Tag Archives: abhivyakti aur madhyam class 11 12

भारत में हिंदी पत्रकारिता का विकास(bharat mein hindi patrakarita ka vikas)

भारत में हिंदी पत्रकारिता का इतिहास केवल समाचार देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक सुधार और साहित्यिक चेतना का मुख्य आधार रहा है। 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा कोलकाता से प्रकाशित ‘उदन्त मार्तण्ड’ (साप्ताहिक) को हिंदी का पहला समाचार पत्र माना जाता है। इसी कारण प्रतिवर्ष 30 मई को ‘हिंदी ...

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प्रिंट माध्यम का इतिहास और विशेषताएं – कमियां(print madhyam ka itihaas aur visheshta – kamiyan()

प्रिंट माध्यम का इतिहास (History of Print Media) प्रिंट माध्यम जनसंचार का सबसे पुराना और बुनियादी आधार है। इसका इतिहास मानव सभ्यता में विचारों को स्थायी रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क्रांति रहा है: शुरुआत (चीन): दुनिया में मुद्रण (Printing) की शुरुआत सबसे पहले चीन में हुई, जहाँ लकड़ी के ब्लॉक (Woodblock printing) से छपाई की जाती थी। ...

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पत्रकारीय की परिभाषा और प्रकार(patrkariy ki paribhasha aur prakar)

पत्रकारीय लेखन जनसंचार माध्यमों का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह सामान्य साहित्यिक लेखन से काफी भिन्न होता है क्योंकि इसका सीधा संबंध वास्तविक घटनाओं, आंकड़ों और समय-सीमा से होता है। पत्रकारीय लेखन क्या है और इसकी परिभाषा अर्थ: पत्रकारीय लेखन से तात्पर्य ऐसे लेखन से है, जो समसामयिक घटनाओं, मुद्दों, सूचनाओं और विचारों को समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, रेडियो, टीवी या ...

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फीचर लिखने के लिए ध्यान रखने योग्य प्रमुख बिंदु(feature likhne ke liye dhyan rakhne yogya pramukh bindu)

फीचर लेखन (Feature Writing) एक सुव्यवस्थित, सृजनात्मक और आत्मनिष्ठ लेखन है, जिसका उद्देश्य पाठकों को सूचना देने के साथ-साथ उनका मनोरंजन करना होता है। एक प्रभावी फीचर लिखने के लिए ध्यान रखने योग्य 15 प्रमुख बिंदु: आकर्षक विषय का चयन: ऐसा विषय चुनें जो समसामयिक हो, जनरुचि से जुड़ा हो और जिसमें मानवीय संवेदना या नयापन हो। कैची और रोचक ...

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रेडियो नाटक विकास का इतिहास(radio natak vikas ka itihas)

रेडियो नाटक का विकास 20वीं शताब्दी में रेडियो प्रसारण तकनीक के आगमन के साथ हुआ। यह एक ऐसी नाट्य विधा है जो पूर्णतः श्रव्य (Audio) माध्यम पर आधारित होती है, जहाँ दृश्य के स्थान पर शब्द, ध्वनि प्रभाव (Sound Effects), और पृष्ठभूमि संगीत का सहारा लिया जाता है। 1. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रेडियो नाटक का इतिहास प्रारंभिक दौर (1920 का ...

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रेडियो नाटक के प्रकार(radio natak ke prakar)

                 रेडियो नाटक के प्रकार रेडियो नाटक अपनी विषय-वस्तु, प्रस्तुति शैली और अवधि के आधार पर विभिन्न प्रकारों में विभाजित किए जाते हैं।विषय-वस्तु और शैली के आधार पर मुख्य प्रकार: सामाजिक रेडियो नाटक: समाज में व्याप्त कुरीतियों, समस्याओं, पारिवारिक संबंधों और जीवन के विविध आयामों पर आधारित होते हैं। उदाहरण: दहेज प्रथा, शिक्षा, ...

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रेडियो नाटक के प्रमुख तत्व और विशेषताएँ(radio natak ke pramukh tatv aur visheshtayen)

रेडियो नाटक एक ऐसी नाट्य विधा है जो पूर्णतः श्रव्य (Audio) माध्यम पर आधारित होती है। इसमें रंगमंच या दृश्य नाटकों की तरह मंच, वेशभूषा, प्रकाश (Lighting) और अभिनय को आँखों से नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसे केवल कानों से सुनकर समझा और महसूस किया जाता है। रेडियो नाटक के प्रमुख तत्व ध्वनि और संवाद (Dialogues): रेडियो नाटक का ...

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अखबार के लेआउट और पृष्ठ संरचना के अनुसार विचारपरक लेखन

अखबार के मध्य पृष्ठों (मुख्यतः पृष्ठ 6, 8 या 9) पर केंद्रित ‘विचार’ या ‘संपादकीय’ (Editorial Page) और ‘ओप-एड’ (Op-Ed Page) पन्नों पर सभी प्रकार का विचारपरक लेखन प्रकाशित होता है। अखबार के लेआउट और पृष्ठ संरचना के अनुसार विचारपरक लेखन की सटीक स्थिति और विवरण नीचे दिया गया है: 1. संपादकीय और टिप्पणियाँ (Editorial & Brief Comments) स्थिति: संपादकीय ...

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पत्रकारिता में विशेषज्ञता (Specialization in Journalism)

पत्रकारिता में विशेषज्ञता (Specialization in Journalism) पत्रकारिता में विशेषज्ञता का अर्थ है—किसी सामान्य पत्रकार या बीट रिपोर्टर की तरह केवल खबरों की सतही या बुनियादी जानकारी प्रस्तुत करने के बजाय, किसी एक विशिष्ट क्षेत्र (जैसे—अर्थशास्त्र, खेल, विज्ञान, राजनीति, कानून या पर्यावरण) का गहरा, व्यापक और व्यावहारिक ज्ञान होना। जब कोई पत्रकार किसी विशेष विषय की बारीकियों, उसकी विशेष शब्दावली, इतिहास ...

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विशेष रिपोर्ट (Special Report) कैसे लिखें(vishesh report (Special Report) kaise likhen)

विशेष रिपोर्ट (Special Report) कैसे लिखें विशेष रिपोर्ट किसी घटना, समस्या या विषय की केवल सामान्य सूचना नहीं देती, बल्कि उसकी तह तक जाकर तथ्यों की खोज, विश्लेषण और उसके कारणों-प्रभावों को सामने लाती है। इसे लिखने के लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया का पालन करना होता है। विशेष रिपोर्ट लिखने के मुख्य चरण (प्रक्रिया) विषय का चयन और उद्देश्य निर्धारण: ...

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विशेष लेखन के प्रमुख क्षेत्र(vishesh lekhan ke pramukh kshetra)

                              विशेष लेखन के प्रमुख क्षेत्र विशेष लेखन का दायरा केवल खबरों की सीधी जानकारी तक सीमित न होकर समाज, अर्थव्यवस्था, ज्ञान-विज्ञान और संस्कृति के हर महत्वपूर्ण पहलू तक फैला हुआ है। मीडिया संस्थानों में इन क्षेत्रों के लिए अलग-अलग डेस्क और विशेषज्ञ पत्रकार (विशेष संवाददाता) ...

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