शमशेर बहादुर सिंह जीवन परिचय, कृतित्व एवं काव्यगत विशेषताएँ

शमशेर बहादुर सिंह जीवन परिचय, कृतित्व एवं काव्यगत विशेषताएँ

(पुस्तकें: कुछ कविताएँ, चुका भी हूँ नहीं मैं, इतने पास अपने, बात बोलेगी)

हिंदी साहित्य में “कवियों का कवि”

1. जीवन वृत्तांत – जन्म और जन्म स्थान

  • जन्म : 3 जनवरी, 1911

  • जन्म स्थान : उत्तर प्रदेश के देहरादून (अब उत्तराखंड में)।

  • पारिवारिक पृष्ठभूमि : पिता का नाम बाबू तारीफ सिंह और माता का नाम प्रभुदेई था।

    18 वर्ष की आयु में विवाह हुआ, किन्तु 5-6 वर्ष बाद पत्नी का तपेदिक (टीबी) से निधन हो गया। पारिवारिक वियोग और अकेलेपन का गहरा प्रभाव उनकी अंतर्मुखी वेदना पर दिखाई देता हैं।

2. शिक्षा

  • प्रारंभिक शिक्षा : देहरादून में संपन्न हुई।

  • उच्च शिक्षा : गोंडा से हाई स्कूल उत्तीर्ण करने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए. (B.A.) किया।

  • एम.ए. (अंग्रेजी) की पढ़ाई भी आरंभ की, लेकिन पूर्ण नहीं कर सके।

  • चित्रकला में रुचि : उन्होंने प्रसिद्ध चित्रकार उकील बंधुओं से चित्रकला सीखी।

  • साहित्य, चित्रकला और संगीत में गहरी रुचि ने उनके लेखन को अनूठी बौद्धिक गहराई दी।

3. कृतित्व – प्रमुख रचनाएँ, पत्रकारिता, पुरस्कार

(क) प्रमुख रचनाएँ

  • काव्य संग्रह : ‘कुछ कविताएँ’, ‘कुछ और कविताएँ’, ‘चुका भी हूँ नहीं मैं’, ‘इतने पास अपने’, ‘बात बोलेगी’, ‘काल तुझसे होड़ हैं मेरी’, ‘टूटी हुई बिखरी हुई’।

  • गद्य रचनाएँ : ‘दोआब’ (निबंध और समीक्षा), ‘प्लॉट का मोर्चा’ (कहानी)।

  • विशेष कार्य : ‘उर्दू-हिंदी शब्दकोश’ (Dictionary) का संपादन – हिंदी और उर्दू को जोड़ने वाला ऐतिहासिक कार्य।

(ख) पत्रकारिता और कार्यक्षेत्र

  • ‘रूपाभ’ पत्रिका (संपादक – सुमित्रानंदन पंत) के कार्यालय में कार्य एवं संपादन से जुड़े।

  • ‘कहानी’ और ‘नया साहित्य’ पत्रिकाओं के संपादन मंडल में सहायक रहे।

  • आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) के समाचार विभाग में उप-संपादक के रूप में कार्य किया।

  • ‘नवभारत टाइम्स’ के विशेष संवाददाता रहें।

  • 1971 से 1982 तक हिंदी की प्रतिष्ठित साप्ताहिक पत्रिका ‘दिनमान’ के मुख्य संपादक रहे।

  • दिल्ली विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में ‘उर्दू-हिंदी कोष’ परियोजना के अध्यक्ष रहे।

(ग) पुरस्कार

  • साहित्य अकादमी पुरस्कार (1977) – ‘चुका भी हूँ नहीं मैं’ के लिए।

  • मैथिलीशरण गुप्त राष्ट्रीय सम्मान – मध्य प्रदेश सरकार द्वारा।

  • कबीर सम्मान – साहित्य में अभूतपूर्व योगदान के लिए।

  • साहित्य अकादमी फेलोशिप (महत्तर सदस्यता)।

4. मृत्यु

  • हिंदी और उर्दू की अनूठी साझी संस्कृति को अपनी कविताओं में समेटने वाले इस महान रचनाकार का निधन 12 मई, 1993 को अहमदाबाद में हुआ।

शब्दों से बनते हैं चित्र,

चित्रों से बनती है कविता,

और कविता से बनता हैं जीवन का अर्थ।

— शमशेर बहादुर सिंह

5. काव्यगत प्रमुख विशेषताएँ

  • कवियों का कवि : मुक्तिबोध ने इन्हें ‘कवियों का कवि’ कहा, क्योंकि इनकी शिल्पगत बनावट और भाषा के प्रयोग अत्यंत अनूठे हैं।

  • बिंब और चित्रकला का प्रभाव : शब्दों के माध्यम से दृश्य (Visuals) रचने की अद्भुत कला। कविता ‘उषा’ में घरेलू और प्राकृतिक बिंबों की छटा।

  • हिंदी-उर्दू का अनूठा दोआब : भाषा में हिंदी के तत्सम शब्द और उर्दू की नफ़ासत, लहजा और शायरी का सुंदर मेल।

  • प्रगतिशील चेतना और रोमानियत का मेल : शोषित वर्ग के प्रति गहरी सहानुभूति और वामपंथी वैचारिक चेतना के साथ-साथ प्रेम, सौंदर्य और प्रकृति की गहरी रोमानियत।

  • संक्षिप्त, सांकेतिक और अंतर्मुखी शैली : भाषा सरल, साफ-सुथरी, संवादात्मक और सपाट। बनावटी अलंकारों और कठिन शब्दों से दूर।

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