Tag Archives: rpsc first grade hindi notes

श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श-समाज विस्तृत पाठ-सार एवं प्रमुख वैचारिक बिंदु

श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श-समाज लेखक: बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर मूल रचना: ‘एनिहिलेशन ऑफ़ कास्ट’ (Annihilation of Caste, 1936) हिंदी रूपांतर: ललई सिंह यादव (शीर्षक: ‘जाति-भेद का उच्छेद’) ऐतिहासिक संदर्भ: यह भाषण ‘जाति-पाँति तोड़क मंडल’ (लाहौर) के 1936 के वार्षिक सम्मेलन के अध्यक्षीय भाषण हेतु लिखा गया था। क्रांतिकारी विचारों से आयोजकों की असहमति के ...

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 इंटरनेट पत्रकारिता (Internet Journalism)

 इंटरनेट पत्रकारिता (Internet Journalism) इंटरनेट पत्रकारिता (जिसे वेब पत्रकारिता, ऑनलाइन पत्रकारिता या ई-पत्रकारिता भी कहा जाता है) 21वीं सदी का सबसे तेज़ी से उभरता और लोकप्रिय जनसंचार माध्यम है। 1. इंटरनेट पत्रकारिता का अर्थ एवं परिभाषा अर्थ : इंटरनेट के माध्यम से समाचारों, सूचनाओं, विचारों और दृश्यों का संकलन, संपादन, लेखन एवं जन-समूह तक प्रकाशन या प्रसारण करना ‘इंटरनेट पत्रकारिता’ ...

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देवनागरी लिपि के गुण एवं सीमाएँ(devnagri lipi ke gun evam seemaen)

देवनागरी लिपि के गुण एवं सीमाएँ देवनागरी लिपि विश्व की सबसे वैज्ञानिक, व्यवस्थित और परिमार्जित लिपियों में मानी जाती है। हालाँकि, प्रत्येक लिपि की तरह इसमें जहाँ अनेक अद्भुत गुण हैं, वहीं आधुनिक युग (विशेषकर टाइपिंग, डिजिटल प्रिंटिंग और त्वरित लेखन) की दृष्टि से इसकी कुछ व्यावहारिक सीमाएँ भी हैं। देवनागरी लिपि के प्रमुख गुण (Advantages) 1. पूर्णतः वैज्ञानिक और ...

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मानक देवनागरी लिपि और हिंदी वर्तनी के प्रमुख नियम(manak devnagri lipi aur hindi vartani ke pramukh niyam)

मानक देवनागरी लिपि और हिंदी वर्तनी के प्रमुख नियम केंद्रीय हिंदी निदेशालय (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) ने देवनागरी लिपि और वर्तनी में एकरूपता, स्पष्टता और वैज्ञानिकता लाने के लिए मानक हिंदी वर्तनी के विस्तृत नियम निश्चित किए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य मुद्रण (Printing), कंप्यूटर टाइपिंग, प्रकाशन और पठन-पाठन में होने वाले भ्रम को दूर करना है। 1. संयुक्त ...

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 देवनागरी लिपि अर्थ विकास उपनाम प्रयोग एवं विशेषताएँ

 देवनागरी लिपि: अर्थ, विकास, उपनाम, प्रयोग एवं विशेषताएँ देवनागरी लिपि भारत की सबसे प्रमुख और वैज्ञानिक लिपि है। यह न केवल हिंदी, बल्कि संस्कृत, मराठी, नेपाली, मैथिली, कोंकणी जैसी कई प्रमुख भाषाओं को लिखने का माध्यम है। 1. देवनागरी लिपि का अर्थ ‘देव + नागरी’ : दो शब्दों के मेल से बना है – ‘देव’ + ‘नागरी’। नगर / नागर ...

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पश्चिमी हिंदी की बोलियाँ (pashchimi hindi ki boliyan)

पश्चिमी हिंदी की बोलियाँ (शौरसेनी अपभ्रंश से विकसित) पश्चिमी हिंदी (शौरसेनी अपभ्रंश से विकसित) के अंतर्गत मुख्य रूप से 5 बोलियाँ (या उपभाषाएँ) आती हैं। इन्हें याद रखने और समझने की सुविधा के लिए दो वर्गों में बाँटा जाता है: 1. आकार-बहुल बोलियाँ (जिनमें ‘आ’ की ध्वनि अधिक होती है) खड़ी बोली (कौरवी) : यह आधुनिक मानक हिंदी, उर्दू और ...

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 पूर्वी हिंदी की बोलियाँ(purvi hindi ki boliyan)

 पूर्वी हिंदी की बोलियाँ पूर्वी हिंदी का विकास अर्धमागधी अपभ्रंश से हुआ है। यह मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के पूर्वी भागों में बोली जाती है। पूर्वी हिंदी के अंतर्गत तीन मुख्य बोलियाँ आती हैं, जिन्हें याद रखने के लिए एक सरल सूत्र ABC (A – अवधी, B – बघेली, C – छत्तीसगढ़ी) का प्रयोग किया ...

