Author Archives: Puran Mal Kumhar

भक्ति शब्द की उत्पत्ति, परिभाषा और भेद (bhakti shabd ki utpatti, paribhaasha aur bhed)

★ भक्ति शब्द की व्युत्पत्ति :- • भक्ति शब्द संस्कृत के ‘भज्’ सेवायाम् धातु में ‘ क्तिन्’ प्रत्यय लगाने पर बनता है। • जिसका अर्थ ‘सेवा करना’ या ‘भजना’ है, अर्थात् श्रद्धा और प्रेमपूर्वक इष्ट देवता के प्रति आसक्ति। • “भक्ति शब्द की व्युत्पत्ति ‘भज्’ से की जा सकती है”।(भज् का अर्थ :- भाग लेना)【 मोनियर विलियम के अनुसार】 • भक्ति शब्द का ...

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अंधेरे में कविता का सारांश(kavita mein kavita ka saraansh)

• रचयिता :- मुक्तिबोध • लंबी कविता • मुक्तिबोध की अंतिम कविता • लिखी गयी :- 1952 से 1962 के बीच, अंतिम संशोधन 1962 में • पहला प्रकाशन :- आशंका के द्वीप अंधेरे में, शीर्षक से कल्पना पत्रिका में, नवंबर 1964 में • काव्य नायक (दो नायक) :- (1.) काव्य नायक :- में (2.) स्वप्न का नायक :- अन्य • ...

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रस का स्वरूप(ras ka svarup)

• रस अखंड है। • रस स्वप्रकाशानंद है। • रस चिन्मय है। • रस सचेतन अथवा प्राणवान् आनंद है। • रस अपने आकर से अभिन्न है। • रस वेद्यान्तर स्पर्शशून्य है • रस (काव्यास्वाद) को ब्रह्मास्वाद न कहकर उसका सहोदर कहा जाता है। • रस लोकोत्तर चमत्कार का प्राण है। • रस अपने आकार से अभिन्न रूप से आस्वादित किया ...

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काव्य हेतु(kavy hetu)

◆ हेतु का शाब्दिक अर्थ :- कारण ◆ काव्य हेतु का अर्थ :- जिनके के कारण काव्य का सृजन होता है। ◆ काव्य हेतु की परिभाषा :- काव्य रचना का सामर्थ्य उत्पन्न कर देने वाले कारण ही काव्य हेतु कहलाते है। ◆ काव्य हेतु के भेद :- 3 1. प्रतिभा 2. व्युत्पत्ति 3. अभ्यास ■ प्रतिभा,व्युत्पत्ति और अभ्यास मानने वाले ...

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भारतीय काव्यशास्त्र आर्चाय का क्रम(जन्म के अनुसार),bharatiy kavyashastree archee ka kram(janm ke anusaar)

◆आचार्य का शताब्दी वर्ष 【सम संख्या में 】   ◆ आचार्य का शताब्दी वर्ष 【 विषम संख्या में 】 ◆ शॉर्ट ट्रिक्सः- • भरतमुनि के भाग का दंड वामन को मिला। भरतमुनि (2वीं), भा – भामह (6वीं), दंड – दण्डी (7 वीं) वामन (8वीं)   • राज्य का आनंद शंका और रौद्र से नहीं अनुभव या उद्भव से होता है। 【9वीं】 ...

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हिन्दी भाषा के संबंध में विद्वानों के कथन(hindi bhasha ke sambandh me vidvano ke kathan)

हिन्दी भाषा

• अंग्रेजी सीखकर जिन्होंने विशिष्टता प्राप्त की है, सर्वसाधारण के साथ उनके मत का मेल नहीं होता। हमारे देश में सबसे बढ़कर जातिभेद वही है, श्रेणियों में परस्पर अस्पृश्यता इसी का नाम है।”                     रवीन्द्रनाथ ठाकुर • “भारतवर्ष में सभी विद्याएं सम्मिलित परिवार के समान पारस्परिक सद्भाव लेकर रहती आई हैं।”    ...

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महाभोज उपन्यास का सारांश ,पात्र परिचय और कथन(mahabhoj upanyas ka saraansh, patr parichay aur kathan)

• प्रकाशन :- 1979 ई. • 9 परिच्छेदों में • कुल पृष्ठ :- 183 • कुल पात्र:- 35 • राजनीतिक पृष्ठभूमि पर आधारित उपन्यास • 1976 ई.के चुनाव पद्धतियों पर आधारित उपन्यास • महाभोज उपन्यास के बीज मन्नू भंडारी की ‘अलगाव'[त्रिशंकु,1978 ई. कहानी संग्रह में] कहानी में विद्यमान है। • मन्नु भंडारी ने महाभोज उपन्यास का नाटक रूपांतरित(1983ई.) भी किया। ...

