भारोपीय और द्रविड़ भाषा-परिवार की तुलना(bharopiy aur dravid bhasha-parivar ki tulna)

भारोपीय और द्रविड़ भाषा-परिवार की तुलना

1. भारोपीय (Indo-European) भाषा-परिवार

  • विस्तार व महत्त्व : यह संसार का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण भाषा-परिवार है। विश्व की लगभग 45% से अधिक जनसंख्या इस परिवार की भाषाएँ बोलती है।

  • प्रमुख शाखाएँ : इसे दो मुख्य वर्ग (सतम और केन्तुम) तथा कई शाखाओं में बाँटा गया है:

    • भारतीय-आर्य (Indo-Aryan) : संस्कृत, पालि, प्राकृत, हिंदी, उर्दू, पंजाबी, बंगाली, मराठी, गुजराती आदि।

    • ईरानी (Iranian) : फारसी (पर्शियन), पश्तो, बलूची।

    • यूरोपीय शाखाएँ :

      • जर्मेनिक (Germanic) : अंग्रेजी, जर्मन, डच

      • रोमान्स / इटैलिक (Romance / Italic) : लैटिन, फ्रेंच, स्पैनिश, इटालियन

      • स्लाविक (Slavic) : रूसी, पोलिश

      • ग्रीक (Greek) : यूनानी

      • केल्टिक (Celtic) : आयरिश, वेल्श आदि।

  • विशेषता : इस परिवार की भाषाओं की शब्दावली और धातु-रूपों में गहरा ऐतिहासिक संबंध पाया जाता है

    (जैसे— मातृ / Mātṛ / Mother / Mère, पितृ / Pitṛ / Father / Père)

2. द्रविड़ (Dravidian) भाषा-परिवार

  • विस्तार व महत्त्व : यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा भाषा-परिवार है, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत और मध्य/पूर्वी भारत के कुछ भागों में बोला जाता है। भारत की लगभग 20-25% आबादी द्रविड़ परिवार की भाषाएँ बोलती है।

  • प्रमुख भाषाएँ :

    • चार मुख्य साहित्यिक भाषाएँ : तमिल (सबसे प्राचीन), तेलुगु (सबसे अधिक बोली जाने वाली), कन्नड़ और मलयालम।

    • अन्य / जनजातीय भाषाएँ : गोंडी, कुडुख (उरांव), तुलु, और पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में बोली जाने वाली ‘ब्राहूई’ भाषा।

  • विशेषता : द्रविड़ भाषाओं की संरचना मुख्यतः अग््लूटिनेटिव (Agglutinative / श्लिष्ट-योगात्मक) होती है, जहाँ मूल शब्द के आगे प्रत्यय (Suffixes) जोड़कर नए अर्थ और व्याकरणिक रूप बनाए जाते हैं।

तुलनात्मक बिंदु

आधार भारोपीय परिवार द्रविड़ परिवार
1. क्षेत्रीय विस्तार भारत, यूरोप, ईरान, अमेरिका (वैश्विक) मुख्य रूप से दक्षिण एवं मध्य भारत
2. भारत में प्रतिशत (उत्तरी व मध्य भारत) (दक्षिणी भारत)
3. प्राचीनता वैदिक संस्कृत सबसे प्राचीन रूप प्राचीन तमिल (संगम साहित्य) सबसे प्राचीन रूप
4. शब्द-संरचना वियोगात्मक एवं संश्लिष्ट रूप श्लिष्ट-योगात्मक (प्रत्यय-प्रधान)

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

error: Content is protected !!