चन्द्रगुप्त नाटक प्रश्नोत्तरी(Chandra Gupta Natak Quiz)

?? चन्द्रगुप्त नाटक प्रश्नोत्तरी??

1. चन्द्रगुप्त नाटक कब प्रकाशित हुआ?

(A) 1934

(B) 1933

(C) 1935

(D) 1931?

?प्रकाशन :- 1931ई.

2. चन्द्रगुप्त नाटक के संबंध में कौनसा कथन सत्य नही है?

(A) इस नाटक के चार अंक है।

(B) इस नाटक के चारों अंकों में कुल दृश्य :- 33 है।?

(C) चौथे अंक में सर्वाधिक दृश्य (14) है।

(D) तीसरे अंक में सबसे कम दृश्य (9) है।

? इस नाटक के चारों अंकों में कुल दृश्य :- 44 है।
◆ चारों अंकों में कुल दृश्य :- 44 दृश्य(क्रमशः 11,10,9,14)

3. चन्द्रगुप्त नाटक कुल कितने पात्र है?

(A) 30

(B) 44

(C) 35?

(D) 40

? कुल पात्र :- 35( 24 पुरुष और 11स्त्री पात्र)

4. चन्द्रगुप्त नाटक में इतिहास की कौनसी घटना उल्लेख नही है?

(A) अलक्षेद्र का आक्रमण

(B) नंदकुल की पराजय

(C) सिल्यूकस का पराभव।

(D) सिल्यूकस की जीत

◆ इतिहास की तीन घटनाएँ :-
● अलक्षेद्र का आक्रमण
● नंदकुल की पराजय
● सिल्यूकस का पराभव(पराजय)

5. चन्द्रगुप्त नाटक की कौनसी विषय वस्तु है?

(a) चन्द्रगुप्त मौर्य के समय भारत परिस्थितियां का चित्रण

(b) विदेशी आक्रमण का चित्रण ( सिकन्दर और सिल्यूकस का आक्रमण)

(c) आंतरिक कूटनीतियों का चित्रण

(d) विदेशियों से भारत का संघर्ष और उस
संघर्ष में भारत की विजय की थीम उठायी गयी
है।

(A) a और b

(B) bऔर c

(C) a,cऔर d

(D) a,b,c और d

? चन्द्रगुप्त मौर्य के समय भारत परिस्थितियां का चित्रण
● विदेशी आक्रमण का चित्रण ( सिकन्दर और सिल्यूकस का आक्रमण)
● आंतरिक कूटनीतियों का चित्रण
● विदेशियों से भारत का संघर्ष और उस
संघर्ष में भारत की विजय की थीम उठायी गयी
है।

6. चन्द्रगुप्त नाटक में कार्नेलिया की सहेली का क्या नाम था?

(A) नीला

(B) लीला

(C) एलिस?

(D) कल्याणी

?एलिस :- कार्नेलिया की सहेली
● नीला :- कल्याणी की सहेली
● लीला :- कल्याणी की सहेली

7. चन्द्रगुप्त नाटक में कल्याणी की सहेली का क्या नाम था?

(A) नीला

(B) लीला

(C) a और b

(D) एलिस

?एलिस :- कार्नेलिया की सहेली
● नीला :- कल्याणी की सहेली
● लीला :- कल्याणी की सहेली

8. चन्द्रगुप्त नाटक के संबंध में निम्नलिखित में से कौनसा नारी पात्र सुमेलित नही है?

(A) कल्याणी :- मगध राजकुमारी

(B) अलका :- तक्षशिला की राजकुमारी

(C) सुवासिनी :- सिंधु देश की कुमारी?

(D) कार्नेलिया :- सिल्यूकस की कन्या

? सुवासिनी :- शकटार की कन्या,नन्द की नर्तकी,चाणक्य की पूर्व परिचिता,राक्षस की प्रणयिनी
● मालविका :-सिंधु देश की कुमारी
● कल्याणी :- मगध राजकुमारी
● अलका :- तक्षशिला की राजकुमारी

9. चन्द्रगुप्त नाटक के संबंध में निम्नलिखित में से कौनसा पुरुष पात्र सुमेलित नही है?

