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‘जूझ’ पाठ के लेखक कौन हैं?
डॉ. आनंद यादव।
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‘जूझ’ किस विधा की रचना है?
आत्मकथात्मक उपन्यास / संस्मरण।
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‘जूझ’ उपन्यास मूल रूप से किस भाषा में लिखा गया है?
मराठी भाषा में।
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‘जूझ’ का मूल मराठी शीर्षक क्या है?
‘झोंबी’ (जिसका अर्थ लड़ना या जूझना होता है)।
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‘जूझ’ का मराठी से हिंदी अनुवाद किसने किया है?
केशव प्रथम वीर ने।
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कहानी के मुख्य पात्र / कथानायक का नाम क्या है?
आनंदा (आनंद रतन यादव)।
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लेखक के मन में बचपन से किसके लिए तीव्र तड़प थी?
पाठशाला (स्कूल) जाने के लिए।
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लेखक के पिता को पाठ में क्या कहकर संबोधित किया गया है?
‘दादा’ (रतनाप्पा)।
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लेखक अपने पिता के सामने पढ़ने की बात कहने से क्यों डरता था?
क्योंकि पिता बात सुनते ही हड्डी-पसली एक कर देने (मारने) की धमकी देते थे।
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लेखक किस कक्षा तक पढ़कर स्कूल छोड़ चुका था?
पाँचवीं कक्षा तक।
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खेती के संबंध में लेखक के क्या विचार थे?
कि जन्म-भर खेत में काम करने पर भी हाथ कुछ नहीं लगेगा और खेती गड्ढे में धकेल रही है।
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लेखक पढ़-लिखकर किसकी तरह व्यवसाय या नौकरी करना चाहता था?
विठोबा आण्णा की तरह।
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दीवाली बीत जाने के बाद लेखक के घर कौन-सा काम शुरू होता था?
ईख (गन्ना) पेरने का कोल्हू चलाना।
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गाँव भर में सबसे पहले किसका कोल्हू शुरू होता था?
लेखक के दादा का।
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दादा सबसे पहले कोल्हू क्यों शुरू करते थे?
ताकि बाज़ार में पहले गुड़ पहुँचने पर अच्छी कीमत (भाव) मिल सके।
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अन्य किसानों का ईख देर से पेरने के पीछे क्या तर्क था?
कि देर तक खड़ी रहने वाली ईख के रस में पानी कम होता है और गुड़ ज्यादा निकलता है।
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दादा ज्यादा गुड़ निकलने की अपेक्षा किसे अधिक महत्व देते थे?
ज्यादा भाव (कीमत) मिलने को।
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लेखक ने पढ़ने की बात माँ से किस समय छेड़ी?
जब माँ धूप में कंडे थाप रही थी और लेखक बाल्टी से पानी दे रहा था।
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माँ ने पढ़ाई की बात पर दादा के स्वभाव की तुलना किससे की?
बरहेला (जंगली) सूअर से, जो बात सुनते ही गुर्राता है।
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माँ आनंदा को किस कक्षा तक पढ़ाना चाहती थी?
सातवीं कक्षा तक।
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लेखक ने दादा को समझाने के लिए किसका सहारा लेने का सुझाव दिया?
दत्ता जी राव देसाई (देसाई सरकार) का।
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दत्ता जी राव देसाई गाँव में किस रूप में जाने जाते थे?
गाँव के प्रभावशाली और प्रतिष्ठित मुखिया/जमींदार।
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माँ ने रात को दत्ता जी राव से दादा के बारे में क्या शिकायत की?
कि दादा दिनभर बाज़ार में रखमाबाई के पास गुज़ारते हैं और खेती में हाथ नहीं लगाते।
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दादा ने आनंदा की पढ़ाई बंद करके उसे खेत में क्यों झोंक दिया था?
ताकि खुद गाँव भर में आज़ादी से घूम सकें।
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माँ की बात सुनकर दत्ता जी राव ने क्या प्रतिक्रिया दी?
वे दादा पर बहुत चिढ़े और कहा कि आने दे उसे, मैं उसे ठीक करता हूँ।
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लेखक ने दत्ता जी राव से किस महीने में अपनी तैयारी पूरी करने की बात कही?
