उमाशंकर जोशी जीवन परिचय, कृतित्व एवं काव्यगत विशेषताएँ
“गुजराती साहित्य के शिखर पुरुष और अनिवार्य हिंदी के पाठ्यक्रम में शामिल सुप्रसिद्ध कवि”
(पुस्तकें: विश्वशांति, निशीथ, गंगोत्री, प्राचीना, आतिथ्य)
1. जीवन वृत्तांत – जन्म और जन्म स्थान
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जन्म : 21 जुलाई, 1911
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जन्म स्थान : साबरकांठा जिला, गुजरात के बामना गाँव में।
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वास्तविक नाम : रघुपति सहाय
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पिता : गोरख प्रसाद (वकील एवं कवि)
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प्रारंभिक जीवन : सुख-सुविधाओं में बीता, परंतु वैवाहिक जीवन कष्टमय रहा।
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राष्ट्रवादी गतिविधि : गांधी जी के विचारों से प्रभावित होकर सन् 1930 के सत्याग्रह आंदोलन में सक्रिय भाग लिया, जिसके कारण जेल भी गए (डेढ़ वर्ष)।
2. शिक्षा
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प्रारंभिक शिक्षा : गाँव बामना एवं ईडर (गुजरात) में।
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उच्च शिक्षा : मुंबई विश्वविद्यालय (एलफिंस्टन कॉलेज) से अर्थशास्त्र एवं इतिहास में स्नातक (B.A.)।
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आई.सी.एस. परीक्षा : चयन होने के बावजूद देश सेवा के जुनून में त्यागपत्र दे दिया।
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एम.ए. : गुजराती साहित्य में एम.ए. (सर्वोच्च अंकों के साथ)।
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विशेष अध्ययन : गुजराती एवं संस्कृत साहित्य का गहन अध्ययन किया।
3. कृतित्व – प्रमुख रचनाएँ, पत्रकारिता, पुरस्कार
(क) प्रमुख रचनाएँ
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काव्य संग्रह :
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✓ ‘विश्वशांति’
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✓ ‘गंगोत्री’
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✓ ‘निशीथ’
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✓ ‘प्राचीना’
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✓ ‘आतिथ्य’
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✓ ‘वसंत वर्षा’
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समग्र कविता : ‘समग्र कविता’
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अनिवार्य हिंदी (कक्षा 12) में कविताएँ :
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✓ ‘छोटा मेरा खेत’
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✓ ‘बगुलों के पंख’(मूल गुजराती से हिंदी रूपांतरण: रघुवीर सहाय)
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गद्य रचनाएँ :
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✓ ‘सापना भारा’ (उपन्यास)
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✓ ‘शहीद’ (एकांकी संग्रह)
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✓ ‘श्रावणी मेलो’ (कहानी संग्रह)
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✓ ‘आखो एक अध्ययन’ (आलोचना)
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(ख) पत्रकारिता और कार्यक्षेत्र
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✓ ‘संस्कृति’ पत्रिका का संपादन और प्रकाशन।
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✓ गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति (Vice-Chancellor) रहे।
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✓ साहित्य अकादमी (दिल्ली) के अध्यक्ष रहे।
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✓ राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहे।
(ग) पुरस्कार
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★ ज्ञानपीठ पुरस्कार (1967) – ‘निशीथ’ के लिए (कुवेम्पु के साथ संयुक्त रूप से)
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★ साहित्य अकादमी पुरस्कार (1973) – ‘कवि नी श्रद्धा’ (आलोचना)
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★ रणजीतराम सुवर्ण चंद्रक (1939)
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★ सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार
4. मृत्यु
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19 दिसंबर, 1988 को मुंबई में निधन हुआ।
मृत्यु संबंधी प्रसिद्ध पंक्तियाँ –साहित्य का दीप जलाकर,जीवन पथ आलोकित कर गए,मानवता के हित समर्पित होकर,जोशी जी हमसे विदा हो गए।
5. काव्यगत प्रमुख विशेषताएँ
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मानवतावादी और गांधीवादी चेतना : उनकी कविताओं में विश्व शांति, मानव कल्याण और शोषितों के प्रति गहरी सहानुभूति है।
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प्रकृति सौंदर्य और रोमानियत : ‘बगुलों के पंख’ में प्रकृति के चित्र अत्यंत जीवंत और सौंदर्यपूर्ण हैं।
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सृजन कर्म का अनूठा दर्शन : ‘छोटा मेरा खेत’ में कविता रचना की प्रक्रिया को पवित्र और शाश्वत बताया है।
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सहज, प्रतीकात्मक और बिंबात्मक शैली : साधारण प्रतीकों (खेत, बीज, पन्ना, पंख आदि) के माध्यम से जीवन के बड़े सत्यों को उजागर करते हैं।
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भाषा में संगीत और प्रवाह : उनकी भाषा सरल, मधुर और भावपूर्ण है, जो पाठक के हृदय को छूती है।
छोटा मेरा खेत VS बगुलों के पंख
| बिंदु | छोटा मेरा खेत | बगुलों के पंख |
| विषय | कविता-रचना की प्रक्रिया और सृजन का दर्शन | प्रकृति-सौंदर्य और आकाश में उड़ते बगुलों का दृश्य |
| प्रतीक | कागज का पन्ना = छोटा खेत, कविता = बीज | बगुले = सौंदर्य, स्वतंत्रता, शांति |
| मुख्य भाव | सृजन की पवित्रता, शाश्वतता और लोकमंगल | सौंदर्य, समरसता और प्रकृति के प्रति प्रेम |
| विशेषता | मानव श्रम की तुलना सृजन कर्म से | दृश्य-चित्रण की अद्भुत बिंब योजना |