अरस्तु का विरेचन सिद्धांत(arastu ka virechan siddhant)

प्लेटो के अनूठी सिद्धांत का विरोध करने वाला सिद्धांत- अरस्तु का विरेचन सिद्धांत
विरेचन का उद्देश्य – आनंदप्रद राहत ।
विरेचन की प्रथम बार चर्चा- पोयटिक्स के 6वे अध्याय में
विरेचन की दूसरी बार चर्चा -राजनीति शास्त्र के भाग 8 के अध्याय 7 में संगीत के अध्ययन के उद्देश्य के अंतर्गत।
यूनानी शब्द कथार्सिस जिसका हिन्दी रूपांतर विरेचन है
• भारतीय चिकित्साशास्त्र (आयुर्वेद) का परिभाषित शब्द – विरेचन।
• यूनानी चिकित्सा शास्त्र का परिभाषित शब्द-कथार्सिस।
विरेचन(कैथार्सिस)का तात्पर्य :- शुद्धि, परिष्करण,रेचन।
• विरेचन का सामान्य अर्थ :- विचारों का निष्कासन या शुद्धि। अर्थात् बाह्म विकारों की उत्तेजना की और उसके शमन के द्वारा मन की शुद्धि और शांति।
• अरस्तु के विवेचन सिद्धांत में विरेचन का अर्थ (अरस्तु के व्याख्याकारों का द्वारा )
1. चिकित्सापरक अर्थ :-
वर्जीज एवं डेचेजे के अनुसार “रेचक द्वारा उदर की शुद्धि होती है उसी प्रकार त्रासदी का विरेचन मन को शुद्ध करता है।”
2. धर्मपरक अर्थ :-
प्रो. गिलबर्ट मर्रे के अनुसार ” यूनान में दिओन्युसथ नामक देवता से सम्बद्ध उत्सव “
यह उत्सव एक प्रकार की शुद्धि का प्रकार था।
3. कलापरक अर्थ :-
प्रो.बूचर के अनुसार ” वास्तविक जीवन में करुणा और भय के भाव दूषित और कष्टप्रद तत्वों से युक्त रहते हैं।”
4.नीतिपरक अर्थ:- कारनेई,रेसीन एवं बारनेज
“मनोविकारों की उत्तेजना द्वारा विभिन्न अंतर्वृतियों का समन्वय”
• अन्य विद्वानों द्वारा विवेचन का अर्थ :-
(i) मसलन – मिल्टन के अनुसार- “भावनाओं की योग्य मर्यादा या संतुलन का निर्माण है।”
(ii) आई.ए.रिचर्ड्स के अनुसार – “जैसे कांटे से कांटा निकलता है वैसे ही भावना से भावना की शुद्धि होती है।”
(iii)विवेचन का अर्थ- शुद्धि (लेसिंग के अनुसार)
(iv) मन की दबी , उमड़ी और जमी भावनाओं को राह देना, उस भावना से त्रासद दबाव से मुक्ति पाने जैसा है। (आधुनिक मनोविश्लेषणवादियों की दृष्टि में)
(v) विरेचन सिद्धांत को टीके का सिद्धांत कहा।(आधुनिक आलोचको ने )
(vi) विरेचन सिद्धांत भारतीय काव्यशास्त्र के रस सिद्धांत के समीप पहुंच जाता है। (डॉ.बच्चन सिंह के अनुसार)
(vii) विरेचन को अभिनव के सत्त्वोद्रेक,रिर्चड्स के अर्न्तवृत्तियों के सामंजस्य और शुक्ल जी ह्रदय की मुक्तावस्था से लगभग अभिन्न माना। (डॉ. नगेंद्र के अनुसार)

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