Tag Archives: आरपीएससी फर्स्ट ग्रेड हिंदी काव्यशास्त्र

डॉ. प्रभा खेतान — साहित्यिक परिचय एवं प्रमुख रचनाएँ(dr. prabha khetan sahityik parichay evam pramukh rachnayen)

डॉ. प्रभा खेतान — साहित्यिक परिचय एवं प्रमुख रचनाएँ डॉ. प्रभा खेतान (1942–2009) समकालीन हिंदी साहित्य की अत्यंत प्रखर, निर्भीक और सशक्त नारीवादी कथाकार, कवयित्री, अनुवादक तथा विचारक थीं। उन्होंने अपनी रचनाओं में पितृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था, स्त्री की आर्थिक-दैहिक स्वायत्तता और महानगरीय जीवन की विसंगतियों का अत्यंत बेबाक और संवेदनात्मक अंकन किया। 1. संक्षिप्त जीवन परिचय विवरण तथ्य जन्म 1 ...

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रीतिकाल: रस एवं नायिका-भेद निरूपण (reetikal: ras evam nayika-bhed nirupan)

रीतिकाल: रस एवं नायिका-भेद निरूपण  रीतिकाल (संवत् 1700–1900 वि.) में लक्षण-ग्रंथ परंपरा के अंतर्गत रस और नायिका-भेद का शास्त्रीय, सूक्ष्म और बहुआयामी निरूपण हुआ। सामंती दरबारी परिवेश और शृंगार-प्रियता के कारण इस युग के आचार्यों ने संस्कृत काव्यशास्त्र की परंपरा को ब्रजभाषा में पद्यबद्ध रूप में प्रस्तुत किया। 1. रीतिकाल में रस-निरूपण का विस्तृत स्वरूप (क) आधार-ग्रंथ एवं दार्शनिक पृष्ठभूमि: ...

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भारतेन्दु हरिश्चंद्र: प्रमुख रचनाएँ एवं पत्र-पत्रिकाएँ(bharatendu harishchandra: pramukh rachnayen evam patra-patrikaen)

भारतेन्दु हरिश्चंद्र: प्रमुख रचनाएँ एवं पत्र-पत्रिकाएँ इतिहास एवं पुरातत्व कश्मीर-कुसुम महाराष्ट्र देश का इतिहास रामायण का समय अग्रवालों की उत्पत्ति खत्रियों की उत्पत्ति बादशाह दर्पण बूँदी का राजवंश उदय-पुरोदय पुरावृत्त संग्रह दिल्ली दरबार कालचक्र इत्यादि पत्र-पत्रिकाएँ कवि वचन सुधा (1868 ई०) हरिश्चन्द्र मैगजीन (1873 ई०): यह बाद में ‘हरिश्चन्द्र चन्द्रिका’ के नाम से प्रकाशित हुई। बाला बोधिनी (1874 ई०): महिलाओं ...

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भारतेन्दु हरिश्चंद्र के अनूदित नाटक(bharatendu harishchandra ke anudit natak)

भारतेन्दु हरिश्चंद्र के अनूदित नाटक भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने संस्कृत, प्राकृत, बांग्ला और अंग्रेजी भाषाओं के कुल 8 महत्वपूर्ण नाटकों का हिंदी में अनुवाद किया। उनके द्वारा अनूदित नाटकों की सूची निम्नलिखित है: नाटक का नाम मूल भाषा / लेखक अनूदित रूप / विधा विद्यासुंदर (1868 ई.) बांग्ला (मूलतः संस्कृत चोरपंचाशिका पर आधारित) नाटक (प्रेम कथा) पाखंड विडंबन (1872 ई.) संस्कृत ...

