• नाथ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अर्थवेद तथा तैतिरीय ब्राह्मण में मिलता है। • अर्थवेद तथा तैतिरीय ब्राह्मण में नाथ का अर्थ शरणदाता है। • नाथ शब्द का अर्थ(आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के द्वारा ) ‘ना’का अर्थ -अनादि रूप ‘थ’का अर्थ– स्थापित होना • नाथ पंथ के चरमोत्कर्ष का समय – 12वीं शताब्दी से 14वीं शताब्दी के अंत तक ( ...
Read More »इतिहास
जैन साहित्य(jain sahity)
• कर्मकाण्डो से परे ,जाति वर्ण भेद से परे सबको मुक्ति का अधिकार प्राप्त करने का सन्देश जैन धर्म देता है। उत्तर भारत मे जैन धर्म के अनुयायी सर्वत्र ही है किन्तु 8वीं से 13वीं शती तक गुजरात मे जैन धर्म का व्यापक प्रभाव था। • जैन सबसे ज्यादा :– गुजरात और राजस्थान में • इनकी रचना की भाषा :- ...
Read More »भविस्सयत्त कहा( कथा) का परिचय(bhavissayatt kaha( katha) ka parichay)
• भविस्सयत कथा अपभ्रंश के कथाओं में प्रसिद्ध ग्रंथ है । • रचयिता – धनपाल • धनपाल का परिचय :- ◆ धक्कड नामक वैश्य वंश में जन्म । ◆ पिता का नाम – माएसर (मातेश्वर) ◆ माता का नाम – धनश्री ◆ धनपाल को सरस्वती का वर प्राप्त हुआ। ◆ यह जैन धर्म के दिगंबर संप्रदाय के अनुयायी थे। • ...
Read More »प्रबंध चिंतामणि(prabandh chintamani) का परिचय
प्रबंध चिंतामणि • 1304ई. में संस्कृत भाषा में जैन आचार्य मेरुतुंग द्वारा रचित है।(डॉ . बच्चन सिंह के अनुसार) मेरुतुंग का परिचय • नागेंद्र गच्छ के आचार्य • गुरु का नाम – चंद्रप्रभ सुरी • प्रधान शिष्य – गुणचंद्र • अन्य प्रमुख ग्रंथ – महापुरुष चरित (इस ग्रंथ में ऋषभदेव,शांतिनाथ,नेमिनाथ,पार्श्वनाथ और महावीर इस प्रकार पांच तीर्थंकरों का संक्षिप्त चरित ...
Read More »भरतेश्वर बाहुबली रास का परिचय(जैन साहित्य की रास परपंरा का प्रथम ग्रंथ)
भरतेश्वर बाहुबली रास(जैन साहित्य की रास परपंरा का प्रथम ग्रंथ) • रचयिता – शालिभद्रसुरी (भीमदेव द्वितीय के समय पाटण में हुए थे।) • रचना समय – 1185ई. में • रचना तिथि – संवत् 1231(मुनिजिन विजय के अनुसार) • 205 छन्दों में रचित। • खंडकाव्य • वीर रस प्रधान और अंत में शांत रस • 203 कड़ियां में रचित। • शालिभद्रसुरी ...
Read More »श्रावकाचार का परिचय {shravakachar ka parichay}
श्रावकाचार:- • दिगम्बर जैन आचार्य देवसेन द्वारा कृत • समय 933ई. या सवंत् 990 • इसमें 250 दोहों में श्रावक धर्म का वर्णन। • गृहस्थ धर्म श्रावक धर्म का वर्णन केन्द्र है। • इसमें साहित्यिक तत्वों का अभाव है। • भाषा – अपभ्रंश • पंक्ति – जो जिण सासण भाषियउ सो मइ कहियउ सारु। जो पालइ सइ भाउ करि सो ...
Read More »हिन्दी साहित्य की पद्धतियां(hindi sahity ki paddhatiyan)
हिन्दी साहित्य की पद्धतियां :- 1. वर्णानुक्रमी पद्धति:- यह वर्णो पर आधारित है।गार्सा द तासी एवं शिवसिंह सेंगर इसी पद्धति पर आधारित है। इसमें कवियों का वर्णन नाम के वर्णानुसार किया जाता है।अतः इसमें कवियों के जीवन परिचय के बारे में जानकारी तो मिलती है किन्तु साहित्य प्रवृत्तियों की उपेक्षा हो जाती है। (क) गार्सा द तासी:- ◆ ग्रन्थ – ...
