Tag Archives: abhivyakti aur madhyam class 11 12

कार्यालय ज्ञापन (O.M.) तथा सामान्य ज्ञापन में अंतर(karyalay gyapan atha samanya gyapan mein antar)

कार्यालय ज्ञापन (O.M.) तथा सामान्य ज्ञापन में अंतर प्रशासनिक पत्राचार में ‘कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum)’ और ‘सामान्य ज्ञापन (Memorandum / Memo)’ दोनों ही ज्ञापन श्रेणी के प्रारूप हैं, किन्तु इनके प्रयोग क्षेत्र, उद्देश्य और प्रेषिती (पाने वाले) में स्पष्ट अंतर होता है। 1. प्रेषण क्षेत्र और अंतर-विभागीय संबंध (Scope & Relation) कार्यालय ज्ञापन : इसका प्रयोग मुख्य रूप से अंतर-मंत्रालयी ...

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विज्ञप्ति और प्रेस विज्ञप्ति में अंतर(vigyapti aur press vigyapti mein antar)

विज्ञप्ति और प्रेस विज्ञप्ति में अंतर विज्ञप्ति (Notification / Press Note) और प्रेस विज्ञप्ति (Press Release) दोनों ही सूचना-प्रसारण के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। सामान्यतः दोनों को एक जैसा मान लिया जाता है, लेकिन इनके उद्देश्य, प्रेषित करने के तरीके और लक्षित पाठक वर्ग में स्पष्ट अंतर होता है। 1. मूल प्रकृति और उद्देश्य : विज्ञप्ति (Notification / Press Note) : ...

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नाटक या पटकथा के लिए दृश्यों (Scenes) को लिखते समय महत्वपूर्ण बातें

नाटक या पटकथा के लिए दृश्यों (Scenes) को लिखते समय महत्वपूर्ण बातें 1. स्थान और समय का स्पष्ट उल्लेख (Scene Heading) : प्रत्येक दृश्य की शुरुआत में यह स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए कि घटना कहाँ घटित हो रही है और समय क्या है। इसे तकनीकी भाषा में ‘हेडिंग’ या ‘स्लगलाइन’ कहते हैं; जैसे: दृश्य 1: स्थान – घर ...

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पत्रकारीय लेखन(patrkariy lekh)

पत्रकारीय लेखन 1. पत्रकारीय लेखन क्या है और इसकी परिभाषा अर्थ : पत्रकारीय लेखन से तात्पर्य ऐसे लेखन से है, जो समसामयिक घटनाओं, मुद्दों, सूचनाओं और विचारों को समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, रेडियो, टीवी या डिजिटल माध्यमों के जरिए पाठकों या दर्शकों तक पहुँचाने के लिए किया जाता है। परिभाषा : “पत्रकारीय लेखन वह जनसंचार-उन्मुख लेखन है, जिसके अंतर्गत पाठकों या ...

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पत्रकारीय लेखन को प्रभावी सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें

पत्रकारीय लेखन को प्रभावी, सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें 1. सरल और स्पष्ट भाषा : कठिन, अलंकृत या अप्रचलित शब्दों की जगह आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग करें। 2. तथ्यपरकता और सटीकता : लेखन में केवल प्रामाणिक और जांचे गए तथ्यों को ही शामिल करें। 3. निष्पक्षता : समाचार में किसी भी प्रकार ...

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इंटरनेट पत्रकारिता में प्रमुख साइटें और उनका इतिहास

इंटरनेट पत्रकारिता में प्रमुख साइटें और उनका इतिहास इंटरनेट पत्रकारिता के विकास के साथ अनेक समाचार वेबसाइट, न्यूज़ पोर्टल और डिजिटल प्लेटफॉर्म अस्तित्व में आए। भारत में इसका विकास 1990 के दशक के मध्य से तेज़ हुआ। 1. विश्व में इंटरनेट पत्रकारिता की प्रमुख साइटें The New York Times — अपने समाचारों को इंटरनेट पर उपलब्ध कराने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ...

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संपादकीय और स्तंभ लेखन(sanskaran aur stambh lekhan)

संपादकीय और स्तंभ लेखन अखबार में विचारपरक लेखन के दो महत्वपूर्ण रूप हैं – संपादकीय और स्तंभ लेखन। दोनों में किसी विषय पर विचार और विश्लेषण प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन इनके लेखक, उद्देश्य और प्रस्तुति में महत्वपूर्ण अंतर होता है। 1. संपादकीय लेखन परिभाषा : संपादकीय अखबार का वह विचारपरक लेख है, जिसमें किसी महत्वपूर्ण समसामयिक, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक ...

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कहानी का नाट्य रूपांतरण करने की प्रक्रिया(kahani ka natya rupantaran karne ki prakriya)

 कहानी का नाट्य रूपांतरण करने की प्रक्रिया (किस प्रकार किया जाता है) कहानी को नाटक में रूपांतरित करना एक कलात्मक और तकनीकी प्रक्रिया है। इसके मुख्य चरण निम्नलिखित हैं: कथानक को दृश्यों में विभाजित करना (Scene Breakdown): कहानी के घटनाक्रम का सूक्ष्म अध्ययन करके उसे अलग-अलग दृश्यों (Scenes) में बाँटा जाता है। स्थान और समय (Location & Time) के परिवर्तन ...

