गोस्वामी तुलसीदास जीवन परिचय, कृतित्व एवं काव्यगत विशेषताएँ

गोस्वामी तुलसीदास जीवन परिचय, कृतित्व एवं काव्यगत विशेषताएँ

“सगुण रामभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि और जन-मानस के पथ-प्रदर्शक”
(पुस्तकें: रामचरितमानस, विनयपत्रिका, कवितावली, गीतावली, दोहावली)

1. जीवन वृत्तांत – जन्म और जन्म स्थान

  • जन्म : सन 1532 (संवत 1589) ‘अभुक्त मूल नक्षत्र’ में हुआ था।
  • जन्म स्थान : दो मत प्रचलित हैं–
    • ① राजापुर (बांदा जिला, उत्तर प्रदेश) – सर्वमान्य जन्म स्थान।
    • ② सोरो (कासगंज/एटा जिला, उत्तर प्रदेश) – कुछ विद्वान यहाँ जन्म मानते हैं।
  • पिता : पंडित आत्माराम दुबे
  • माता : हुलसी देवी
  • त्याग : दुर्लभ नक्षत्र के कारण माता-पिता ने बचपन में त्याग दिया।
  • पालन-पोषण : दासी मुनिया एवं बाबा नरहरिदास ने किया।
  • विवाह : परम विदुषी रत्नावली से हुआ।
  • वैराग्य : पत्नी की फटकार (अस्थि चर्म मय देह यह…) के बाद वैराग्य जागा और वे पूर्णतः राम-भक्ति में लीन हो गए।

2. शिक्षा

  • दीक्षा गुरु : स्वामी नरहरिदास (नरहर्यानंद) – इन्होंने दीक्षा दी और सर्वप्रथम राम-कथा सुनाई।
  • सनातन गुरु : शेष सनातन जी के सानिध्य में 15 वर्षों तक रहकर वेद, वेदांग, दर्शन, इतिहास, पुराण और उपनिषदों का गहन अध्ययन किया।
  • शिक्षा : प्रारंभिक शिक्षा के बाद गहन शास्त्रीय अध्ययन से वे महान विद्वान और शास्त्रज्ञ बने।
  • अध्ययन की रुचि : धर्म, वेद, पुराण, दर्शन, इतिहास के साथ लोकजीवन एवं भाषा पर भी गहरी पकड़ बनाई।
(पुस्तकें: वेद, पुराण, उपनिषद, राम-कथा)

3. कृतित्व – प्रमुख रचनाएं और रचनाओं के महत्वपूर्ण तथ्य

(क) प्रमुख रचनाएं (12 प्रामाणिक ग्रंथ)
  • बड़े ग्रंथ (5) : ‘रामचरितमानस’, ‘विनयपत्रिका’, ‘कवितावली’, ‘गीतावली’, ‘दोहावली’।
  • छोटे ग्रंथ (7) : ‘कृष्णगीतावली’, ‘बरवै रामायण’, ‘पार्वती मंगल’, ‘जानकी मंगल’, ‘रामाज्ञा प्रश्न’, ‘वैराग्य संदीपनी’, ‘रामलला नहछू’।
(ख) रचनाओं के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य
  • रामचरितमानस : अवधी भाषा में रचित। प्रारंभ – सन 1574 (संवत 1631), अयोध्या में। पूर्ण होने में समय – 2 वर्ष 7 महीने 26 दिन। 7 कांड – बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड, उत्तरकांड।
  • विनयपत्रिका : ब्रज भाषा की रचना। कलयुग के संताप से मुक्ति हेतु भगवान राम के दरबार में विनय (अर्जी) प्रस्तुत। ‘शांत रस’ की प्रधानता।
  • कवितावली : ब्रज भाषा में ‘कवित्त’ और ‘सवैया’ छंदों में राम-कथा। उत्तरकांड में कलियुग की भयानक बेरोजगारी, भुखमरी आदि का सजीव चित्रण।
  • भाषा का अनूठा विभाजन :
    • कथात्मक ग्रंथों के लिए – अवधी भाषा
    • मुक्तक गीतों/पदों के लिए – ब्रज भाषा

4. मृत्यु

  • अंतिम समय : काशी के असी घाट पर व्यतीत किया।
  • मृत्यु : सन 1623 (संवत 1680), श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन असी घाट पर उनका निधन हुआ।
मृत्यु संबंधी प्रसिद्ध दोहा –
संवत सोरह सौ असी, असी गंग के तीर।
श्रावण शुक्ला सप्तमी, तुलसी तज्यो शरीर।।

5. काव्यगत प्रमुख विशेषताएँ

  • समन्वय की विराट चेष्टा : आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के अनुसार, ‘तुलसी का संपूर्ण काव्य समन्वय की विराट चेष्टा है।’ शैव-वैष्णव, ज्ञान-भक्ति, राजा-प्रजा तथा भाषा-संस्कृति के भेदों को मिटाकर समाज को एक सूत्र में पिरोया।
  • मर्यादावादी दृष्टिकोण : तुलसी के राम ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ हैं। आदर्श राजा, आदर्श पुत्र, आदर्श भाई और आदर्श पत्नी के रूप प्रस्तुत कर नैतिक आचार संहिता (Moral Code) स्थापित की।
  • रस और छंद योजना : भक्ति और शांत रस मुख्य हैं, परंतु रामचरितमानस में रौद्र, वीर, वीभत्स और श्रृंगार रस का भी सुंदर परिपाक। दोहा, चौपाई, कवित्त, सवैया, बरवै आदि छंदों के प्रयोग में अत्यंत सिद्धहस्त।
  • लोकमंगल की भावना : ‘स्वांतः सुखाय’ के साथ-साथ ‘लोकमंगल’ के सर्वश्रेष्ठ हिमायती। समाज को पतन से बचाना और मानवीय मूल्यों की स्थापना करना ही लक्ष्य रहा।

‘प्रसिद्ध पंक्तियाँ’

  • • परहित सरिस धरम नहि भाई।
    पर पीड़ा सम नहि अधमाई।।
  • • रामहि केवल प्रेम पिआरा।
    जानि लेहु जो जाननिहारा।।
  • • कीरति भनिति भूति भलि सोई।
    सुरसरि सम सब कर हित होई।।

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