• रचनाकार – ज्योतिरीश्वर ठाकुर(13वी शताब्दी) • रचनाकाल – 14 वीं शताब्दी का पूर्वाद्धर् ( सुनीति कुमार के अनुसार) • आठ कल्लोलो (अध्यायों में) • मैथिली का विश्वकोश • मैथिली गद्य की सर्वप्रथम रचना • इसमे लेखक ने हिन्दू दरबार और भारतीय जीवन का यथार्थ चित्रण किया गया है। • इसमें कुल 8 कल्लोल है:- नगर वर्णन,नायक का वर्णन,आस्थान वर्णन,ऋतु ...
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उक्तिव्यक्तिप्रकरण(Uktivyaktiprakaraṇa) का परिचय
• रचनाकार – महाराज गोविन्दचन्द्र (शासनकाल 1154ई.) के सभा पं.दामोदर शर्मा • 12वी शताब्दी • अपूर्ण ग्रंन्थ • भाषा:- अपभ्रंश भाषा • भाषा सिखाने के हेतु(दामोदर शर्मा ने राजकुमारों को शिक्षा देने के लिए इस ग्रंथ की रचना की।) • राजकुमारों को स्थानीय भाषा का ज्ञान कराने के लिए इसे लिखा गया। • उक्ति शब्द की व्याख्या करते हुए मुनि ...
Read More »आधुनिक काल का नामकरण(aadhunik kal ka namakaran)
आधुनिक काल के नामकरण में कुछ संदर्भात्मक तिथियाँ हो सकती हैं, लेकिन आमतौर पर, इसे किसी ऐतिहासिक घटना या विचारधारा के साथ जोड़ा जाता है जो एक समान या स्थायी चरित्रिक बदलाव का प्रतीक होता है। हिंदी साहित्य में, आधुनिक काल का नामकरण अक्सर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उत्तरार्ध में होता है, जिसकी सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक दृष्टि से ...
Read More »रासो शब्द की उत्पत्ति( raaso shabd ki utpatti)
“रासो” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत साहित्य से जुड़ी है। यह शब्द “रस” (महसूसी अनुभव या भावना) से निकला है, जो साहित्यिक काव्य और नाट्य शास्त्र में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। “रासो” का उपयोग भारतीय साहित्य और नृत्य के संदर्भ में किया जाता है, विशेष रूप से कृष्ण लीला के सांस्कृतिक और धार्मिक कथाओं के लिए। “रास” के रूप और आयाम ...
Read More »साहित्य अकादमी(sahitya akadami) पुरस्कारों की शार्ट ट्रिक
[ ] साहित्य अकादमी में सम्बन्ध में जानकारी :- • भारत में साहित्य की राष्ट्रीय संस्था की स्थापना का प्रस्ताव विचाराधीन था। • भारत सरकार ने रॉयल एशियाटिक सोसायटी ऑफ़ बंगाल का साहित्य की राष्ट्रीय संस्था की स्थापना का प्रस्ताव 1944 में। • साहित्य अकादमी नामक राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था की स्थापना का निर्णय लिया :- 15 दिसंबर 1952 के प्रस्ताव ...
Read More »रीतिकाल का नामकरण(ritikal ka namakaran)
“रीतिकाल” का नामकरण साहित्य की विभिन्न कालों और उनके लेखकों के अनुसार किया जा सकता है। यह काल संस्कृत और हिंदी साहित्य में साहित्यिक उत्थान, विविधता, और अद्वितीयता की दिशा में उच्चारित होता है। क्रम संख्या नामकरण Short trick कवि 1. अलंकृत काल अलमी मिश्रबन्धु 2. कलाकाल कला रमाशंकर की डॉ. रमाशंकर शुक्ल‘रसाल’ 3. श्रृंगार काल श्रृंगार विश्व के हजार ...
Read More »हिंदी साहित्य के प्रमुख गुरु और शिष्य(hindi sahity ke pramukh guru aur shishy)
हिंदी साहित्य में गुरु और शिष्य के संबंध बहुत महत्वपूर्ण रहे हैं, जिन्होंने साहित्य के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। यहां कुछ प्रमुख गुरु-शिष्य संबंधों का उल्लेख किया जा रहा है: क्र.स शिष्य गुरु 1. गोरखनाथ मत्स्येन्द्रनाथ 2. डोम्बिपा विरूपा 3. कुक्कुरिपा चर्पटीया 4. कण्हपा जालंधरपा 5. चर्पटनाथ गोरखनाथ 6. रामानुज यमुनाचार्य 7. ...
Read More »संदेश रासक(sandesh rasak) का परिचय
• रचयिता :- अब्दुल रहमान/अद्दहमाण • अब्दुल रहमान का परिचय :- ◆ मीरसेन आरद्द का पुत्र ◆ स्थान :- मिच्छदेस (म्लेच्छ)[पश्चिमी पाकिस्तान] ◆ मुल्तान निवासी( नाथूराम प्रेमी के अनुसार) ◆ जाति :- जुलाहा ◆ समय :- 11वीं शताब्दी का कवि (राहुल सांस्कृत्यायन के अनुसार) ◆ 12वीं सदी के प्रथम मुस्लिम लेखक जो हिन्दी लिखता है । ◆ भारतीय भाषा मे ...