(A) आंभीक :- तक्षशिला का राजकुमार

(B) नंद :- मगध राजा

(C) राक्षस :- मगध का अमात्य

(D) पर्वेतेश्वर :- मगध का मंत्री?

? पर्वेतेश्वर (पंजाब का राजा)
● शकटार :- मगध का मंत्री
● आंभीक :- तक्षशिला का राजकुमार
● नंद :- मगध राजा
● राक्षस :- मगध का अमात्य
● वररुचि (कात्यायन) :- मगध का अमात्य
● शकटार :- मगध का मंत्री

10.”मेरा देश है मेरे पहाड़ हैं, नदियाँ हैं और मेरे जंगल हैं। इस भूमि के एक-एक परमाणु मेरे हैं और मेरे शरीर के एक-एक क्षुद्र अंश उन्हीं परमाणुओं के बने    है। फिर मैं वहाँ जाऊँगी यवन।” चन्द्रगुप्त नाटक से यह कथन किसका है?

        (A) कल्याणी

(B) अलका ?

(C) सुवासिनी

(D) कार्नेलिया

? “मेरा देश है मेरे पहाड़ हैं, नदियाँ हैं और मेरे जंगल हैं। इस भूमि के एक-एक परमाणु मेरे हैं और मेरे शरीर के एक-एक क्षुद्र अंश उन्हीं परमाणुओं के बने है। फिर मैं वहाँ जाऊँगी यवन।” (अलका का कथन सिल्यूकस के प्रति)

11.”त्याग और क्षमा, तप और विद्या, तेज और सम्मान के लिए हैं लोहे और सोने के सामने सिर झुकाने के लिए हम लोग ब्राह्मण नहीं बने हैं।”
चन्द्रगुप्त नाटक से यह कथन किसका है?

(A) वररुचि

(B) नंद

(C) राक्षस

(D) चाणक्य?

?”त्याग और क्षमा, तप और विद्या, तेज और सम्मान के लिए हैं लोहे और सोने के सामने सिर झुकाने के लिए हम लोग ब्राह्मण नहीं बने हैं।”
(चाणक्य का कथन वररुचि के प्रति)

12. “वह स्त्री जीवन का सत्य है। जो कहती है कि जो मैं नहीं जानतीं वह दूसरे को धोखा देती है।” चन्द्रगुप्त नाटक से यह कथन किसका है?

(A) कल्याणी

(B) अलका

(C) सुवासिनी ?

(D) कार्नेलिया

?” वह स्त्री जीवन का सत्य है। जो कहती है कि जो मैं नहीं जानतीं वह दूसरे को धोखा देती है, अपने को भी प्रवंचित करती है। धधकते हुए रमणी-वक्ष पर हाथ रखकर उसी कम्पन में स्वर मिलाकर कामदेव गाता है और राजकुमारी वही काम-संगीत की तान सौंदर्य की रंगीन लहर वन कर, युवतियों के सुख में लज्जा और स्वास्थ्य की लाली बढाया करती है।” ( सुवासिनी का कथन )

13.”तुम मालव हो और यह मागध, यहीं तुम्हारे मान का अवसान है न? परन्तु आत्मसम्मान इतने ही से संतुष्ट नहीं होगा। मालव और मागध को भूलकर जब तुम आर्यावर्त्त का नाम, लोगे, तभी वह मिलेगा। क्या तुम नहीं देखते हो कि आगामी दिवसों में आर्यावर्त्त के सब स्वतंत्र राष्ट्र एक के अनन्तर दूसरे विदेशी विजेता से पददलित होंगे?” चन्द्रगुप्त नाटक में चाणक्य ने यह कथन किससे कहां है?

