Tag Archives: बहुत दिनन को अवधि आसपास परै व्याख्या

घनानंद के कवित्त और सवैया व्याख्या: अंतरा भाग-2(ghananand ke kavitt aur savaiya ki vyakhya)

घनानंद के कवित्त और सवैया व्याख्या: अंतरा भाग-2(ghananand ke kavitt aur savaiya ki vyakhya) रीतिकाल की रीतिमुक्त (स्वच्छंद) काव्यधारा के मूर्धन्य कवि और ‘प्रेम के पीर’ के अमर गायक घनानंद की अंतरा (भाग-2) में संकलित रचनाओं—कवित्त (1 व 2) और सवैया—का संदर्भ, प्रसंग, सप्रसंग व्याख्या, भावार्थ एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ रचनाकार: महाकवि घनानंद काव्यधारा: रीतिकाल (रीतिमुक्त/स्वच्छंद काव्यधारा) भाषा: शुद्ध, ...

Read More »
error: Content is protected !!