Read More »रचनाओं संबंध में आलोचकों के विचार
क्रम संख्या रचना कहा जाता है 1. कामायानी (1935,जयशंकर प्रसाद) मानवता का रसात्मक इतिहास (आचार्य नंददुलारे वाजपेयी) मानव चेतना के विकास का महाकाव्य (डॉ. नगेंद्र) छायावाद का उपनिषद् (शांतिप्रिय द्विवेदी) मानवता का रसात्मक महाकाव्य (आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कहा) नए युग का प्रतिनिधि काव्य (नंददुलारे वाजपेयी) आधुनिक सभ्यता का प्रतिनिधि काव्य (नामवर सिंह ने कहा) रहस्यवाद का पहला महाकाव्य ...
Read More »ढोला मारु रा दूहा (dhola maru ra dooha)
“ढोला मारु रा दूहा” एक प्रसिद्ध राजस्थानी लोकगीत है। यह गीत राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं को दर्शाता है और इसे राजस्थान की धरोहर माना जाता है। इस गीत में “ढोला” का अर्थ होता है “ढोलक” जो एक परंपरागत राजस्थानी ढोलक है जो लोक गीतों के साथ बजाया जाता है। “मारु रा दूहा” में “मारु” राजस्थान के मारवाड़ी क्षेत्र का ...
Read More »नाथ साहित्य या नाथ संप्रदाय(nath sahity ya nath sampraday)
• नाथ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अर्थवेद तथा तैतिरीय ब्राह्मण में मिलता है। • अर्थवेद तथा तैतिरीय ब्राह्मण में नाथ का अर्थ शरणदाता है। • नाथ शब्द का अर्थ(आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के द्वारा ) ‘ना’का अर्थ -अनादि रूप ‘थ’का अर्थ– स्थापित होना • नाथ पंथ के चरमोत्कर्ष का समय – 12वीं शताब्दी से 14वीं शताब्दी के अंत तक ( ...
Read More »स्वयंभू का जीवन परिचय(svayambhoo ka jeevan parichay)
• अपभ्रंश का वाल्मीकि • समय :- 8वीं शताब्दी • उत्तर के रहने वाले थे बाद में संरक्षण के साथ राष्ट्रकूट राज्यों में चले गए । • पिता का नाम :- मारुति देव • स्वयंभू के दो पत्नियां थी। • स्वयंभू के आश्रयदाता :- धनंजय और धवलाइया • प्रमुख ग्रंथ :- पउमचरिउ • जैन कवियों में बहुत प्रसिद्ध कवि • ...
Read More »प्रबंध चिंतामणि(prabandh chintamani) का परिचय
प्रबंध चिंतामणि • 1304ई. में संस्कृत भाषा में जैन आचार्य मेरुतुंग द्वारा रचित है।(डॉ . बच्चन सिंह के अनुसार) मेरुतुंग का परिचय • नागेंद्र गच्छ के आचार्य • गुरु का नाम – चंद्रप्रभ सुरी • प्रधान शिष्य – गुणचंद्र • अन्य प्रमुख ग्रंथ – महापुरुष चरित (इस ग्रंथ में ऋषभदेव,शांतिनाथ,नेमिनाथ,पार्श्वनाथ और महावीर इस प्रकार पांच तीर्थंकरों का संक्षिप्त चरित ...
Read More »भरतेश्वर बाहुबली रास का परिचय(जैन साहित्य की रास परपंरा का प्रथम ग्रंथ)
भरतेश्वर बाहुबली रास(जैन साहित्य की रास परपंरा का प्रथम ग्रंथ) • रचयिता – शालिभद्रसुरी (भीमदेव द्वितीय के समय पाटण में हुए थे।) • रचना समय – 1185ई. में • रचना तिथि – संवत् 1231(मुनिजिन विजय के अनुसार) • 205 छन्दों में रचित। • खंडकाव्य • वीर रस प्रधान और अंत में शांत रस • 203 कड़ियां में रचित। • शालिभद्रसुरी ...
Read More »श्रावकाचार का परिचय {shravakachar ka parichay}
श्रावकाचार:- • दिगम्बर जैन आचार्य देवसेन द्वारा कृत • समय 933ई. या सवंत् 990 • इसमें 250 दोहों में श्रावक धर्म का वर्णन। • गृहस्थ धर्म श्रावक धर्म का वर्णन केन्द्र है। • इसमें साहित्यिक तत्वों का अभाव है। • भाषा – अपभ्रंश • पंक्ति – जो जिण सासण भाषियउ सो मइ कहियउ सारु। जो पालइ सइ भाउ करि सो ...
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