(A) चंद्रगुप्त

(B) नंद

(C) राक्षस

(D) शकटार

?”तुम मालव हो और यह मागध, यहीं तुम्हारे मान का अवसान है न? परन्तु आत्मसम्मान इतने ही से संतुष्ट नहीं होगा। मालव और मागध को भूलकर जब तुम आर्यावर्त्त का नाम, लोगे, तभी वह मिलेगा। क्या तुम नहीं देखते हो कि आगामी दिवसों में आर्यावर्त्त के सब स्वतंत्र राष्ट्र एक के अनन्तर दूसरे विदेशी विजेता से पददलित होंगे?” (चाणक्य का कथन चंद्रगुप्त के प्रति)

14.”मैं उसे जानने की चेष्टा कर रहा हूँ। आर्यावर्त्त का भविष्य लिखने के लिए कुचक्र और प्रतारणा की लेखनी और मसि प्रस्तुत हो रही है। उत्तरापथ के खण्ड राज्य द्वेष से जर्जर है। शीघ्र भयानक विस्फोट होगा।” यहां सिंहरण किसको जानने की चेष्टा कर रहे है?

(A) चंद्रगुप्त

    (B) नंद

    (C) चाणक्य?

    (D) शकटार

?”मैं उसे जानने की चेष्टा कर रहा हूँ। आर्यावर्त्त का भविष्य लिखने के लिए कुचक्र और प्रतारणा की लेखनी और मसि प्रस्तुत हो रही है। उत्तरापथ के खण्ड राज्य द्वेष से जर्जर है। शीघ्र भयानक विस्फोट होगा।” (सिंहरण का कथन चाणक्य के प्रति)

15.फूल हँसते आते हैं, मकरंद गिराकर मुरझा जाते हैं, आँसू से धरणी को भिगोकर चले जाते हैं। ….. क्या पृथ्वीतल रोने ही के लिए है? नहीं, सबके लिए एक ही नियम तो नहीं। कोई रोने के लिए है तो कोई हँसने के लिए।” चन्द्रगुप्त नाटक से यह कथन किसका है?

(A) कल्याणी

(B) अलका

(C) सुवासिनी

(D) मालविका?

?”फूल हँसते आते हैं, मकरंद गिराकर मुरझा जाते हैं, आँसू से धरणी को भिगोकर चले जाते हैं। एक स्निग्ध समीर का झोंका आता है, विश्वास फेंककर चला जाता है। क्या पृथ्वीतल रोने ही के लिए है? नहीं, सबके लिए एक ही नियम तो नहीं। कोई रोने के लिए है तो कोई हँसने के लिए।” (मालविका का स्वगत चिंतन)

◆ “जाओ प्रियतम ! सुखी जीवन बिताने के लिए, और मैं रहती हूँ चिरदुखी जीवन का अंत करने के लिए जीवन एक प्रश्न है, और मरण है उसका अटल उत्तर ।” (मालविका का स्वगत चिंतन)

16. “चलो अपना काम करो विवाद करना तुम्हारा काम नहीं।” चाणक्य का यह कथन किसके प्रति है?

(A) चंद्रगुप्त ?

(B) आंभीक

(C) वररुचि

(D) शकटार

? “महत्त्वाकांक्षा का मोती निष्ठुरता की सीपी में रहता है। चलो अपना काम करो विवाद करना तुम्हारा काम नहीं। अब तुम स्वच्छन्द होकर दक्षिणपथ जाने की आयोजना करो।” (चाणक्य का कथन, चंद्रगुप्त के प्रति)

17. “राज्य किसी का नहीं है। वह अनुशासन का है- भाई, तक्षशिला तुम्हारी नहीं और हमारी भी नहीं है।” चन्द्रगुप्त नाटक से यह कथन किसका है?

(A) कल्याणी

(B) अलका ?

(C) सुवासिनी

(D) कार्नेलिया

?”राज्य किसी का नहीं है। वह अनुशासन का है- भाई, तक्षशिला तुम्हारी नहीं और हमारी भी नहीं है। तक्षशिला आयावर्त का एक भू-भाग है, वह आर्यवर्त का होकर रहे, इसके लिए मर मिटो।”(अलका का कथन)

18. ‘अरूण यह मधुमय देश हमारा’ चन्द्रगुप्त नाटक में यह मार्मिक गीत किसने गाया ?