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भारतेन्दु हरिश्चंद्र के प्रमुख मौलिक नाटक(bharatendu harishchandra ke pramukh maulik natak)

भारतेन्दु हरिश्चंद्र के प्रमुख मौलिक नाटक आधुनिक हिंदी साहित्य और नाट्य विधा के जनक भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने कुल मिलाकर लगभग 17 नाटकों की रचना की, जिनमें 9 मौलिक नाटक (तथा प्रहसन/नाटिका) और शेष अनूदित नाटक हैं। नाटक का नाम रचना वर्ष विधा / नाट्य रूप प्रमुख विषय / विशेषता वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति 1873 ई. प्रहसन पाखंडी धर्मावलंबियों, मांस-मदिरा ...

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विलायत में दादाभाई नौरोजी को ‘काला’ कहे जाने पर बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ की काव्य-पंक्तियाँ

दादाभाई नौरोजी पर बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ की ऐतिहासिक काव्य-टिप्पणी ब्रिटिश संसद (हाउस ऑफ कॉमन्स) के चुनाव (1892 ई.) के दौरान ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री लॉर्ड सैलिसबरी (Lord Salisbury) ने दादाभाई नौरोजी के लिए नस्लभेदी टिप्पणी करते हुए उन्हें “काला आदमी” (Black Man) कहा था। इस अपमानजनक वक्तव्य पर भारतेंदु युगीन प्रमुख साहित्यकार व राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ ...

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हिंदी का मिल्टन और हिंदी का सबसे उद्दण्ड(hindi ka milton aur hindi ka sabse uddand)

हिंदी का मिल्टन :- केशवदास मिश्रबन्धुओं ने केशवदास को हिंदी का मिल्टन क्यों कहा? तुलना का आधार: प्रसिद्ध अंग्रेज़ी महाकवि जॉन मिल्टन (Paradise Lost के रचयिता) अपनी भाषा की शास्त्रीय गंभीरता, उच्च कल्पना, पांडित्य और दृष्टिहीनता के लिए जाने जाते हैं। हिंदी में आचार्य केशवदास को उनके असाधारण संस्कृत-निष्ठ पांडित्य, महाकाव्यात्मक भव्यता (रामचंद्रिका), क्लिष्ट शब्दावली और शास्त्रीय नियमों के कठोर ...

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बिहारी सतसई पर प्रमुख कवि(bihari satsai par pramukh kavi)

बिहारी सतसई पर प्रमुख कवि बिहारी सतसई की प्रथम टीका लिखने वाले – कृष्ण कवि हिन्दी में समास पद्धति की शक्ति का सर्वाधिक परिचय बिहारी ने दिया है। बिहारी सतसई के दोहों का पल्लवन रोला छंद में करने वाले – अंबिकादत्त व्यास बिहारी सतसई की टीका सवैया छंद में करने वाले – कृष्ण कवि बिहारी सतसई को शक्कर की रोटी ...

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आचार्य रामचंद्र शुक्ल के प्रमुख कथन (आधुनिक काल)(acharya ramchandra shukl ke pramukh kathan (aadhunik kal))

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के प्रमुख कथन (आधुनिक काल) 1. रामप्रसाद निरंजनी भाषा योगवासिष्ठ: “अब तक पाई गई पुस्तकों में यह ‘भाषा योगवासिष्ठ’ ही सबसे पुराना है, जिसमें गद्य अपने परिष्कृत रूप में दिखाई पड़ता है।” प्रथम प्रौढ़ गद्य लेखक: “भाषा योगवासिष्ठ को परिमार्जित गद्य की प्रथम पुस्तक और रामप्रसाद निरंजनी को प्रथम प्रौढ़ गद्य लेखक मान सकते हैं।” 2. इंशा ...