जनवरी के महीने में (दो महीने में पाँचवीं पास करने की)।
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दत्ता जी राव ने लेखक और उसकी माँ को क्या योजना समझाई?
कि दादा को उनके पास भेजें और थोड़ी देर बाद आनंदा भी वहाँ आ जाए।
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माँ ने देसाई सरकार के यहाँ जाने का क्या बहाना बनाया था?
साग-भाजी देने जाने का।
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देसाई के बाड़े का बुलावा दादा के लिए क्या मायने रखता था?
एक बड़े सम्मान की बात।
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आनंदा देसाई के यहाँ दादा को बुलाने का क्या बहाना लेकर गया?
कि खाना (जीमने) ठंडा हो रहा है, माँ ने भोजन के लिए बुलाया है।
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दत्ता जी राव ने दादा का क्या नाम लेकर पूछताछ शुरू की?
रतनाप्पा।
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दादा ने आनंदा को स्कूल न भेजने का क्या झूठा कारण बताया?
कि इसे गलत आदतें पड़ गई थीं (कंडे-चारा बेचना, सिनेमा देखना आदि)।
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आनंदा ने सिनेमा देखने के लिए पैसे का प्रबंध कैसे किया था?
गोबर बीनकर माँ से कंडे बनवाए और उन्हें बेचकर कपड़े बनवाए व सिनेमा देखा।
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दत्ता जी राव ने दादा को डांटते हुए क्या चेतावनी दी?
कि सवेरे से लड़के को स्कूल भेज, नहीं तो लड़का मेरे यहाँ काम करेगा और मैं इसे पढ़ाऊँगा।
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दादा ने विवश होकर किस समय आनंदा से शर्तें/वचन लिए?
रात को खाना खाते समय।
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दादा ने स्कूल जाने से पहले सुबह खेत में कितने बजे तक काम करने की शर्त रखी?
सुबह दिन निकलते ही 11:00 बजे तक पानी लगाने की।
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दादा ने स्कूल की छुट्टी के बाद शाम को क्या काम करने को कहा?
घर में बस्ता रखकर सीधे खेत पर 1 घंटा ढोर (मवेशी) चराने को।
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खेत में अधिक काम होने पर दादा ने क्या करने को कहा?
पाठशाला से गैर-हाजिर रहने को।
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दादा पढ़ाई को व्यर्थ बताते हुए आनंदा से क्या ताना मारते थे?
“तेरे ऊपर पढ़ने का भूत सवार है, कोई बालिस्टर (बैरिस्टर) नहीं होने वाला तू”।
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आनंदा को खेत की चक्की में पिसने से किसकी मार अच्छी लगती थी?
मास्टर जी की छड़ी की मार।
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पाँचवीं कक्षा के हाजिरी रजिस्टर में लेखक के नाम के आगे क्या टिप्पणी दर्ज थी?
‘पाँचवीं नापास’।
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कक्षा में पहले दिन लेखक के साथ किस बात का संकोच था?
उम्र में छोटे बच्चों के साथ बैठने और पुराने सहपाठियों के आगे चले जाने का।
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स्कूल के पहले दिन कक्षा के किस शरारती लड़के ने लेखक का मजाक उड़ाया?
चह्वाण के लड़के ने।
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चह्वाण के लड़के ने लेखक के साथ क्या शरारत की?
उसका मटमैला गमछा सिर से छीनकर मास्टर की टेबल पर रख दिया।
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पहले दिन कक्षा में कौन-से शिक्षक आए थे?
रणनवरे मास्टर।
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रणनवरे मास्टर कक्षा में किस कवि की कविता पढ़ाने लगे?
वामन पंडित की कविता।
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पहले दिन अपमानित होने पर लेखक ने अपनी स्थिति की तुलना किससे की?
कौए के उस बच्चे से जिसे खुले में रखने पर अन्य कौए चोंच मारते हैं।
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लेखक ने स्कूल की वेशभूषा के लिए माँ से क्या मँगवाया?
एक नई टोपी और दो नाड़ी वाली मैलखाऊ चड्डी।
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कक्षा अध्यापक और गणित के शिक्षक कौन थे?