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भारोपीय और द्रविड़ भाषा-परिवार की तुलना(bharopiy aur dravid bhasha-parivar ki tulna)

भारोपीय और द्रविड़ भाषा-परिवार की तुलना 1. भारोपीय (Indo-European) भाषा-परिवार विस्तार व महत्त्व : यह संसार का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण भाषा-परिवार है। विश्व की लगभग 45% से अधिक जनसंख्या इस परिवार की भाषाएँ बोलती है। प्रमुख शाखाएँ : इसे दो मुख्य वर्ग (सतम और केन्तुम) तथा कई शाखाओं में बाँटा गया है: भारतीय-आर्य (Indo-Aryan) : संस्कृत, पालि, प्राकृत, हिंदी, ...

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भारतीय-आर्य भाषाओं का इतिहास(bhartiy-arya bhashaon ka itihaas)

भारतीय-आर्य भाषाओं का इतिहास भारतीय-आर्य भाषाओं का इतिहास लगभग 3500 से अधिक वर्षों में फैला हुआ है। भाषाविदों (विशेषकर डॉ. धीरेन्द्र वर्मा, डॉ. भोलनाथ तिवारी और डॉ. सुनीति कुमार चटर्जी) ने इसके विकासक्रम को मुख्य रूप से तीन ऐतिहासिक चरणों में विभाजित किया है: 1. प्राचीन भारतीय-आर्य भाषा काल (1500 ई.पू. से 500 ई.पू.) इस काल की मुख्य भाषा संस्कृत ...

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साहित्यिक भाषा और सामान्य व्यावहारिक भाषा में अंतर(sahityik bhasha aur samanya vyavharik bhasha mein antar)

साहित्यिक भाषा और सामान्य व्यावहारिक भाषा में अंतर साहित्यिक भाषा और सामान्य व्यावहारिक (लोक) भाषा दोनों ही विचारों और भावों की अभिव्यक्ति के माध्यम हैं, किंतु प्रयोग के उद्देश्य, शब्द-चयन, रचना विधान और सौंदर्य की दृष्टि से दोनों में व्यापक अंतर पाया जाता है। जहाँ सामान्य व्यावहारिक भाषा का मुख्य उद्देश्य दैनिक जीवन की सूचनाओं और विचारों का सहज आदान-प्रदान ...

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भाषा की मुख्य इकाइयाँ (bhasha ki mukhya ikaiyan)

भाषा की मुख्य इकाइयाँ (Units of Language) भाषा केवल अभिव्यक्ति का साधन ही नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत वैज्ञानिक और रोचक व्यवस्था है। भाषा की रचना छोटी से छोटी ध्वनियों से लेकर बड़े-बड़े वाक्यों के संयोजन से होती है। भाषा की मुख्य रूप से पाँच इकाइयाँ मानी जाती हैं, जो नीचे से ऊपर के क्रम में (सिक्स से शिखर ...

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भाषा और बोली में अंतर(bhasha aur boli mein antar)

भाषा और बोली में अंतर भाषा और बोली दोनों ही विचारों के आदान-प्रदान के माध्यम हैं, लेकिन उनके क्षेत्र, स्वरूप, व्याकरण और सामाजिक स्वीकृति में मौलिक अंतर होता है। सामान्यतः किसी क्षेत्र विशेष में बोली जाने वाली स्थानीय वाणी ‘बोली’ कहलाती है, जबकि वही बोली जब विस्तृत क्षेत्र में फैलकर व्याकरणबद्ध और साहित्य समृद्ध हो जाती है, तो ‘भाषा’ का ...

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भाषा और लिपि में अंतर(bhasha aur lipi mein antar)

भाषा और लिपि में अंतर भाषा और लिपि दोनों ही मानव विचारों के संरक्षण और संप्रेषण के मुख्य आधार हैं। सामान्य शब्दों में, भाषा वह ध्वनि-प्रतीक है जिसे हम बोलते और सुनते हैं, जबकि लिपि वह दृश्य-प्रतीक है जिसे हम लिखते और देखते हैं। यदि भाषा ‘ध्वनि’ (Sound) है, तो लिपि उस ध्वनि का ‘चित्र’ या ‘चिह्न’ (Visual Sign) है। ...

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राष्ट्रभाषा और राजभाषा में अंतर(rashtrabhasha aur rajbhasha mein antar)

राष्ट्रभाषा और राजभाषा में अंतर राष्ट्रभाषा और राजभाषा दोनों ही किसी देश की भाषाई व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालाँकि, सामान्य बोलचाल में लोग प्रायः इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि संवैधानिक, व्यावहारिक और कार्यात्मक दृष्टि से दोनों में मौलिक अंतर है। राष्ट्रभाषा का संबंध जहाँ पूरे राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और जन-सामान्य की स्वीकृति ...

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भाषा के प्रमुख रूप(bhasha ke pramukh roop)

भाषा के प्रमुख रूप भाषा समाज और संस्कृति के साथ लगातार विकसित होती है। प्रयोग, क्षेत्र और सामाजिक स्वीकृति के आधार पर भाषा के अलग-अलग रूप और भूमिकाएँ बन जाती हैं। 1. मानक भाषा (Standard Language) परिभाषा : व्याकरण के नियमों से सुव्यवस्थित, सर्वमान्य, और शिष्ट समाज द्वारा प्रयुक्त भाषा का रूप मानक भाषा कहलाता है। व्याख्या : जब किसी ...

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