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हिन्दी के प्रमुख कवियों के उपनाम(hindi ke pramukh kaviyon ke upanam)

1.       क्रम संख्या       कवि                  उपनाम 2.              स्वयंभू      अपभ्रंश का वाल्मीकि      अपभ्रंश का कालिदास      (डॉ.भयाणी के अनुसार) 3.         पुष्पदंत अपभ्रंश का भवभूति (शिवसिंह सेगंर के अनुसार) अभिमान मेरु (पुष्पदंत ने स्वयं को कहा) 4.         कबीर की भाषा भाषा का ...

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लम्बी कविताएं (Long poems)

क्र.सं लम्बी कविताएं कवि 1.         संशय की लम्बी रात (नाट्य शैली पर रचित) नरेश मेहता 2.         समय देवता (मेरा समर्पित एकांत काव्य संग्रह से ) नरेश मेहता 3.         राम की शक्ति पूजा (अनामि का काव्य संग्रह से) निराला 4.         नेवला (कारागार के सर्न्दभ में) त्रिलोचन 5.         पतंग (दुनिया रोज बनती है काव्य संग्रह से ) ...

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हिन्दी की प्रमुख पत्र – पत्रिकाओं का परिचय(hindi ki pramukh patr – patrikaon ka parichay)

◆ सर्वप्रथम भारत में प्रिंटिग प्रेस लाने का श्रेय पुर्तग़ालियों को दिया जाता है। ◆ भारत में सबसे पहले प्रेस :- गोवा में (जनवरी,1556 -57 ई.) (यह प्रेस पुर्तगाल से अबीसीनिया के लिए भेजा गया था। उन दिनों में स्वेज नहर नहीं बनी थी और अबीसीनिया के लिए भारत होकर जाना पड़ता था। अबीसीनिया के लिए मनोनीत पेट्रिआर्क प्रेस के ...

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हिंदी साहित्य में सरस्वती पत्रिका का योगदान(hindi sahity me sarasvati patrika ka yogadan)

★ सरस्वती पत्रिका कालिदास के इस वाक्य का उद्घोष करती है :- ” सरस्वती श्रुति महत्ती न हीयताम् “ ★ 1900 ई. में चिंतामणि घोष के द्वारा, इलाहाबाद से ★ इंडियन प्रेस(इलाहाबाद) के अध्यक्ष :- चिंतामणि घोष ★ मासिक पत्रिका ★ चिंतामणि घोष ने अगस्त 1899 ई. में नागरी प्रचारिणी सभा(काशी) से अनुरोध किया कि सचित्र हिंदी मासिक पत्रिका सरस्वती ...

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दादू दयाल का जीवन परिचय(dadoo dayal ka jeevan parichay)

💐जन्म 💐 • जन्म:- फागुन सुदी बृहस्पतिवार संवत् 1601 ( सन् 1544ई.) • जन्म :- 1544 ई. ( डॉ. बडथ्याल, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, आचार्य परशुराम चतुर्वेदी और नगेंद्र के अनुसार) • जन्म स्थान:- अहमदाबाद (गुजरात) 💐मृत्यु 💐 • मृत्यु :- जेठ सदी आठ शनिवार संवत् 1660 (सन् 1603 ई.) • शरीर छोड़ा :- भराने(जयपुर) स्थान पर   💐जाति 💐 ◆ ...

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आदिकाल का नामकरण( aadikal kal namakaran)

आदिकाल को हिंदी में “आरम्भिक काल” भी कहा जाता है। यह समय की एक अवधि है जो मानव इतिहास के प्रारंभिक दौर को संकेतित करती है। आदिकाल की अवधि में मानव समाज की विकास की शुरुआत होती है, जिसमें लोग चिकित्सा, खेल, कला, और धर्म के क्षेत्र में उत्साही रहते हैं। यह काल कई नामों से जाना जाता है, जैसे ...

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गैंग्रीन / रोज़ कहानी(gaingreen/roz kahani)

• कथाकार :- अज्ञेय • कहानी का संकलन :- विपथगा कहानी संग्रह में • प्रकाशन :- 1990 में, (नेशनल पब्लिशिंग हॉउस, दिल्ली से ) • इस कहानी सर्वप्रथम गैंग्रीन नाम से प्रकाशित हुआ लेकिन बाद में इसका शीर्षक बदलकर रोज़ कर दिया। • कहानी तीन भागों में ★ प्रथम भाग में :- मालती की बाह्य स्थिति   ★ दूसरे भाग में :- मालती के मनः स्थिति का चित्रण ★ ...

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हिंदी के कवियों की जन्म सन् (शॉर्ट ट्रिक)

◆ विद्या रैदास की और  कबीर का धर्म कुंभनदास के गुरु ने दिये। 1. विद्यापति – 1380 ई. 2. रैदास – 1388 ई. ( डॉ. रामकुमार वर्मा के अनुसार) 3. कबीर दास – 1398 ई. 4. धर्मदास – 1418 ई. 5. कुंभनदास – 1468 ई. 6. गुरूनानक – 1469 ई. ◆ सूर परमानंद प्राप्त करने के लिए जासी कृष्णा एवं ...

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