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साक्षात्कार (Interview) लेने की महत्वपूर्ण बातें

साक्षात्कार (Interview) लेने की 10 महत्वपूर्ण बातें पत्रकारिता और विशेष लेखन में एक सफल और प्रभावी साक्षात्कार लेने के लिए निम्नलिखित 10 प्रमुख बिंदुओं का ध्यान रखना आवश्यक है: 1. स्पष्ट उद्देश्य और ढाँचा साक्षात्कार शुरू करने से पहले उसका उद्देश्य (Goal) पूरी तरह स्पष्ट होना चाहिए कि आप साक्षातकर्ता (साक्षात्कार देने वाले व्यक्ति) से क्या जानकारी या दृष्टिकोण निकलवाना ...

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कहानी का नाट्य रूपांतरण (Adapting a Story into a Play)

कहानी का नाट्य रूपांतरण (Adapting a Story into a Play)  परिभाषा / परिचय: कहानी का नाट्य रूपांतरण (Adapting a Story into a Play) साहित्य की एक विधा (पाठ्य/श्रव्य) को दूसरी विधा (दृश्य/रंगमंच) में बदलने की एक कलात्मक प्रक्रिया है। कहानी मुख्यतः पढ़ने या सुनने के लिए होती है, जबकि नाटक को मंच पर अभिनेताओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। कहानी ...

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6 ककार (Six Ws and H)

6 ककार (Six Ws and H) समाचार लेखन और पत्रकारिता की रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। किसी भी घटना को पूर्ण, प्रामाणिक और स्पष्ट समाचार का रूप देने के लिए इन 6 प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य होता है। हिंदी पत्रकारिता में इन छहों प्रश्नों की शुरुआत ‘क’ अक्षर से होती है, इसीलिए इन्हें ‘6 ककार’ कहा जाता है। ...

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उल्टा पिरामिड शैली(vargikaran pyramid shaili)

उल्टा पिरामिड शैली (Inverted Pyramid Style) समाचार लेखन की सबसे लोकप्रिय, प्रामाणिक और मानक शैली है। प्रिंट मीडिया (समाचार पत्र), रेडियो, टीवी और इंटरनेट (वेब पत्रकारिता)—सभी माध्यमों में समाचार इसी शैली में लिखे जाते हैं। इसे ‘उल्टा पिरामिड’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें सूचनाओं का क्रम सामान्य कहानियों या निबंधों से बिल्कुल विपरीत (उल्टा) होता है। 1. उल्टा पिरामिड ...

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इंटरनेट की विशेषताएं और कमियां(internet ki visheshtayen aur kamiyan)

इंटरनेट माध्यम का इतिहास (History of Internet Media) इंटरनेट को जनसंचार का न्यू मीडिया (New Media) या डिजिटल मीडिया भी कहा जाता है। यह जनसंचार के सभी पारंपरिक माध्यमों (प्रिंट, रेडियो, टीवी) का एक एकीकृत (Integrated) रूप है। वैश्विक शुरुआत (1969): इंटरनेट की शुरुआत अमेरिकी रक्षा विभाग की एक परियोजना ARPANET (Advanced Research Projects Agency Network) से हुई। 1989 में ...

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रेडियो श्रव्य माध्यम का इतिहास और विशेषताएं – कमियां

रेडियो (श्रव्य माध्यम) का इतिहास रेडियो जनसंचार का एक अत्यंत सशक्त, सुलभ और लोकप्रिय श्रव्य (Audio) माध्यम है। इसका इतिहास वैज्ञानिक प्रयोगों से शुरू होकर विश्व के कोने-कोने तक सूचना और मनोरंजन पहुँचाने का माध्यम बनने तक फैला हुआ है: वैज्ञानिकी नींव (19वीं सदी का अंत): 1895 में इटली के वैज्ञानिक गुग्लिएल्मो मार्कोनी (Guglielmo Marconi) ने बेतार (Wireless) तरंगों के ...

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टेलीविजन (दूरदर्शन) दृश्य और श्रव्य माध्यम का इतिहास और विशेषताएं – कमियां

टीवी माध्यम का इतिहास (History of Television Media) टेलीविजन (दूरदर्शन) दृश्य और श्रव्य (Visual & Audio) का एक शक्तिशाली माध्यम है। इसका इतिहास वैज्ञानिक आविष्कारों से लेकर वैश्विक जनसंचार का मुख्य आधार बनने तक का सफर है: आधुनिक टीवी का आविष्कार (1920 का दशक): स्कॉटलैंड के इंजीनियर जॉन लोगी बेयर्ड (John Logie Baird) ने 1926 में पहली बार मैकेनिकल टेलीविजन ...

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