पद विचार (Syllable / Positional Analysis)
व्याकरण का तीसरा प्रमुख और अत्यंत व्यावहारिक अंग ‘पद विचार’ (Syllable / Positional Analysis) है।
Compiled by Puran Mal Kumhar
1. पद विचार की परिभाषा (Definition of Pad Vichar)
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परिभाषा : “व्याकरण का वह विभाग जिसके अंतर्गत वाक्यों में प्रयुक्त ‘पदों’, उनके भेदों, लिंग, वचन, कारक, काल तथा पद-परिचय (Parsing) के नियमों का विस्तार से अध्ययन किया जाता है, उसे पद विचार कहते हैं।”
‘शब्द’ और ‘पद’ में क्या अंतर है?
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शब्द (Word) : जब कोई शब्द स्वतंत्र होता है और कोश (Dictionary) में रहता है, तब वह ‘शब्द’ कहलाता है। (उदा: मोहन, आम, खाना)
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पद (Pad) : जब वही शब्द किसी वाक्य में प्रयुक्त होकर व्याकरण के नियमों (लिंग, वचन, कारक आदि) में बँध जाता है, तब वह ‘पद’ बन जाता है।
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उदाहरण : “मोहन आम खाता है।” — इस वाक्य में ‘मोहन’, ‘आम’ और ‘खाता है’ तीनों स्वतंत्र शब्द न रहकर ‘पद’ बन चुके हैं।
2. पद के मुख्य भेद (Types of Pad)
व्याकरण के अनुसार वाक्यों में प्रयुक्त होने वाले पद मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बँटे हैं, जिनके अंतर्गत कुल 8 प्रकार के पद (Parts of Speech) आते हैं :
पद (Words in a Sentence)
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1. विकारी पद (Changeable) 2. अविकारी पद / अव्यय (Unchangeable)
(लिंग, वचन, कारक से बदलते हैं) (कभी कोई परिवर्तन नहीं होता)
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संज्ञा सर्वनाम विशेषण क्रिया क्रियाविशेषण संबंधबोधक समुच्चयबोधक विस्मयादिबोधक
(Noun) (Pronoun) (Adjective) (Verb) (Adverb) (Preposition) (Conjunction) (Interjection)
(i) विकारी पद (Changeable Pads) — संख्या: 4
जिन पदों के रूप में लिंग, वचन, पुरुष या कारक के कारण परिवर्तन (विकार) आ जाता है:
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संज्ञा (Noun) : किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव के नाम को दर्शाने वाला पद। (उदा: राम, जयपुर, मिठास)
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सर्वनाम (Pronoun) : संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाला पद। (उदा: वह, तुम, मैं)
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विशेषण (Adjective) : संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाला पद। (उदा: सुंदर, मीठा, चार)
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क्रिया (Verb) : किसी कार्य के करने या होने का बोध कराने वाला पद। (उदा: पढ़ना, दौड़ना, है)
(ii) अविकारी पद या अव्यय (Unchangeable Pads) — संख्या: 4
जिन पदों के रूप में किसी भी परिस्थिति (लिंग, वचन, काल) में कोई बदलाव नहीं आता:
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क्रियाविशेषण (Adverb) : क्रिया की विशेषता बताने वाले पद। (उदा: धीरे-धीरे, तेज, कल)
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संबंधबोधक (Preposition) : जो पद संज्ञा/सर्वनाम का वाक्य के अन्य पदों से संबंध बताते हैं। (उदा: के बिना, के ऊपर, के सामने)
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समुच्चयबोधक (Conjunction) : दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ने वाले पद। (उदा: और, परंतु, क्योंकि)
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विस्मयादिबोधक (Interjection) : हर्ष, शोक, घृणा आदि भाव प्रकट करने वाले पद। (उदा: वाह!, अरे!, अहा!)
3. पद विचार से जुड़े 5 रोचक तथ्य (Interesting Facts)
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‘शब्द’ का पद में रूपांतरण (जादुई परिवर्तन) : केवल एक वाक्य में स्थान बदलते ही शब्द का व्याकरणिक पद-भेद बदल जाता है।
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$\rightarrow$ “वह अच्छा गाता है।” (यहाँ ‘अच्छा’ = क्रियाविशेषण)
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$\rightarrow$ “वह एक अच्छा लड़का है।” (यहाँ ‘अच्छा’ = विशेषण)
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$\rightarrow$ “हमें अच्छों की संगति करनी चाहिए।” (यहाँ ‘अच्छा’ = संज्ञा)
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पद-क्रम का महत्व (Word Order Magic) : हिंदी एक SOV (Subject-Object-Verb) भाषा है। अर्थात् हिंदी के वाक्य में पहले ‘कर्ता’ (Subject), फिर ‘कर्म’ (Object) और अंत में ‘क्रिया’ (Verb) आती है। (उदा: राम ने रावण को मारा)। जबकि अंग्रेजी एक SVO भाषा है (Ram killed Ravana)।
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पद-परिचय (Parsing) का रोमांच : व्याकरण में ‘पद-परिचय’ ठीक वैसा ही है जैसे किसी व्यक्ति का बायोडेटा (ID Card) देखना। इसमें वाक्य के एक-एक पद की पूरी कुंडली (संज्ञा/सर्वनाम, लिंग, वचन, कारक, काल) निकालनी होती है।
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शून्य अव्यय परिवर्तन (Zero Alteration) : ‘अव्यय’ शब्द दो शब्दों से बना है — ‘अ’ (नहीं) + ‘व्यय’ (खर्च/बदलाव)। यानी ऐसे पद जो वाक्य में कितना भी प्रयोग हों, उनका रूप कभी ‘खर्च’ या परिवर्तित नहीं होता।
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ने (Ne) परसर्ग का अनूठा नियम : हिंदी में ‘ने’ (कर्ता कारक का चिह्न) का प्रयोग केवल भूतकाल (Past Tense) की सकर्मक क्रियाओं के साथ ही होता है (उदा: उसने खाया)। वर्तमान और भविष्य काल में ‘ने’ पद पूरी तरह गायब हो जाता है (उदा: वह खाता है, वह खाएगा)।