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आ रामचंद्र शुक्ल के कथन (रीतिकाल के संबंध में)(aa ramchandra shukl ke kathan (reetikal ke sambandh men))

बिहारी के बारे में कथन :- “इसका एक-एक दोहा हिन्दी साहित्य में एक-एक रत्न माना जाता है।” “बिहारी की भाषा चलती होने पर भी साहित्यिक है।” “इसमें तो रस के ऐसे छींटे पड़ते हैं जिनसे हृदय-कलिका थोड़ी देर के लिए खिल उठती है।” “जिस कवि में कल्पना की समाहार शक्ति के साथ भाषा की समाहार शक्ति जितनी अधिक होगी उतनी ...

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आधुनिक काल के कवियों के उपनाम(aadhunik kaal ke kaviyon ke upnaam)

आधुनिक काल के कवियों के उपनाम आधुनिक काल का अजातशत्रु :- भारतेंदु आधुनिक हिंदी काव्य का वैतालिकः- भारतेंदु आधुनिक का सूरदास :- हरिऔध (डॉ. गणपति चंद्र गुप्त ने अनुसार) आधुनिक युग के पद्माकर :- जगन्नाथदास रत्नाकर आधुनिक युग के चारण कवि :- दिनकर आधुनिक युग का तुलसी दास :- मैथिलीशरण गुप्त आधुनिक हिंदी साहित्य के बापू :- सियाराम शरण गुप्त ...

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‘अजपा जाप’ से आप क्या समझते है(‘ajpa jap’ se aap kya samajhte hai?)

‘अजपा जाप’ से आप क्या समझते है ” आध्यात्मिक मार्ग में ईश्वर के किसी भी नाम का ध्यानपूर्वक निरंतर रटन करना ” जप या जाप ” कहलाता है जाप तीन प्रकार के होते है 1 – वाचिक जाप (बोल कर जपना जिसे दूसरे लोग भी सुन सकते है 2 – उपांशु जाप (होठ हिले पर दूसरे लोग नही सुन सके, ...

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फणीश्वरनाथ रेणु जीवन परिचय एवं काव्यगत  विशेषताएँ

फणीश्वरनाथ रेणु जीवन परिचय एवं काव्यगत  विशेषताएँ फणीश्वरनाथ रेणु आधुनिक हिंदी साहित्य की ‘आंचलिक उपन्यास’ धारा के प्रवर्तक और मूर्धन्य कथाकार हैं। उन्होंने अपनी कृतियों में ग्राम्यांचल की मिट्टी की सोंधी गंध, लोक-संस्कृति और जन-जीवन के विविध रंगों को सजीवता के साथ प्रस्तुत किया है। 1. जीवन वृत्तांत (जन्म और जन्म स्थान) जन्म : 4 मार्च 1921 जन्म स्थान : ...

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डॉ. हरिवंश राय बच्चन जीवन परिचय एवं काव्यगत  विशेषताएँ

डॉ. हरिवंश राय बच्चन जीवन परिचय एवं काव्यगत  विशेषताएँ (पुस्तक: मधुशाला) 1. जीवन वृत्तांत – जन्म और जन्म स्थान जन्म : 27 नवंबर, 1907 को हुआ था। बचपन में इन्हें प्यार से ‘बच्चन’ कहा जाता था। जन्म स्थान : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) के पास प्रतापगढ़ जिले के पट्टी नामक गाँव (बाबू पट्टी) में। पारिवारिक पृष्ठभूमि : इनके पिता ...

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आलोक धन्वा जीवन परिचय, कृतित्व एवं काव्यगत विशेषताएँ

आलोक धन्वा जीवन परिचय, कृतित्व एवं काव्यगत विशेषताएँ (पुस्तकें: जनता का आदमी, भागी हुई लड़कियाँ, ब्रूनो की बेटियाँ, पतंग) “जन-चेतना और सामाजिक संघर्षों के बेहद संवेदनशील कवि” 1. जीवन वृत्तांत – जन्म और जन्म स्थान जन्म : 2 जुलाई, 1948 जन्म स्थान : बिहार के मुंगेर जिले के बेगूसराय के पास (अब लखीसराय जिले के) बिहपुर गाँव में हुआ था। ...

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