भारतेन्दु हरिश्चंद्र के अनूदित नाटक
भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने संस्कृत, प्राकृत, बांग्ला और अंग्रेजी भाषाओं के कुल 8 महत्वपूर्ण नाटकों का हिंदी में अनुवाद किया। उनके द्वारा अनूदित नाटकों की सूची निम्नलिखित है:
| नाटक का नाम | मूल भाषा / लेखक | अनूदित रूप / विधा |
| विद्यासुंदर (1868 ई.) | बांग्ला (मूलतः संस्कृत चोरपंचाशिका पर आधारित) | नाटक (प्रेम कथा) |
| पाखंड विडंबन (1872 ई.) | संस्कृत (कृष्णमिश्र रचित नाटक ‘प्रबोधचंद्रोदय’ के तीसरे अंक का अनुवाद) | रूपक (भक्ति व पाखंड खंडन) |
| धनंजय विजय (1873 ई.) | संस्कृत (कंचन कवि रचित नाटक) | व्यायोग (महाभारत कालीन प्रसंग) |
| मुद्रा राक्षस (1875 ई.) | संस्कृत (विशाखदत्त रचित प्रसिद्ध नाटक) | राजनीतिक नाटक |
| दुर्लभ बंधु (1873 ई.) | अंग्रेजी (Shakespeare के नाटक The Merchant of Venice का अनुवाद) | नाटक |
| कर्पूरमंजरी (1875 ई.) | प्राकृत (राजशेखर रचित सट्टक) | सट्टक (गीति-नाट्य रूप) |
| सत्यनारायण व्रत कथा | संस्कृत | कथा-रूपक |
| मंजरी (अपूर्ण) | संस्कृत | नाटिका |
प्रमुख वैचारिक बिंदु
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सांस्कृतिक एवं भाषांतर का विस्तार: भारतेंदु जी ने केवल मौलिक रचनाएँ ही नहीं कीं, बल्कि अन्य भाषाओं के श्रेष्ठ साहित्य को हिंदी पाठकों तक पहुँचाने के लिए अनूदित नाटकों का भी सफल प्रयोग किया।
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रंगमंच की दृष्टि से अनुकूलन: इन अनुवादों में उन्होंने मूल रचना की आत्मा को बनाए रखते हुए हिंदी क्षेत्र की लोक-रुचि और संवाद-शैली के अनुकूल परिमार्जन किया।
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विद्या-सुन्दर (1868 ई०): संस्कृत में रचित चौरकवि के नाटक का बँगला अनुवाद।
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पाखण्ड विडम्बन (1872 ई०): कृष्ण मिश्र कृत संस्कृत नाटक ‘प्रबोध चन्द्रोदय’ के तृतीय अंक का अनुवाद।
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धनंजय विजय (1873 ई०): कांचन कवि द्वारा रचित संस्कृत नाटक का अनुवाद।
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कर्पूर मंजरी (1875 ई०): राजशेखर कृत प्राकृत सट्टक का अनुवाद।
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सत्य हरिश्चन्द्र (1875 ई०): क्षेमेन्द्रकृत संस्कृत नाटक ‘चण्डकौशिक’ का अनुवाद।
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भारत जननी (1877 ई०): बँगला नाट्यगीत ‘भारतमाता’ का अनुवाद।
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मुद्राराक्षस (1877 ई०): विशाखदत्त के संस्कृत नाटक ‘मुद्राराक्षस’ का अनुवाद।
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दुर्लभ बन्धु (1880 ई०): शेक्सपीयर के अंग्रेजी नाटक ‘मर्चेन्ट ऑफ वेनिस’ (Merchant of Venice) का अनुवाद।