मंत्री मास्टर।
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मंत्री मास्टर लड़कों को सजा कैसे देते थे?
हाथ से गर्दन पकड़कर पीठ पर जोरदार घूँसा लगाकर।
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पाँचवीं कक्षा का सबसे शांत और होशियार मॉनिटर कौन था?
वसंत पाटील।
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वसंत पाटील की शारीरिक बनावट कैसी थी?
शरीर से दुबला-पतला, किंतु स्वभाव से शांत व पढ़ने में तेज।
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लेखक ने अपनी पढ़ाई व्यवस्थित करने के लिए क्या कदम उठाया?
किताबों पर अखबारी कागज के कवर चढ़ाए और बस्ता ठीक किया।
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आनंदा और वसंत पाटील में मित्रता कैसे हुई?
दोनों मिलकर कक्षा के अन्य छात्रों के गणित के सवाल जाँचने लगे।
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मास्टर जी लेखक को किस नाम से पुकारने लगे?
‘आनंदा’।
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पाठशाला में मराठी विषय कौन पढ़ाते थे?
श्री न. वा. सौंदलगेकर मास्टर।
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सौंदलगेकर मास्टर के अध्यापन की मुख्य विशेषता क्या थी?
सुरीला गला, छंद की चाल, रसिकता और सजीव अभिनय के साथ कविता पढ़ाना।
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सौंदलगेकर मास्टर को मराठी के अलावा किस भाषा की कविताएँ कंठस्थ थीं?
अंग्रेज़ी की।
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सौंदलगेकर मास्टर कक्षा में किन मराठी कवियों के संस्मरण सुनाते थे?
यशवंत, बा. भ. बोरकर, भा. रा. ताँबे, गिरीश, केशव कुमार आदि के।
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मास्टर के पढ़ाने के ढंग को देखकर आनंदा क्या करता था?
दम रोककर मास्टर के हाव-भाव, गति, चाल और रस को ग्रहण करता था।
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खेत में पानी लगाते समय आनंदा क्या करने लगा था?
मास्टर के हाव-भाव, आरोह-अवरोह और अभिनय के अनुसार कविताएँ गाने लगा।
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कविताओं के जुड़ाव से आनंदा को कौन-सी दो बड़ी शक्तियाँ मिलीं?
अकेलेपन का भय समाप्त हो गया और अकेलापन उसे प्रिय लगने लगा।
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अकेलापन लेखक के लिए क्यों लाभदायक सिद्ध हुआ?
क्योंकि अकेले में वह जोर से गा सकता था, अभिनय कर सकता था और नाच (थुई-थुई) सकता था।
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आनंद काणेकर की प्रसिद्ध कविता की पहली पंक्ति क्या थी?
“चाँद रात पसरिते पाँढरी गाया धरणीवरी”।
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लेखक ने काणेकर की कविता किस छंद और धुन पर गाई?
‘केशव करणी जाति’ नामक छंद तथा एक सिनेमाई गाने की धुन पर।
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मास्टर ने आनंदा की कविता-गायन प्रतिभा से प्रभावित होकर क्या किया?
छठी-सातवीं के छात्रों के सामने और स्कूल के समारोह में उससे कविता गवाई।
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समारोह में कविता गाने पर लेखक को कैसा अनुभव हुआ?
मानो उसके नए पंख निकल आए हों।
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सौंदलगेकर मास्टर ने अपने घर के दरवाजे पर खिली किस लता पर कविता लिखी थी?
मालती की बेल (लता) पर।
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मालती की लता पर कविता देखकर लेखक के मन में क्या विश्वास जगा?
कि कवि भी हाड़-मांस का सामान्य इंसान होता है और वह स्वयं भी कविता बना सकता है।
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आनंदा किन विषयों पर कविता की तुकबंदी करने लगा?
गाँव के दृश्यों, खेतों, फसलों और जंगली फूलों पर।
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कविता लिखने के लिए आनंदा अपनी जेब (खीसा) में क्या रखने लगा?
कागज और पेंसिल।
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कागज-पेंसिल न होने पर आनंदा कविता कहाँ लिखता था?