Read More »आलवार भक्त(aalavar bhakt)
?आलवार भक्त(aalavar bhakt)? ?आलवार भक्तों की संख्याः- 12 ?आलवार भक्तों की शॉर्टट्रिक :– सभूमधुरकविकुलमुनिविष्णु से मिलकर भक्ति करने का शगोदा को भ्रान्त होता है परन्तु भक्ताघ्रिरेण को पता नही रहता है। (1) सरोयोगी (स) (2) भूतयोगी (भू) (3)मधुर कवि (मधुर) (4) कुल शेखर (कविकुल) :- रामोपासक (5) मुनिवाहन(मुनि) (6) विष्णुचित (विष्णु):- रामोपासक (7) भक्तिसार(भक्ति) (8) शठकोप या नक्मालवार(श) :-रामोपासक (9) ...
Read More »सिद्ध साहित्य का सम्पूर्ण परिचय(siddh sahity ka sampoorn parichay)
सिद्ध साहित्य का समय:– 8 वीं शताब्दी से 13 वीं शताब्दी तक। [ ] सिद्ध साहित्य का कार्यक्षेत्र :- • बंगाल, असम, उड़ीसा बिहार ।(डॉ. नगेन्द्र के अनुसार) • जालंधर, ओडियान,अर्बुद,पूर्वगिरी ,कामरूप। ( प्रकाश बगीची के अनुसार ) • ओडियान, पूर्णगिरि ,कामाख्या (साधनमाला में) [ ] सिद्ध साधना के केंद्र :- • नालंदा विश्वविद्यालय(बिहार के राजगीर जिले में, • स्थापना ...
Read More »गोरखनाथ का जीवन परिचय(gorakhanath ka jeevan parichay)
?गोरखनाथ का जीवन परिचय ? ?समय – 845ई. (राहुल सांकृत्यायन के अनुसार) ?नौवीं शती( आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार) ? 13वीं शती (आचार्य रामचंद्र शुक्ल ...
Read More »सरहपा का जीवन परिचय(sarahpa ka jeevan parichay)
?सरहपा का जीवन परिचय(sarahpa ka jeevan parichay)? ?सरहपा का समय :- 769 ई. या आठवीं शताब्दी में (राहुल सांस्कृत्यायन के अनुसार) ? सरहपा की जाति ब्राह्मण थी। ? सरहपा का जन्म :- पूर्व भारत के राज्ञी नामक नगरी में (सुम्पम्खन के अनुसार) ? उड़ीसा( तिब्बती ...
Read More »दलित साहित्य का विस्तार से वर्णन[dalit sahity ka vistar se varnan]
[ ] दलित शब्द का अर्थ :- • दलित शब्द की उत्पत्ति संस्कृत धातु रूप ‘दल’से हुई। जिसका अर्थ – तोड़ना, कुचलना । • दलित शब्द का पर्यायवाची :- दबा हुआ या जिसको दबाया गया हो । • मानक हिंदी कोश के अनुसार दलित शब्द का अर्थ:- जो दबाया गया हो। • हिंदी विश्वकोश के अनुसार :- दलित का अर्थ ...
Read More »साठोत्तरी कविता की विशेषताएं और धूमिल saathottari kavita ki visheshataen aur dhoomil
? साठोत्तरी कविताओं की प्रवृत्तियां/विशेषताएं ? ? साठोत्तरी कविता का साधारण अर्थ :- सन् 1960 के बाद की कविता। ? साठोत्तरी कविता का तात्पर्य :- केवल के बाद की कविता से नहीं है बल्कि यह एक विशेष तेवर वाली ...
Read More »नई कविताओं की प्रवृत्तियां( naee kavitayo ki pravatiya)
?नई कविताओं की प्रवृत्तियां( naee kavitayo ki pravatiya)? 1. मानव मूल्य की विघटन की पुकार । 2. नव मानव की कल्पना। 3. आस्था – अनास्था का मिश्रण । 4. मानव लघुता और गरिमा का उल्लेख। 5. कवि का खंडित व्यक्तित्व। 6. काव्य भाषा- बातचीत की भाषा । 7. लघु कविता शैली- दो,तीन, चार पंक्तियों में समाप्त होने वाली लघु कविताएं ...
Read More »प्रयोगवादी काव्य की प्रवृत्तियां( prayogavadi kavy ki pravatiya)
?प्रयोगवादी काव्य की प्रवृत्तियां? ?प्रयोगवाद की जन्मदात्री पत्रिका – तार सप्तक ? प्रयोगवाद को सर्वाधिक प्रभावित करने वाले:- अस्तित्ववाद 1. गहन वैयक्तिकता। 2. अतिशय बौद्धिकता। 3. व्यापक अनास्था की भावना। 4. आस्था तथा भविष्य के प्रति विश्वास। 5. सामाजिक यथार्थवाद। 6. क्षणवाद। 7. श्रृंगार का उन्मुक्त चित्रण। 8. कुंठा और निराशा का ...
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