 1. परम्परागत प्रतीक :- यह रूढ़ होते है । 2. वैयक्तिक प्रतीक :- किसी विशेष कवि की मानसिकता निहित होती है। 3. प्राकृतिक प्रतीक :- नये युग के अनुरूप निर्मित ★ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने प्रतीकों को दो भेद ...
Read More »प्रतीक की विशेषता(prateek ki visheshata)
🌺 प्रतीक की विशेषता🌺 1. प्रतीक वस्तुतः अप्रस्तुत का स्थापन होता है। 2. प्रतीक में आरोप विषय की प्रमुखता रहती है। 3. प्रतीक अन्योक्ति मूलक होता है। 4. प्रतीक मूर्त और अमूर्त दोनों ही हो सकता है। 5. प्रतीक किसी वस्तु का चित्रांकन नहीं करता अपितु केवल संकेत द्वारा उसकी किसी विशेषता को ध्वनित करता है। 6. कम शब्दों में ...
Read More »प्रतीक शब्द का अर्थ और परिभाषा(prateek shabd ka arth aur paribhasha)
🌺प्रतीक शब्द का अर्थ 🌺 ★ प्रतीक का शाब्दिक अर्थ है– अवयव, अंग, पताका, चिन्ह, निशान। ★ प्रतीक का अर्थ है प्रतिष्ठान अथवा एक वस्तु के लिए किसी अन्य वस्तु की स्थापना । ★ प्रतीक शब्द से अभिप्राय अंग्रेजी के सिम्बल (SYMBOL) शब्द से लिया जाता है। ★ Symbol (सीम्बोल) शब्द ग्रीक भाषा के Symbolon (सीम्बोलन) ...
Read More »बिम्बवाद(bimbavaad/imagism)
🌺 बिम्बवाद 🌺 ★ बिम्ब की चर्चा एडिसन के काल से आरम्भ हो गयी थी। ★ बिम्बसिद्धान्त को शास्त्रीय रूप देने का सर्वप्रथम प्रयास बीसवीं शताब्दी के आरम्भिक दशक में हुआ। ★ बिम्बवाद का उदय आधुनिक काल की घटना है। ★ बिम्बवाद आरम्भ हुआ :- इंगलैंड में पतनोन्मुख रोमांटिक कविता की अति अलंकार प्रधानता के विरोध में ...
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