लकड़ी के टुकड़े से भैंस की पीठ पर या पत्थर की शिला पर कंकड़ से।
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भैंस की पीठ या पत्थर पर लिखी कविता को आनंदा कब पोंछ देता था?
जब वह कंठस्थ (याद) हो जाती थी।
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आनंदा अपनी नई रची कविता मास्टर जी को कब दिखाने जाता था?
सोमवार को या कभी-कभी अधीर होकर रविवार की रात को ही।
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सौंदलगेकर मास्टर रात को आनंदा को कविता के किन नियमों की जानकारी देते थे?
भाषा, छंद, लयक्रम, अलंकार-शास्त्र और शुद्ध लेखन के नियम।
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मास्टर जी के मार्गदर्शन से आनंदा की किस भाषा में सुधार हुआ?
मराठी भाषा में।
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कविता रचने के अभ्यास से आनंदा के मन में क्या अनुभूति होने लगी?
शब्दों का नशा चढ़ने लगा और लगा कि मन में कोई मधुर बाजा बज रहा है।
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‘जूझ’ कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
कठिन परिस्थितियों और अभावों से लड़कर शिक्षा और लक्ष्य प्राप्त करना।
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‘मळा’ शब्द का क्या अर्थ है?
खेत (मराठी शब्द)।
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‘जीमने’ शब्द का क्या अर्थ है?
भोजन करना / खाना खाना।
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‘ढोर’ शब्द का क्या अर्थ है?
मवेशी / पशु।
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‘खीसा’ शब्द का क्या अर्थ है?
जेब (पॉकेट)।
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‘यति-गति’ का काव्यशास्त्र में क्या अर्थ है?
कविता के पाठ में विराम (रुकना) और लयबद्ध प्रवाह (गति)।
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‘बरहेला’ शब्द का क्या अर्थ है?
जंगली (जैसे जंगली सूअर)।
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‘काछ’ किसे कहते हैं?
धोती का वह छोर जिसे पीछे कमर में खोंसा जाता है।
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‘कंडे थापना’ का क्या अर्थ है?
गोबर के उपले बनाना।
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‘हजामत बनाना’ मुहावरे का पाठ के संदर्भ में क्या अर्थ है?
कड़ी डाँट-फटकार लगाना / सबक सिखाना।
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‘ईख’ का साधारण भाषा में क्या अर्थ है?
गन्ना।
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‘बालिस्टर’ किस शब्द का अपभ्रंश/तद्भव रूप है?
बैरिस्टर (वकील)।
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‘मैलखाऊ’ कपड़े से क्या तात्पर्य है?
गहरे रंग का ऐसा कपड़ा जिस पर मैल या गंदगी जल्दी न दिखे।
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‘धरोहर’ शब्द का क्या अर्थ है?
अमानत / पूँजी।
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‘हूक भरना’ का क्या आशय है?
दर्द या दुख से सिसकना / कराहना।
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‘मुनासिब’ शब्द का क्या अर्थ है?
उचित / सही / उपयुक्त।
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‘भान’ शब्द का क्या अर्थ है?
होश / चेतना / समझ।
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‘अपनापा’ शब्द का क्या अर्थ है?
अपनत्व / आत्मीयता।
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गाँव के लोग रखमाबाई को किस रूप में जानते थे?
एक स्त्री जिसके यहाँ लेखक के पिता समय व धन बर्बाद करते थे।
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गणपा कौन था जिसे खेतों पर भेजने की बात दादा ने की थी?
लेखक का छोटा भाई।
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आनंदा ने अपनी पुरानी पुस्तकों को किस प्रकार के थैले में रखा था?
लट्ठे (मोटे सूती कपड़े) के बने थैले में।
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बालुगड़ी की माटी का रंग कैसा था जिससे लेखक की धोती मटमैली हो गई थी?
लाल रंग।
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‘जूझ’ आत्मकथा से हमें मुख्य रूप से क्या प्रेरणा मिलती है?
दृढ़ इच्छाशक्ति, श्रमशीलता और गुरु के मार्गदर्शन से जीवन की हर विषम परिस्थिति पर विजय पाई जा सकती है।