डॉ. हरिवंश राय बच्चन जीवन परिचय एवं काव्यगत विशेषताएँ
(पुस्तक: मधुशाला)
1. जीवन वृत्तांत – जन्म और जन्म स्थान
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जन्म : 27 नवंबर, 1907 को हुआ था। बचपन में इन्हें प्यार से ‘बच्चन’ कहा जाता था।
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जन्म स्थान : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) के पास प्रतापगढ़ जिले के पट्टी नामक गाँव (बाबू पट्टी) में।
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पारिवारिक पृष्ठभूमि : इनके पिता का नाम प्रताप नारायण श्रीवास्तव और माता का नाम सरस्वती देवी था। पहला विवाह श्यामा देवी से हुआ, जिनका तपेदिक (टीबी) से निधन हो गया। दूसरा विवाह तेजी बच्चन से हुआ।
सुपुत्र – अमिताभ बच्चन।
2. शिक्षा
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प्रारंभिक शिक्षा : स्थानीय पाठशाला से शिक्षा, जहाँ उर्दू और फारसी सीखी। प्रयाग से हाई स्कूल और इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया।
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उच्च शिक्षा : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. (M.A.) किया।
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कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पी.एच.डी. : वर्ष 1952 से 1954 के दौरान इंग्लैंड गए। वहाँ कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी कवि ‘डब्लू. बी. यीट्स’ (W.B. Yeats) के साहित्य पर शोध कर पी.एच.डी. (Ph.D.) की उपाधि हासिल की। वे कैम्ब्रिज से पी.एच.डी. करने वाले पहले भारतीय थे।
3. कृतित्व – प्रमुख रचनाएं, पत्रकारिता, पुरस्कार
(क) प्रमुख रचनाएँ
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★ मधु-काव्य (हालावाद) : ‘मधुशाला’ (1935 – उनकी ख्याति का मुख्य आधार), ‘मधुबाला’, ‘मधुकलश’। इन रचनाओं पर सूफी कवि उमर खैय्याम के दर्शन का गहरा प्रभाव है।
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★ अन्य काव्य संग्रह : ‘निशा निमंत्रण’, ‘एकांत संगीत’, ‘आकुल अंतर’, ‘सतरंगिनी’, ‘मिलन यामिनी’, ‘दो चट्टानें’, ‘जाल समेटा’, ‘आरती और अंगारे’।
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★ ऐतिहासिक आत्मकथा (चार खंड) :
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क्या भूलूँ क्या याद करूँ
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नीड़ का निर्माण फिर
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बसेरे से दूर
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दशद्वार से सोपान तक
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★ अनुवाद : शेक्सपियर के नाटकों ‘मैकबेथ’ और ‘ओथेलो’ का सुंदर हिंदी अनुवाद किया।
(ख) पत्रकारिता और कार्यक्षेत्र
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▢ अध्यापन : इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी विभाग में प्राध्यापक (लेक्चरर) रहे।
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▢ आकाशवाणी : ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी), इलाहाबाद में निर्माता रहे।
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▢ विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ : वर्ष 1955 में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में विशेष हिंदी अधिकारी (हिंदी विशेषज्ञ) नियुक्त हुए और हिंदी के विकास हेतु महत्वपूर्ण कार्य किया।
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▢ राज्यसभा सदस्य : 1966 में राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया गया।
(ग) पुरस्कार
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★ साहित्य अकादमी पुरस्कार (1968) : काव्य संग्रह ‘दो चट्टानें’ के लिए।
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★ सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार : साहित्यिक योगदान के लिए।
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★ सरस्वती सम्मान (1991) : आत्मकथा के चारों खंडों के लिए के.के. बिड़ला फाउंडेशन द्वारा प्रथम ‘सरस्वती सम्मान’।
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★ पद्म भूषण (1976) : भारत सरकार द्वारा देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से अलंकृत।
4. मृत्यु
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जीवन के अंतिम वर्षों में वे मुंबई में रहने लगे थे। लंबे समय तक सांस की बीमारी से जूझते हुए हिंदी के इस महान गीतकार और कवि का 18 जनवरी, 2003 को मुंबई में 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
मधुशाला
“मंदिर – मस्जिद बैर कराते,
मधुशाला सबको एक बनाती॥”
5. काव्यगत प्रमुख विशेषताएँ
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★ हालावाद के प्रवर्तक : बच्चन जी हिंदी साहित्य में ‘हालावाद’ के जनक माने जाते हैं। यहाँ ‘हाला’, ‘प्याला’ और ‘मधुशाला’ जीवन के दुखों को भूलकर प्रेम, समता और मस्ती से जीने के प्रतीक हैं।
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★ वैयक्तिक अनुभूतियों की सहज अभिव्यक्ति : निजी जीवन के सुख-दुख, निराशा और प्रेम को बिना लाग-लपेट के सीधे और सरल शब्दों में व्यक्त किया।
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★ अद्भुत गेयता और संगीतात्मकता : कविताओं में आंतरिक लय और संगीत होता है। ‘मधुशाला’ की पंक्तियाँ आज भी लोगों की जुबान पर रहती हैं।
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★ सरल और व्यावहारिक भाषा-शैली : आम बोलचाल की सहज खड़ी बोली का प्रयोग। उनकी शैली में विशेष आकर्षण और संवाद करने की क्षमता है।
मधुशाला
मदिरालय जाने को घर से चलता है पीने वाला,
किस पथ से जाऊँ असमंजस में है वह भोलाभाला,
अलग-अलग पथ बताते सब पर मैं यह बतलाता हूँ,
राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला॥