(A) कल्याणी

(B) अलका

(C) सुवासिनी

(D) कार्नेलिया?

? कार्नेलिया का ‘अरूण यह मधुमय देश हमारा’ शीर्षक गीत अत्यंत मार्मिक है।
● प्रसाद जी ने विदेशी पात्रों के मुख से भी भारतीय गौरव का कथन कराया है।

 

19.अरूण यह मधुमय देश हमारा।
जहां पहुंच जजान क्षितिज को.मिलतख एक सहारा।
सरस तामरस गर्भ विभा पर – नाच रही तरूशिखा मनहोर।
चन्द्रगुप्त नाटक की यह प्रस्तुत पंक्तियां किस अंक से है?

(A) पहले अंक से

(B) दुसरे अंक से

(C) तीसरे अंक से

(D) चौथे अंक से

? प्रस्तुत पंक्तियों ‘चन्द्रगुप्त के द्वितीय अंक
के प्रथम दृश्य से

◆ अरूण यह मधुमय देश हमारा।
जहां पहुंच जजान क्षितिज को.मिलतख एक सहारा।
सरस तामरस गर्भ विभा पर – नाच रही तरूशिखा मनहोर।
● प्रस्तुत पंक्तियों ‘चन्द्रगुप्त के द्वितीय अंक
के प्रथम दृश्य से
● इनमें सेनापति सिल्यूकस की पुत्री
कार्नेलिया ने गाया है। वह भारतीय संस्कृति
एवं दर्शन से प्रभावित है तथा चन्द्रगुप्त पर
आसक्त देते हुए कहती है ।
● नाटककार ने इन पंक्तियों में अर्थ गरिमा,
आवगत गव्यता, कल्पना की रमणीयता एवं
सौंदर्य का मार्मिक वर्णन किया।

20. चन्द्रगुप्त नाटक में कुल कितने गीत है?

(A) 10

(B) 15

(C) 11

(D)13?

? चन्द्रगुप्त’ नाटक में 13 गीत हैं- पहले अंक में दो, दूसरे में तीन, तीसरे में एक और चौथे में छः गीत हैं।

21. चन्द्रगुप्त नाटक में सर्वाधिक गीत किस अंक में है?

(A) पहले अंक में

(B) दुसरे अंक में

(C) तीसरे अंक में

(D) चौथे अंक में

? चौथे अंक में छः गीत हैं।
● चन्द्रगुप्त’ नाटक में 13 गीत हैं- पहले अंक में दो, दूसरे में तीन, तीसरे में एक और चौथे में छः गीत हैं।

22. “हिमाद्रि तुंग श्रृंगं से
प्रबुद्ध शुद्ध भारती
स्वयं प्रभा समुज्जवला स्वतंत्रता पुकारती
अमर्त्य वीरपुत्र हो, दृढ प्रतिज्ञ सोच लो,
प्रशस्त पुण्य पथं है – बढ़े चलों, बढ़े चलों।”
चन्द्रगुप्त नाटक में यह गीत किसने गाया ?

(A) कल्याणी

(B) अलका ?

(C) सुवासिनी

(D) कार्नेलिया

? “हिमाद्रि तुंग श्रृंगं से
प्रबुद्ध शुद्ध भारती
स्वयं प्रभा समुज्जवला स्वतंत्रता पुकारती
अमर्त्य वीरपुत्र हो, दृढ प्रतिज्ञ सोच लो,
प्रशस्त पुण्य पथं है – बढ़े चलों, बढ़े चलों।”
● चौथे अंक में अलका इस गीत को गाती हैं। इसका लक्ष्य जन मानस में राष्ट्रीय भावना जागृत करना है।

चन्द्रगुप्त नाटक (chandragupta natak)

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